24 साल पुराने एसिड अटैक केस में आरोपी आरिफ ने जमानत अर्जी वापस ली, रूकैया की इंसाफ की लड़ाई में नया मोड़, 20 साल बाद दर्ज हुई थी एफआईआर

आगरा। करीब 24 साल पहले हुए एसिड अटैक की पीड़ा झेल रही रूकैया की इंसाफ की लड़ाई में इलाहाबाद हाईकोर्ट में नया मोड़ आया है। आरोपी आरिफ की ओर से दाखिल जमानत अर्जी को उसके अधिवक्ता ने आगे न बढ़ाने और वापस लेने की अनुमति मांगी। हाईकोर्ट ने 28 सितंबर 2026 को आवेदन को वापस लिया गया मानते हुए खारिज कर दिया। मामला वर्ष 2002 का है, जब अलीगढ़ में बहन के देवर आरिफ ने करीब 14 वर्षीय रूकैया पर एसिड डाल दिया था। घटना में उसके चेहरे और शरीर पर गंभीर जलने की चोटें आई थीं। घटना के करीब 20 साल बाद 26 अप्रैल 2023 को आरोपी आरिफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी।

Sep 29, 2026 - 20:22
 0
24 साल पुराने एसिड अटैक केस में आरोपी आरिफ ने जमानत अर्जी वापस ली, रूकैया की इंसाफ की लड़ाई में नया मोड़, 20 साल बाद दर्ज हुई थी एफआईआर
अधिवक्ता नरेस पारस के साथ पीड़ित रुकैया।

हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों को बताया था बहुत दुर्लभ

जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 5 मार्च 2025 के आदेश में मामले के तथ्यों को बहुत दुर्लभ बताया था। अदालत के रिकॉर्ड में मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर रूकैया के चेहरे, गर्दन, सीने और हाथ पर गंभीर जलने की चोटों का उल्लेख है। मेडिकल परीक्षण रिपोर्ट 7 सितंबर 2002 की बताई गई है और इसे केस डायरी का हिस्सा बताया गया है। अदालत ने यह भी माना था कि घटना के समय रूकैया नाबालिग थी।

जमानत प्रार्थना पत्र पर अंतिम आदेश से पहले हाईकोर्ट ने पीड़िता को सुनवाई का अवसर देना जरूरी माना था। इसके लिए संबंधित थाना प्रभारी को जमानत अर्जी की प्रति पीड़िता को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था।

हादसे में घायल हुए, फिर भी नहीं छोड़ी पैरवी

रूकैया की कानूनी पैरवी आगरा के सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नरेश पारस कर रहे हैं। रूकैया को इलाहाबाद हाईकोर्ट ले जाते समय कानपुर में बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में अधिवक्ता नरेश पारस घायल हो गए थे। इसके बावजूद उन्होंने कानूनी लड़ाई जारी रखी। स्वास्थ्य में सुधार के बाद वह दोबारा रूकैया को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे और सुनवाई में पैरवी की।

पैरवी के दौरान अधिवक्ता विपिन चंद्र पाल ने हाईकोर्ट में पीड़िता की ओर से पक्ष रखा। पिछले करीब 21 महीनों में इस मामले में लगभग 40 सुनवाई हो चुकी हैं। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बीच पीड़िता की ओर से लगातार अदालत में अपना पक्ष रखा जा रहा है।

20 साल बाद दर्ज हुई एफआईआर

रूकैया के मामले में घटना के करीब 20 वर्ष बाद तत्कालीन एडीजी राजीव कृष्ण के आदेश के बाद रिपोर्ट दर्ज की गई। इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया में आगे बढ़ा। अधिवक्ता नरेश पारस की पैरवी पर रूकैया को सरकार से पांच लाख रुपये का मुआवजा भी दिलाया गया।

नरेश पारस का कहना है कि रूकैया को न्याय दिलाने और मुकदमे में कानून के अनुसार सजा सुनिश्चित कराने के लिए अदालत में मजबूत पैरवी जारी रखी जाएगी।

आरिफ के अधिवक्ता ने वापस मांगी जमानत अर्जी

28 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में आरोपी आरिफ के अधिवक्ता राकेश कुमार मौर्य ने अदालत से कहा कि वह जमानत आवेदन को आगे नहीं बढ़ाना चाहते और उसे वापस लेने की अनुमति चाहते हैं। हाईकोर्ट ने आवेदन को वापस लिया गया मानते हुए खारिज कर दिया। अब मामले की आगे की न्यायिक कार्यवाही और मूल आपराधिक मुकदमे में होने वाली सुनवाई पर नजर रहेगी।

एसिड अटैक के दर्द से आत्मनिर्भरता की राह तक पहुंची रूकैया

रूकैया की लड़ाई केवल अदालत तक सीमित नहीं है। हादसे के बाद जीवन में आए संघर्षों के बावजूद वह अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रही है। वर्तमान में वह छांव फाउंडेशन द्वारा संचालित शीरोज हैंगआउट कैफे, आगरा में काम कर रही है। रोजगार के माध्यम से वह आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

SP_Singh AURGURU Editor