रसखान समाधि परिसर में सांझी महोत्सव का समापन, सूफी गायन और ब्रज कला ने मोहा मन
महावन/मथुरा। रसखान-ताज बीबी समाधि परिसर में पांच दिन तक ब्रज की सांझी कला, श्रीकृष्ण की लीलाओं, लोकसंगीत, कथक और सूफियाना गायन के रंग बिखरे। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सांझी महोत्सव-2026 का शनिवार को समापन हो गया। अंतिम दिन सूफी गायक मधुकर ने रसखान, ताज बीबी और सांझी परंपरा से जुड़े पदों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को भावविभोर किया। महोत्सव में पारंपरिक कला के विविध स्वरूपों के प्रदर्शन के साथ नई पीढ़ी को सांझी कला से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
पांच दिवसीय महोत्सव में ब्रज की पारंपरिक सांझी कला और श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित चित्रांकन विशेष आकर्षण रहे। कलाकारों ने सूखे रंगों और पानी पर सांझी के विभिन्न स्वरूप तैयार किए। गोबर से बनाई गई सांझी और कैनवास पर उकेरे गए श्रीकृष्ण की लीलाओं के चित्रों ने भी दर्शकों का ध्यान खींचा। मुक्ताकाशी मंच पर ब्रज के लोक कलाकारों ने भजन, लोकगीत और जिकड़ी भजन प्रस्तुत किए। कथक कलाकार चेतन शर्मा की नृत्य प्रस्तुति और ब्रजभाषा कवि सम्मेलन ने महोत्सव को सांस्कृतिक रंगों से सराबोर किया।
कार्यशाला में नई पीढ़ी ने सीखी सांझी कला
पारंपरिक सांझी कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से दक्ष एजुकेशन इंस्टीट्यूट के सहयोग से दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों ने सांझी बनाने की तकनीक सीखी। संगोष्ठी में कलाकारों और शिक्षाविदों ने इस पारंपरिक कला के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के उपायों पर विचार साझा किए।
परिषद के उपाध्यक्ष और सीईओ ने देखीं कलाकृतियां
उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, श्रीमती मंजिरी मिश्र और सीईओ लक्ष्मी नागप्पन ने महोत्सव में प्रदर्शित सांझी कलाकृतियों का अवलोकन किया। उन्होंने कलाकारों से बातचीत कर उनकी कला और प्रतिभा की सराहना की। मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के सचिव आशीष कुमार और तकनीकी विशेषज्ञ आरपी सिंह ने भी महोत्सव का भ्रमण कर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
परिषद के अपर कार्यपालक अधिकारी राजीव पांडेय ने प्रतिभागी कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। आयोजन की व्यवस्थाएं सीपी सिंह सिकरवार और अनुपम यादव ने संभालीं।