धाकरान में बड़ा खेल उजागर, नजूल विभाग की एनओसी ही नहीं-फिर कैसे पास हुआ नक्शा, चार नामजद
आगरा के धाकरान में नजूल भूमि पर नजूल विभाग की एनओसी के बिना कथित फर्जी आख्या के आधार पर व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत कराने के आरोप में चार लोगों के खिलाफ लोहामंडी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। विवादित जमीन सर्वे शीट नंबर 107, मौजा चक अब्बल में दर्ज बताई गई है। चार जनवरी 2025 के कथित आपत्ति पत्र को नजूल विभाग ने अपने कार्यालय से जारी होने से इनकार किया है। एडीए ने मानचित्र निरस्त कर निर्माण संबंधी नोटिस जारी किया है। अब पुलिस दस्तावेजों की सत्यता और नक्शा स्वीकृति की प्रक्रिया की जांच करेगी।
गुड़ की मंडी के बाद धाकरान में नजूल भूमि का मामला गर्माया, 4 जनवरी 2025 के पत्र से खुलेंगी कई परतें, जांच के दायरे में नक्शा स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया
आगरा। सरकारी जमीन पर कब्जा किसका है और उस पर निर्माण की अनुमति आखिर किस आधार पर दी जा रही है? आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) में नजूल भूमि से जुड़े लगातार सामने आ रहे मामले इन सवालों को गंभीर बना रहे हैं। सरकारी जमीनों पर निर्माण और उनके नक्शे स्वीकृत कराने के खेल में अब धाकरान का मामला भी जुड़ गया है। गुड़ की मंडी प्रकरण में पहले से मुकदमा दर्ज होने के बाद धाकरान की नजूल भूमि पर व्यावसायिक मानचित्र स्वीकृत कराने के मामले में चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
इस प्रकरण में सबसे गंभीर आरोप यह है कि नजूल विभाग की एनओसी नहीं मिलने के बावजूद कथित फर्जी आख्या और दस्तावेजों के आधार पर व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत करा लिया गया। मामला सामने आने के बाद एडीए ने विवादित मानचित्र निरस्त कर दिया है और निर्माण के संबंध में नोटिस भी जारी किया है। अब पुलिस जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कथित फर्जी पत्र किसने तैयार किया, उसे सरकारी पोर्टल पर किसने अपलोड किया और दस्तावेजों की सत्यता की जांच किए बिना नक्शे को मंजूरी कैसे मिल गई?
चार लोगों के खिलाफ लोहामंडी थाने में मुकदमा
धाकरान नजूल भूमि प्रकरण में एडीए के सहायक अभियंता रमन कुमार की तहरीर पर अजय महाजन, प्रमोद कुमार गुप्ता, संजीव कुमारी गुप्ता और इंजीनियर बनवारी सिंह को नामजद किया गया है। चारों के खिलाफ लोहामंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोप है कि विवादित जमीन पर व्यावसायिक निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने में नजूल विभाग की अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के स्थान पर कथित फर्जी आख्या का सहारा लिया गया। जबकि संबंधित जमीन के संबंध में नजूल विभाग ने एनओसी देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद नक्शा स्वीकृत होने से एडीए की मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सर्वे शीट नंबर 107 की जमीन पर विवाद
विवादित भूमि सर्वे शीट नंबर 107, मौजा चक अब्बल में दर्ज बताई गई है। जमीन के नजूल भूमि होने के कारण निर्माण संबंधी अनुमति के लिए नजूल विभाग की स्थिति और एनओसी महत्वपूर्ण थी। विभाग की ओर से एनओसी नहीं दिए जाने के बावजूद व्यावसायिक मानचित्र स्वीकृत होने का मामला सामने आया। अब जांच का अहम पहलू यह है कि जब संबंधित विभाग ने जमीन के संबंध में अनापत्ति नहीं दी थी तो मानचित्र स्वीकृति के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों को किस आधार पर स्वीकार किया गया? क्या संबंधित अधिकारियों ने नजूल विभाग से सीधे सत्यापन कराया था या पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों को ही सही मानकर प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई?
4 जनवरी 2025 का पत्र बना जांच की सबसे अहम कड़ी
इस पूरे प्रकरण में चार जनवरी 2025 का कथित आपत्ति पत्र सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है। आरोप है कि इस पत्र को एडीए के ऑनलाइन बिल्डिंग प्लान अप्रूवल सिस्टम (ओबीपीएएस) पोर्टल पर अपलोड किया गया था। इसी दस्तावेज को लेकर अब विवाद खड़ा हो गया है। बताया गया है कि नजूल विभाग ने इस पत्र को अपने कार्यालय से जारी होने से ही इनकार कर दिया है। ऐसे में पत्र की प्रमाणिकता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यदि पत्र विभाग की ओर से जारी ही नहीं किया गया तो इसे तैयार किसने किया? पोर्टल पर अपलोड करने की जिम्मेदारी किसकी थी? दस्तावेज की जांच किस स्तर पर हुई और उसी के आधार पर व्यावसायिक मानचित्र को मंजूरी कैसे मिल गई? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच में तलाशे जाएंगे। कथित पत्र की वास्तविकता और उसके इस्तेमाल की परिस्थितियां सामने आने के बाद मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है।
गुड़ की मंडी के बाद धाकरान ने बढ़ाई मुश्किलें
आगरा में नजूल भूमि से जुड़ा यह पहला मामला नहीं है। गुड़ की मंडी प्रकरण में भी पहले से मुकदमा दर्ज है। अब धाकरान की जमीन पर कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर व्यावसायिक नक्शा स्वीकृत कराने का मामला सामने आने से एडीए की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है। दोनों प्रकरणों में सरकारी जमीन, निर्माण और मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या एडीए में नक्शा स्वीकृत कराने के दौरान जमीन के स्वामित्व और संबंधित विभागों की एनओसी का पर्याप्त सत्यापन किया जा रहा है? यदि एक ही तरह की अनियमितताएं अलग-अलग मामलों में सामने आ रही हैं तो मानचित्र स्वीकृति की पुरानी फाइलों की जांच भी जरूरी हो सकती है।
जांच के घेरे में आ सकते हैं अधिकारी और कथित दलाल
सूत्रों के अनुसार, धाकरान प्रकरण की जांच का दायरा केवल नामजद लोगों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। मानचित्र स्वीकृति के दौरान फाइल किस-किस स्तर से गुजरी, किन अधिकारियों ने दस्तावेजों का परीक्षण किया और किसकी संस्तुति पर अंतिम मंजूरी दी गई, इसकी पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। जमीन और नक्शा संबंधी मामलों में सक्रिय कुछ कथित दलालों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की चर्चा है। हालांकि, उनकी भूमिका को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और संबंधित विभागीय जांच में यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो मामले में नए नाम भी जुड़ सकते हैं।
एडीए ने नक्शा निरस्त कर जारी किया नोटिस
मामले में एडीए ने कार्रवाई करते हुए विवादित व्यावसायिक मानचित्र निरस्त कर दिया है। निर्माण के संबंध में नोटिस भी जारी किया गया है। सचिव के निर्देश पर सहायक अभियंता रमन कुमार की तहरीर के आधार पर लोहामंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। अब पुलिस के सामने कथित फर्जी आपत्ति पत्र की जांच, दस्तावेजों की सत्यता का परीक्षण और मानचित्र स्वीकृति की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल करने की चुनौती है। जांच में यह भी स्पष्ट करना होगा कि कथित अनियमितता केवल दस्तावेज प्रस्तुत करने तक सीमित थी या स्वीकृति प्रक्रिया में भी किसी स्तर पर लापरवाही अथवा मिलीभगत हुई। धाकरान और गुड़ की मंडी के मामलों ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा और एडीए की ऑनलाइन नक्शा स्वीकृति व्यवस्था की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।