अमेरिका में मिडटर्म चुनाव: ट्रंप की लोकप्रियता की परीक्षा, कांग्रेस पर कब्जे के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स में कड़ा मुकाबला

अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन के लिए 3 नवंबर को हुआ मतदान केवल कांग्रेस की सीटों का चुनाव नहीं है, बल्कि यह ट्रंप के नेतृत्व, उनकी नीतियों और अमेरिका की राजनीतिक दिशा पर जनता की महत्वपूर्ण राय भी है।

Nov 4, 2026 - 07:06
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अमेरिका में मिडटर्म चुनाव: ट्रंप की लोकप्रियता की परीक्षा, कांग्रेस पर कब्जे के लिए रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स में कड़ा मुकाबला

वाशिंगटन। अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म चुनाव के मतदान के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजनीतिक लोकप्रियता और उनकी सरकार की नीतियों को लेकर जनता का रुख चर्चा के केंद्र में आ गया है। प्रतिनिधि सभा और सीनेट पर नियंत्रण के लिए रिपब्लिकन तथा डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला है। इन चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि ट्रंप को अपने कार्यकाल के शेष दो वर्षों में नीतिगत फैसले लेने की कितनी स्वतंत्रता मिलेगी या विपक्ष उनके सामने नई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी करेगा।

कांग्रेस के दोनों सदनों पर निगाहें

मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान हुआ है। इसके साथ ही 39 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव कराए गए हैं। प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए 218 और सीनेट में 51 सीटों की जरूरत है।

फिलहाल दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। डेमोक्रेट्स इस स्थिति को बदलने और कांग्रेस में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश में हैं। यदि विपक्ष किसी एक सदन में भी बहुमत हासिल कर लेता है तो ट्रंप प्रशासन के विधायी कार्यक्रमों और बजट संबंधी फैसलों पर उसका प्रभाव बढ़ जाएगा।

मतदान से पहले ही 5.8 करोड़ से ज्यादा लोगों ने डाले वोट

इस बार अमेरिकी मतदाताओं में चुनाव को लेकर खास सक्रियता दिखाई दी। मतदान दिवस से पहले ही 5.8 करोड़ से अधिक लोग अर्ली वोटिंग और डाक मतपत्रों के माध्यम से अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर चुके थे। एक नवंबर तक उपलब्ध आंकड़ों में यह संख्या 5.32 करोड़ से अधिक थी।

टेक्सास, नॉर्थ कैरोलिना, जॉर्जिया, मिशिगन और साउथ कैरोलिना जैसे राज्यों में शुरुआती मतदान में उल्लेखनीय भागीदारी सामने आई। इससे चुनाव में मतदाताओं की दिलचस्पी और राजनीतिक मुकाबले की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।

महंगाई और अर्थव्यवस्था ने तय किया चुनावी माहौल

मतदाताओं के लिए महंगाई, रोजगार और आर्थिक स्थिति सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल रहे। इसके अलावा आव्रजन नीति, गर्भपात के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज रही।

राष्ट्रपति ट्रंप की घटती लोकप्रियता रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनौती मानी जा रही है। अक्टूबर में सामने आए एक सर्वेक्षण में उनकी अप्रूवल रेटिंग 30 प्रतिशत बताई गई थी। डेमोक्रेटिक पार्टी ने महंगाई और प्रशासन की नीतियों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। वहीं रिपब्लिकन पार्टी ने अपने राजनीतिक आधार और ट्रंप के एजेंडे के समर्थन को चुनावी मुद्दा बनाया।

नतीजों से तय होगी ट्रंप की आगे की राजनीतिक ताकत

इन चुनावों का महत्व केवल प्रतिनिधियों और सीनेटरों के चयन तक सीमित नहीं है। परिणामों से यह भी स्पष्ट होगा कि अमेरिकी जनता ट्रंप प्रशासन के अब तक के कामकाज से कितनी संतुष्ट है। डेमोक्रेटिक पार्टी को किसी एक सदन में भी बहुमत मिलने पर राष्ट्रपति के विधायी फैसलों पर अंकुश लगाने और प्रशासन से जवाब मांगने का अवसर मिलेगा। दूसरी ओर, दोनों सदनों में रिपब्लिकन बहुमत कायम रहने पर ट्रंप अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने की बेहतर स्थिति में होंगे।

इस लिहाज से 3 नवंबर का मतदान ट्रंप के लिए मध्यावधि राजनीतिक परीक्षा है। इसके नतीजे न केवल अमेरिकी सत्ता संतुलन, बल्कि 2028 के राष्ट्रपति चुनाव की शुरुआती राजनीतिक जमीन भी तैयार कर सकते हैं।

SP_Singh AURGURU Editor