आगरा में जैन संतों का भव्य मिलन, आचार्य लोकेश मुनि बोले-पंथ अलग हो सकते हैं, धर्म एक

आगरा के निर्मल सेवा सदन में पयुर्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम सत्य धर्म पर आत्मस्पंदन ध्यान शिविर आयोजित हुआ। मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज सहित जैन संतों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने पूजन-अभिषेक किया। राष्ट्रसंत आचार्य लोकेश मुनि के आगमन पर संत मिलन और नागरिक अभिनंदन हुआ। आचार्य लोकेश मुनि ने अहिंसा, अनेकांत और जैन एकता का संदेश दिया, जबकि मुनि समत्व सागर ने सत्य को जीवन का स्वभाव बताते हुए कषायों से मुक्ति का आह्वान किया।

Sep 20, 2026 - 18:09
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आगरा में जैन संतों का भव्य मिलन, आचार्य लोकेश मुनि बोले-पंथ अलग हो सकते हैं, धर्म एक
राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने किया आचार्य लोकेश मुनि का स्वागत करते हुए।

उत्तम सत्य धर्म पर आत्मस्पंदन ध्यान शिविर में गूंजा सत्य, अहिंसा और अनेकांत का संदेश, राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने किया आचार्य लोकेश मुनि का सम्मान

आगरा। रकाबगंज-छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में पयुर्षण पर्व के चौथे दिन उत्तम सत्य धर्म के अवसर पर आत्मस्पंदन ध्यान शिविर श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज, मुनि श्री 108 शील सागर महाराज और मुनि श्री 108 सुप्रभात सागर महाराज के सानिध्य में हुए आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अभिषेक, पूजन और शांतिधारा में भाग लिया।

कार्यक्रम में राष्ट्रसंत आचार्य लोकेश मुनि जी महाराज का भी भव्य आगमन हुआ। इस दौरान मुनि श्री समत्व सागर महाराज और आचार्य लोकेश मुनि का संत मिलन आकर्षण का केंद्र रहा। सकल जैन समाज की ओर से आयोजित नागरिक अभिनंदन कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद नवीन जैन और योगेश जैन ने आचार्य लोकेश मुनि को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।

पंथ अलग, धर्म एक

आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि दिगंबर और श्वेतांबर जैसे पंथों के भेद से अधिक महत्वपूर्ण भगवान महावीर का दिया हुआ अहिंसा और अनेकांत का संदेश है। उन्होंने कहा कि हम सभी भगवान महावीर की संतान हैं और उनके सिद्धांतों में विश्व शांति की क्षमता है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर ने मुक्ति का संबंध केवल बाहरी वेशभूषा से नहीं, बल्कि व्यक्ति के भीतर की पवित्रता और कषायों से मुक्ति से जोड़ा। क्रोध, मान, माया, लोभ, राग, द्वेष और मोह से मुक्त होकर ही व्यक्ति आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।

आचार्य लोकेश मुनि ने कहा, “पंथ अलग हो सकते हैं, पर धर्म एक है। परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन हमारी पहचान एक है। हम सब जैन हैं और जैन एकता ही हमारी शक्ति है।” उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का अहिंसा और अनेकांत का संदेश आज भी विश्व में शांति स्थापित करने की दिशा दिखाता है।

सत्य स्वभाव है, बनाया नहीं जाता : समत्व सागर

मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज ने उत्तम सत्य धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि जब सत्य को असत्य और असत्य को सत्य मान लिया जाता है, तब व्यक्ति अधोगति की ओर बढ़ने लगता है। भगवान महावीर ने सत्य को बनाया नहीं, बल्कि उसे जीव के स्वभाव के रूप में समझाया। उन्होंने कहा कि सत्य किसी कृत्रिम प्रयास से निर्मित नहीं होता, बल्कि स्वभाव के रूप में त्रैकालिक होता है। उन्होंने साधकों से अपने भीतर की कषायों को पहचानने और उन्हें दूर करने का आह्वान किया। मुनि श्री ने कहा कि क्रोध, अहंकार, मायाचारी और लोभ जैसी प्रवृत्तियां सत्य को ढक देती हैं। उन्होंने कहा कि दस धर्मों का संदेश अंततः विश्व शांति से जुड़ा है। यदि मनुष्य अपने भीतर की कषायों पर विजय प्राप्त कर ले, तो परिवार, समाज और विश्व में शांति का वातावरण स्थापित हो सकता है। कार्यक्रम का संचालन सतेंद्र जैन साहुला ने किया।

ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में श्रुत मंथन वर्षायोग समिति से राज्यसभा सांसद नवीन जैन, योगेश जैन, रमेश जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), शैलेश जैन, डॉ. सुमन जैन (सुराना), संजय जैन (सुराना), विवेक जैन, चक्रेश जैन, आशीष जैन (बाबा), नवीन जैन, प्रवीन जैन (नेता जी), मनोज जैन (वाकलीवाल), जगदीश प्रसाद जैन, जितेंद्र जैन, दीपक जैन, रोहित जैन, आशु जैन (वीके), आयुष जैन सहित मीडिया प्रभारी राहुल जैन और सकल जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

21 सितंबर को उत्तम संयम धर्म का आयोजन

मीडिया प्रभारी राहुल जैन ने बताया कि 21 सितंबर 2026 को सुबह सात बजे निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज के सानिध्य में पयुर्षण पर्व के छठवें दिन उत्तम संयम धर्म के अवसर पर अभिषेक, पूजन और विधान का आयोजन किया जाएगा।