यूपीसीडा के 35 रुपये वर्गमीटर शुल्क पर भड़का चैम्बर, ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन’ को बताया उद्यमियों का उत्पीड़न, विधायक धर्मपाल सिंह ने मुख्यमंत्री से शीघ्र मुलाकात कराने का दिया आश्वासन
आगरा। औद्योगिक क्षेत्रों में यूपीसीडा के बढ़े हुए मेंटेनेंस शुल्क और वर्षों से उत्पादन कर रही इकाइयों से मांगे जा रहे ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन’ को लेकर नेशनल चैम्बर ऑफ इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स ने सरकार के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। चैम्बर सभागार में अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल की अध्यक्षता में एत्मादपुर विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह के साथ हुई बैठक में उद्यमियों ने बताया कि यूपीसीडा 35 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मेंटेनेंस शुल्क मांग रहा है। चैम्बर ने इसे उद्यमियों पर बढ़ता आर्थिक बोझ बताते हुए शुल्क कम कराने और ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन’ की बाध्यता तत्काल समाप्त कराने की मांग की। विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने सभी समस्याएं सुनने के बाद चैम्बर के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से शीघ्र मुलाकात कराने का आश्वासन दिया।
चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल और पूर्व अध्यक्ष अमर मित्तल ने बताया कि 35 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से 1000 वर्गमीटर भूमि पर सालाना 35 हजार रुपये मेंटेनेंस शुल्क बनता है। वहीं, औद्योगिक इकाइयों से नगर निगम द्वारा अब तक करीब 18 हजार से 25 हजार रुपये तक मेंटेनेंस शुल्क लिया जा रहा था। हालांकि नगर निगम के कर की दर खाली भूमि और कवर्ड एरिया, क्षेत्र तथा सड़क की चौड़ाई के आधार पर अलग-अलग होती है, इसलिए दोनों शुल्कों की सीधी तुलना संभव नहीं है। फिर भी उद्यमियों को प्राप्त हो रहे बिलों के अनुसार यूपीसीडा का शुल्क नगर निगम की तुलना में करीब 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक बताया गया है। नेशनल चैम्बर की ओर से पहले भी यूपीसीडा के मेंटेनेंस शुल्क को कम करने की मांग उठाई जा चुकी है।
शुल्क बढ़ा, सुविधाएं कम मिलने का आरोप
चैम्बर पदाधिकारियों ने कहा कि मेंटेनेंस शुल्क का बोझ बढ़ने के बावजूद औद्योगिक क्षेत्रों में मिलने वाली सुविधाएं अपेक्षित स्तर की नहीं हैं। इसके साथ ही जल निगम द्वारा उद्यमियों को जलकर के बिल भेजे जाने का मुद्दा भी उठाया गया। चैम्बर ने कहा कि उद्यमियों से यूपीसीडा का रखरखाव शुल्क लेने के साथ जल निगम का जलकर वसूले जाने से उन पर दोहरे शुल्क का बोझ पड़ रहा है। इस संबंध में चैम्बर पहले भी सवाल उठा चुका है।
चैम्बर ने विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह से मांग की कि आगरा के औद्योगिक क्षेत्रों के मेंटेनेंस शुल्क को शीघ्र कम कराने के लिए शासन स्तर पर आदेश कराए जाएं। साथ ही उद्यमियों पर पड़ रहे दोहरे शुल्क के मुद्दे का भी समाधान कराया जाए।
‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन’ को लेकर भी विरोध
पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार गोयल ने कहा कि यूपीसीडा द्वारा वर्षों पहले स्थापित औद्योगिक इकाइयों को भी उससे ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रोडक्शन’ लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूपीसीडा से आवंटित भूखंडों पर अधिकांश इकाइयां लंबे समय से उत्पादन कर रही हैं और नियमित रूप से जीएसटी, आयकर तथा विभिन्न श्रम कानूनों का अनुपालन कर रही हैं। इनमें बड़ी संख्या में श्रमिक भी नियमित रूप से कार्यरत हैं।
चैम्बर ने कहा कि ऐसी इकाइयों को दोबारा यूपीसीडा से उत्पादन प्रमाणपत्र लेने के लिए दबाव बनाना उचित नहीं है। इसे उद्यमियों के लिए अनावश्यक प्रक्रिया और उत्पीड़न बताते हुए प्रमाणपत्र की बाध्यता तत्काल समाप्त करने की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण पहले से दबाव में उद्योग
चैम्बर पदाधिकारियों ने कहा कि आगरा की औद्योगिक इकाइयां ताज ट्रेपेजियम जोन से संबंधित प्रतिबंधों और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन के कारण पहले से अनेक चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में यूपीसीडा की ओर से इस तरह की अतिरिक्त प्रक्रियाएं और शुल्क उद्यमियों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। चैम्बर ने पूरे मामले में शासन स्तर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
नेशनल चैम्बर ने जुलाई में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष भी आगरा के औद्योगिक क्षेत्रों में यूपीसीडा के शुल्क कम करने की मांग रखी थी। उस समय भी 35 रुपये प्रति वर्गमीटर मेंटेनेंस शुल्क और सुविधाओं से जुड़े सवाल उठाए गए थे।
मुख्यमंत्री से जल्द मुलाकात का आश्वासन
एत्मादपुर विधायक डॉ. धर्मपाल सिंह ने चैम्बर की ओर से उठाई गई सभी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने इनके समाधान के लिए चैम्बर के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से शीघ्र मुलाकात कराने का आश्वासन दिया।
धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल ने किया। बैठक में चैम्बर अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल, उपाध्यक्ष नितेश अग्रवाल और अम्बा प्रसाद गर्ग, पूर्व अध्यक्ष के.के. पालीवाल, शांतिस्वरूप गोयल, सीताराम अग्रवाल, प्रदीप कुमार वार्ष्णेय, अमर मित्तल, मनीष अग्रवाल, अतुल कुमार गुप्ता, अशोक कुमार गोयल, राजीव कुमार अग्रवाल, संजय गोयल, सदस्य सुनील सिंघल, मयंक कुमार अग्रवाल, प्रदीप गोयल, अंकित दौनेरिया, अमित बंसल, संजय कुमार गोयल, राकेश सिंघल, राजेन्द्र कुमार अग्रवाल, देवेन्द्र गोयल, सुनील गर्ग, नरेन्द्र तनेजा, संजय अरोरा, राजेश वर्मा, सतीश अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।