आगरा नगर निगम में मनोनीत पार्षदों की सूची पर भाजपा में हलचल: अब तक चला आ रहा फॉर्मूला टूटा, आगरा दक्षिण और छावनी के कार्यकर्ता खुद को ठगा महसूस कर रहे
आगरा। प्रदेश सरकार द्वारा आगरा नगर निगम के लिए मनोनीत किए गए दस पार्षदों की सूची जारी होते ही स्थानीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के भीतर असंतोष और हैरानी का माहौल बन गया है। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों को लेकर पार्टी के अंदर सवाल उठना तय है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि सूची में शामिल कई नाम ऐसे हैं, जिनकी स्थानीय स्तर पर चर्चा तक नहीं हुई थी और पारंपरिक विधानसभा क्षेत्रवार फॉर्मूले को भी इस बार पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।
फॉर्मूला टूटा, आगरा उत्तर को मिला सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व
भाजपा में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि शहरी क्षेत्र की तीन विधानसभा सीटों आगरा उत्तर, आगरा दक्षिण और आगरा छावनी से तीन-तीन पार्षद और एत्मादपुर विधान सभा क्षेत्र से एक पार्षद मनोनीत किया जाता रहा है।
लेकिन इस बार जारी सूची में यह फॉर्मूला पूरी तरह बदल गया है। दस मनोनीत पार्षदों में पांच आगरा उत्तर विधानसभा क्षेत्र से, दो-दो आगरा छावनी और एत्मादपुर क्षेत्र से, जबकि आगरा दक्षिण से केवल एक पार्षद बनाया गया है।
उच्च शिक्षा मंत्री के क्षेत्र से केवल एक पार्षद
आगरा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र, जो प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का क्षेत्र है, वहां से केवल सुनील कर्मचंदानी को पार्षद बनाया गया है। इस क्षेत्र को केवल एक सीट मिलने से क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय नाम कटे, नए नाम जुड़ने पर उठे सवाल
सूची जारी होने के बाद भाजपा के अंदरूनी गलियारों में इस बात को लेकर भी चर्चा है कि स्थानीय स्तर पर जिन कार्यकर्ताओं के नामों पर सहमति बनाकर लखनऊ भेजे गए थे, उनमें से कई नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं किए गए। इसके बजाय कुछ नए नाम जोड़ दिए गए, जिससे कार्यकर्ताओं में हैरानी और असंतोष देखा जा रहा है।
भाजपा में सामान्यतः उन कार्यकर्ताओं को मनोनीत पार्षद नहीं बनाया जाता जो पार्षद का चुनाव लड़कर हार चुके हों। लेकिन इस बार खंदारी क्षेत्र से पिछला चुनाव हार चुके धर्मवीर सिंह सिकरवार को पार्षद नामित किया गया है। इसके अलावा सूची में नितीश भारद्वाज और पंकज सिकरवार जैसे नामों को लेकर भी कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।
इस सूची को लेकर आपत्तियां भी जताई जा सकती हैं। दक्षिण और छावनी विधानसभा क्षेत्रों के कई कार्यकर्ता ऐसे थे जिनके नाम स्थानीय स्तर पर चर्चा के बाद आगे भेजे गए थे, लेकिन अंतिम सूची में उन्हें स्थान नहीं मिला।
फिलहाल सूची जारी होने के बाद भाजपा के अंदरूनी माहौल में हलचल तेज है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संगठन के भीतर और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।