यमुना की बदहाली पर रिवर कनेक्ट कैंपेन ने मानव श्रृंखला बनाकर सरकार को घेरा, ताजमहल के नीचे बैराज और गाद सफाई की मांग

आगरा। यमुना की बदहाली दूर करने के लिए ताजमहल से नीचे की ओर बैराज बनाने, नदी की गाद निकालने और साल भर न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने की मांग उठी है। रिवर कनेक्ट कैंपेन के स्वयंसेवकों ने रविवार शाम यमुना आरती स्थल पर बैठक कर नदी को प्रदूषणमुक्त बनाने, भूजल स्तर सुधारने और यमुना के किनारों को सांस्कृतिक व धार्मिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए सरकार और प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की। स्वयंसेवकों ने नालों का पानी नदी में गिरने से रोकने, नदी तटों पर अतिक्रमण और प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने तथा पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए अलग लेन बनाने जैसे प्रस्ताव भी रखे। अपनी मांगों के प्रति शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए यमुना भक्तों ने नदी की तलहटी में मानव श्रृंखला भी बनाई।

Oct 11, 2026 - 20:56
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यमुना की बदहाली पर रिवर कनेक्ट कैंपेन ने मानव  श्रृंखला बनाकर सरकार को घेरा, ताजमहल के नीचे बैराज और गाद सफाई की मांग
रिवर कनेक्ट कैंपेन के सदस्य रविवार को आरती स्थल पर एकत्रित होकर यमुना की बदहाली की मांग करते हुए।

बैठक में कहा गया कि ताजमहल से नीचे की ओर यमुना पर बैराज बनाने की योजना पर जल्द अमल किया जाना चाहिए। इससे नदी में पानी का भंडारण बढ़ाने और आगरा के जल संकट से निपटने में मदद मिल सकती है। स्वयंसेवकों ने नदी तल से गाद और सिल्ट निकालने की मांग करते हुए कहा कि इससे नदी की जलधारण क्षमता बढ़ाने और भूजल पुनर्भरण में मदद मिल सकती है।

साल भर पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने पर जोर

बैठक में यमुना में साल भर न्यूनतम जल प्रवाह बनाए रखने की जरूरत बताई गई। स्वयंसेवकों का कहना था कि पर्याप्त पानी के बिना नदी की पारिस्थितिकी, जलीय जीवन और आसपास के भूजल तंत्र को सुरक्षित रखना मुश्किल है। यमुना के पुनर्जीवन के लिए नदी में पर्याप्त पानी की उपलब्धता और प्रदूषण पर नियंत्रण को प्राथमिकता देने की मांग की गई।

पर्यावरणविद डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने नदी में गिरने वाले नालों के पानी को रोककर उसे नदी के समानांतर बनाई जाने वाली नहर में मोड़ने का सुझाव दिया। उन्होंने यमुना के दोनों किनारों पर पक्के तटबंध बनाने और सुनियोजित रिवर फ्रंट विकसित करने की मांग भी रखी। बैठक में कहा गया कि रिवर फ्रंट विकास का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण नहीं होना चाहिए, बल्कि नदी की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और नागरिकों के लिए बेहतर सार्वजनिक स्थान तैयार करना भी होना चाहिए।

सांस्कृतिक गतिविधियों से नदी से जुड़ेंगे लोग

जगन प्रसाद तेहरिया ने यमुना के किनारों पर नियमित सांस्कृतिक आयोजन, धार्मिक कार्यक्रम और जनभागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उनका कहना था कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय लोगों का नदी के साथ भावनात्मक रिश्ता मजबूत होगा। जब लोग यमुना को अपनी साझा धरोहर मानेंगे, तभी उसके संरक्षण के लिए स्थायी जनआंदोलन खड़ा हो सकेगा।

प्रदूषण फैलाने वालों पर निगरानी और कार्रवाई की मांग

शहतोश गौतम ने यमुना को प्रदूषित करने वालों पर निगरानी के लिए निरंतर व्यवस्था बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले प्रतिष्ठानों और गतिविधियों की नियमित जांच होनी चाहिए तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। बैठक में नदी तटों पर मवेशियों के प्रवेश पर रोक लगाने और यमुना किनारा रोड से ट्रांसपोर्ट कंपनियों को अन्य उपयुक्त स्थानों पर स्थानांतरित करने की मांग भी उठाई गई।

पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए अलग लेन

नदी किनारे नागरिकों की सुरक्षा और पर्यावरण अनुकूल आवागमन को बढ़ावा देने के लिए बृज खंडेलवाल ने पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए अलग लेन बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने इन लेन को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने और लाल रंग से रंगने की मांग की, ताकि उनकी पहचान आसानी से हो सके और लोगों को वाहनों से सुरक्षित दूरी मिल सके।

बैठक में कहा गया कि यमुना को केवल जलधारा के रूप में नहीं, बल्कि आगरा की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के रूप में देखा जाना चाहिए। नदी के पुनर्जीवन के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बीच बेहतर समन्वय, समयबद्ध कार्ययोजना और जनभागीदारी जरूरी है।

रिवर कनेक्ट कैंपेन ने सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की कि इन प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई शुरू की जाए, ताकि यमुना को स्वच्छ, प्रवाहमान और जनजीवन से जुड़ी नदी के रूप में पुनर्जीवित किया जा सके।

बैठक में गोस्वामी नंदन श्रोत्रिय, पंडित जुगल किशोर, चतुर्भुज तिवारी और मुकेश चौधरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor