नकली दवाओं के कारोबार पर अदालत का शिकंजा, तीन आरोपियों की जमानत खारिज

मलपुरा में नकली दवाओं के भंडारण के मामले में अदालत ने सलूआ उर्फ मुकीम, शामिन उर्फ छोटू और इकरार की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। औषधि निरीक्षकों और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में अवैध दवाओं का बड़ा जखीरा मिला था। 14 प्रकार की दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। मामला हे मां मेडिकोज के संचालक हिमांशु अग्रवाल से भी जुड़ा है।

Nov 5, 2026 - 01:01
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नकली दवाओं के कारोबार पर अदालत का शिकंजा, तीन आरोपियों की जमानत खारिज

आगरा। नकली दवाओं के भंडारण के मामले में आरोपियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मलपुरा क्षेत्र में भारी मात्रा में अवैध दवाओं की बरामदगी से जुड़े मामले में अदालत ने तीन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जमानत पाने की कोशिश कर रहे सलूआ उर्फ मुकीम, शामिन उर्फ छोटू और इकरार को अदालत से राहत नहीं मिली। इस फैसले से नकली दवाओं के कारोबार से जुड़े इस मामले में आरोपियों को बड़ा झटका लगा है।

यह मामला मलपुरा थाना क्षेत्र के धनौली में औषधि निरीक्षकों की संयुक्त टीम और पुलिस की छापेमारी से जुड़ा है। कार्रवाई के दौरान टीम को अवैध रूप से भंडारित दवाओं का बड़ा जखीरा मिला था। मौके से बरामद दवाओं की गुणवत्ता और उनकी वैधता की जांच के लिए 14 प्रकार के नमूने लेकर प्रयोगशाला भेजे गए थे। मामले में हे मां मेडिकोज के संचालक हिमांशु अग्रवाल का नाम भी सामने आया था। इसके बाद थाना मलपुरा में नकली दवाओं के भंडारण के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया।

अदालत में आरोपियों की ओर से जमानत के लिए याचिकाएं दाखिल की गई थीं, लेकिन अदालत ने तीनों को राहत देने से इनकार करते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं। इससे मामले की गंभीरता और दवाओं के अवैध भंडारण से जुड़े आरोपों को लेकर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने का रास्ता बना हुआ है।

नकली दवाओं के खिलाफ आगरा में पहले भी हो चुकी हैं बड़ी कार्रवाई

आगरा में नकली और अवैध दवाओं का कारोबार लंबे समय से औषधि विभाग और पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है। इससे पहले भी जिले में दवा कारोबार से जुड़ी अनियमितताओं के मामलों में बड़े स्तर पर कार्रवाई की जा चुकी है। औषधि विभाग की जांच में 58 दवा लाइसेंसों से जुड़ी अनियमितताएं सामने आने के बाद नौ मुकदमे दर्ज कराए गए थे। इन मामलों में करीब 3.63 करोड़ रुपये की दवाओं से जुड़ी कार्रवाई भी चर्चा में रही थी।

मलपुरा का यह मामला भी इसी तरह अवैध दवा भंडारण और दवाओं की वास्तविक गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। दवाओं के 14 प्रकार के नमूने जांच के लिए भेजे जाने से अब उनकी गुणवत्ता और नकली होने के आरोपों की पुष्टि में प्रयोगशाला रिपोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

नकली दवाओं का कारोबार सीधे लोगों की सेहत और जिंदगी से जुड़ा है। ऐसी दवाओं के इस्तेमाल से मरीजों के उपचार पर प्रतिकूल असर पड़ने का खतरा रहता है। यही वजह है कि औषधि विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के साथ-साथ इस तरह के मामलों में आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।