जिस धारा में भेजा था जेल, अदालत ने उसी को माना निराधार,सीईसी आवास केस में कांग्रेसियों को बड़ी राहत
आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के मामले में सीजेएम अदालत ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने धारा 307 को निराधार मानते हुए हटाने का आदेश दिया और कांग्रेस नेता अनिल यादव, मुकेश धनगर समेत सभी अभियुक्तों की जमानत मंजूर कर ली। बचाव पक्ष की ओर से सुब्रत मेहरा, रूपेश भदौरिया, संतोष दीक्षित, पंडित अपूर्व शर्मा और सुमित रावत ने पैरवी की। अदालत के आदेश के बाद जेल में बंद कार्यकर्ताओं की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
सीईसी आवास प्रदर्शन मामले में धारा 307 हटाने का आदेश, अनिल यादव-मुकेश धनगर समेत सभी को जमानत
आगरा। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के बाद दर्ज मुकदमे में जेल भेजे गए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को अदालत से बड़ी कानूनी राहत मिली है। सीजेएम अदालत में हुई सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर धारा 307 के आरोप को निराधार मानते हुए हटाने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही कांग्रेस नेता अनिल यादव और मुकेश धनगर समेत सभी अभियुक्तों की जमानत मंजूर कर ली गई।
गंभीर आरोप के आधार पर हुई थी गिरफ्तारी
यह मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के आगरा स्थित पैतृक आवास के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध दर्ज कराया था। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था और उन्हें जेल भेज दिया गया था। मामले में गंभीर धाराएं लगाए जाने के कारण यह प्रकरण राजनीतिक और कानूनी तौर पर चर्चा में रहा। जेल भेजे गए अभियुक्तों की ओर से अदालत में जमानत के लिए पैरवी की गई।
सुनवाई में धारा 307 की बुनियाद पर उठे सवाल
सीजेएम अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मुकदमे में लगाए गए आरोपों, मामले के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बनाकर अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले में धारा 307 लगाए जाने के लिए आवश्यक आधार और साक्ष्य पर्याप्त नहीं हैं। दलीलों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद अदालत ने धारा 307 के आरोप को निराधार मानते हुए इसे हटाने का आदेश दिया। इसके साथ ही सभी अभियुक्तों को जमानत प्रदान कर दी गई।
इन अधिवक्ताओं ने की पैरवी
अभियुक्तों की ओर से अधिवक्ता सुब्रत मेहरा, रूपेश भदौरिया, संतोष दीक्षित, पंडित अपूर्व शर्मा और सुमित रावत ने न्यायालय में पैरवी की। बचाव पक्ष की ओर से मुकदमे के तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को अदालत के समक्ष रखा गया। अधिवक्ता पंडित अपूर्व शर्मा ने कहा, “बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष पूरे तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। अदालत ने धारा 307 के आरोप को निराधार मानते हुए हटाने का आदेश दिया है और सभी अभियुक्तों को जमानत दी है। यह आदेश अभियुक्तों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी राहत है।”
अदालत के आदेश से रिहाई का रास्ता साफ
अदालत के इस आदेश के बाद जेल में बंद कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। धारा 307 हटाए जाने और सभी अभियुक्तों को जमानत मिलने से मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को तत्काल बड़ी राहत मिली है। हालांकि, अदालत द्वारा जमानत दिए जाने का अर्थ मामले का पूरी तरह समाप्त होना नहीं है। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी और अन्य आरोपों व तथ्यों पर न्यायालय में सुनवाई आगे बढ़ेगी। सीईसी आवास प्रदर्शन से जुड़े इस प्रकरण में अदालत के ताजा आदेश ने अब मामले की कानूनी दिशा को बदल दिया है। जिस धारा के आधार पर मामला गंभीर माना जा रहा था, उसी धारा को अदालत द्वारा निराधार मानकर हटाए जाने के बाद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को राहत मिली है।