अमेरिका में गूंजेगी आगरा की बेटी की आवाज, पीडियाट्रिक कैंसर कॉन्फ्रेंस में भारत से अकेली चयनित डॉ. रंगोली श्रीवास्तव
आगरा के शास्त्रीपुरम निवासी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रंगोली श्रीवास्तव का अमेरिका में होने वाली अंतरराष्ट्रीय पीडियाट्रिक कैंसर कॉन्फ्रेंस के लिए चयन हुआ है। 10 से 12 नवंबर 2026 तक मेम्फिस स्थित सेंट जूड चिल्ड्रन्स रिसर्च हॉस्पिटल में आयोजित सम्मेलन में भारत से अकेले उन्हें प्रस्तुति देने का अवसर मिला है। एमडीएस गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. रंगोली स्नातक और परास्नातक में भी गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी हैं। वह तिहाड़ जेल समेत कई संस्थानों में मेडिकल कैंप के माध्यम से सेवाएं दे चुकी हैं। उनकी उपलब्धि से परिवार और आगरा में खुशी का माहौल है।
मेम्फिस के सेंट जूड चिल्ड्रन्स रिसर्च हॉस्पिटल में 10 से 12 नवंबर तक होगा सम्मेलन, ‘रिसर्च से वास्तविक प्रभाव’ विषय पर रखेंगी अपनी बात, चौथी बार अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में मिला चयन
आगरा। प्रतिभा, मेहनत और समाजसेवा के दम पर आगरा की एक और बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर और देश का नाम रोशन किया है। शास्त्रीपुरम निवासी असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रंगोली श्रीवास्तव का अमेरिका में आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के लिए चयन हुआ है। खास बात यह है कि इस सम्मेलन में भारत से अकेले डॉ. रंगोली श्रीवास्तव को प्रस्तुति देने के लिए चयनित किया गया है। वह इस उपलब्धि के साथ भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से अमेरिका के लिए रवाना हो चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि से परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों में खुशी की लहर है।
अमेरिका के टेनेसी राज्य के मेम्फिस स्थित सेंट जूड चिल्ड्रन्स रिसर्च हॉस्पिटल के मार्लो थॉमस सेंटर फॉर ग्लोबल एजुकेशन एंड कोलैबोरेशन में 10 से 12 नवंबर 2026 तक यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसका विषय ‘एक्सेलरेटिंग पीडियाट्रिक कैंसर इनोवेशन: फ्रॉम रिसर्च टू रियल-वर्ल्ड इम्पैक्ट’ है। यानी बच्चों के कैंसर के उपचार और उससे जुड़े नवाचारों को अनुसंधान से वास्तविक दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना। इस सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों के विशेषज्ञ, शोधकर्ता और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े प्रबुद्धजन शामिल होंगे।
भारत से अकेले मिला प्रस्तुति का अवसर
डॉ. रंगोली श्रीवास्तव के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि प्रतिष्ठित संस्था की ओर से इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारत से उन्हें अकेले प्रस्तुति देने के लिए चुना गया है। वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर बाल कैंसर से जुड़े शोध, नवाचार और उनके व्यावहारिक प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों के साथ विचार साझा करेंगी। डॉ. रंगोली ने बताया कि यह उनका चौथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जिसमें उन्हें चयनित होने का अवसर मिला है।
उनका कहना है कि जब वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बेटी बनकर पहुंचती हैं तो उन्हें बेहद सुखद अनुभूति होती है। दुनिया के अलग-अलग देशों से आए प्रबुद्धजनों और विशेषज्ञों के साथ मंच साझा करना उनके लिए गौरव और सीखने का महत्वपूर्ण अवसर होता है।
शिक्षा में भी हासिल किए गोल्ड मेडल
डॉ. रंगोली श्रीवास्तव की यह उपलब्धि उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता और निरंतर मेहनत का परिणाम है। उन्होंने आगरा के प्रतिष्ठित सेंट पैट्रिक्स स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में स्नातक और परास्नातक दोनों डिग्रियों में अपने बैच की गोल्ड मेडलिस्ट रहीं। उन्होंने एमडीएस की डिग्री भी गोल्ड मेडल के साथ हासिल की। वर्तमान में वह असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।
तिहाड़ जेल समेत कई संस्थानों में कर चुकी हैं मेडिकल कैंप
शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ डॉ. रंगोली श्रीवास्तव सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ी रही हैं। वह तिहाड़ जेल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान सहित अनेक संस्थाओं में मेडिकल कैंप आयोजित कर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। चिकित्सा के माध्यम से जरूरतमंदों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की उनकी पहल ने उनके व्यक्तित्व को एक अलग पहचान दी है।
परिवार में खुशी की लहर, विदेश में मनेगी दीपावली
डॉ. रंगोली की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि से उनके परिवार में उत्साह और गर्व का माहौल है। उनके पिता उपेंद्र कुमार श्रीवास्तव पंजाब नेशनल बैंक में वित्तीय सलाहकार हैं, जबकि माता जूही श्रीवास्तव अंग्रेजी की व्याख्याता हैं। उनके भाई अविरल श्रीवास्तव चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और भाभी आकांक्षा श्रीवास्तव वित्तीय परामर्शदाता हैं। उनके पति शोभित श्रीवास्तव इंजीनियर हैं और भारतीय रेल सेवा से संबंधित विभाग में कार्यरत हैं। ससुर रोहित श्रीवास्तव और सास शर्मिला श्रीवास्तव सहित परिवार के अन्य सदस्यों और रिश्तेदारों में भी इस उपलब्धि को लेकर खुशी है।
डॉ. रंगोली ने बताया कि इस बार उनकी दीपावली विदेश में मनेगी। हालांकि, उनके लिए यह दीपावली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने की खुशी और गर्व का अवसर भी होगी। आगरा की इस बेटी की उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि लगन, प्रतिभा और समर्पण के बल पर स्थानीय प्रतिभाएं भी वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं।