20 लाख करोड़ की चोट के बाद सोमवार को बाजार की अग्निपरीक्षा, बिकवाली थमेगी या जारी रहेगा दबाव?, महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली और कमजोर रुपये ने बढ़ाई चिंता
मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता सप्ताह निवेशकों की चिंता बढ़ाने वाला रहा। लगातार बिकवाली के बीच बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 20 लाख करोड़ रुपये घट गया। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। करीब 25 साल बाद पहली बार निफ्टी में लगातार आठ सप्ताह की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की गई। अब बाजार की नजर सोमवार के कारोबार पर है कि लगातार दबाव के बाद बाजार संभलने की कोशिश करता है या बिकवाली का सिलसिला आगे भी जारी रहता है।
महंगा तेल बना बाजार के लिए बड़ा सिरदर्द
बाजार की चिंता का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ब्रेंट क्रूड का दिसंबर वायदा करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि सप्ताह की शुरुआत में यह 96-97 डॉलर के आसपास था। भारत की कच्चे तेल पर आयात निर्भरता को देखते हुए कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई, कंपनियों की लागत और चालू खाते पर दबाव बढ़ने की आशंका है। यही वजह है कि तेल की कीमतों की हर तेजी को शेयर बाजार नकारात्मक संकेत के रूप में ले रहा है।
एफआईआई की लगातार निकासी ने बढ़ाया दबाव
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की दूसरी बड़ी चिंता बनी हुई है। इस साल अब तक एफआईआई नकद बाजार में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं। सितंबर में ही उनकी बिकवाली 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही। 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच चार कारोबारी सत्रों में करीब 34,966 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी ने बाजार में खरीदारी की धार को कमजोर कर दिया है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और रुपये की कमजोरी का असर
अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी उभरते बाजारों पर दबाव बढ़ा है। 10 साल की अमेरिकी बॉन्ड यील्ड करीब 5.3 प्रतिशत और 30 साल की यील्ड करीब 5.7 प्रतिशत तक पहुंचने से निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियां ज्यादा आकर्षक हुई हैं। इसका असर भारत जैसे बाजारों में विदेशी पूंजी के प्रवाह पर पड़ रहा है।
दूसरी ओर, कच्चे तेल की महंगाई और विदेशी पूंजी की निकासी के बीच रुपया डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से ऊपर चला गया। कमजोर रुपया विदेशी निवेशकों के रिटर्न पर भी असर डालता है और बाजार की धारणा को कमजोर करता है।
आईपीओ की बढ़ती सप्लाई भी बाजार के सामने चुनौती
इस साल शेयर बाजार में आईपीओ की गतिविधियां भी तेज रही हैं। करीब 100 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए 1.13 लाख करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं। इसके अलावा करीब एक लाख करोड़ रुपये की ब्लॉक डील हुई हैं। बाजार में नई इक्विटी की लगातार बढ़ती आपूर्ति के बीच निवेशकों की पूंजी पर दबाव बढ़ना भी कमजोरी का एक कारण माना जा रहा है।
ब्याज दरों पर नजर, आरबीआई से भी उम्मीदें
वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार का मूड खराब किया है। अमेरिकी मौद्रिक नीति और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के बीच अब घरेलू निवेशकों की निगाहें आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति पर हैं। ब्याज दरों को लेकर किसी भी संकेत का असर बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट समेत ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
मिडकैप-स्मॉलकैप भी नहीं बच पाए
बाजार की कमजोरी बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। सप्ताह के दौरान निफ्टी मिडकैप 100 में करीब 3.6 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 में 3.4 प्रतिशत की गिरावट आई। ऑटो सेक्टर पर भी खासा दबाव रहा और निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 5.9 प्रतिशत नीचे आ गया। इससे संकेत मिलता है कि बिकवाली का असर बाजार के व्यापक हिस्से पर पड़ा है।
बीमा क्षेत्र के नियामकीय बदलाव भी बने चिंता का कारण
बीमा क्षेत्र में आईआरडीएआई के प्रस्तावित नियमों ने भी वित्तीय सेवा क्षेत्र के कुछ शेयरों पर दबाव बढ़ाया है। कमीशन और खर्च से जुड़े प्रस्तावों के कारण बीमा कंपनियों तथा बीमा वितरण कारोबार से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। हालांकि, इसे पूरे बाजार की 20 लाख करोड़ रुपये की गिरावट का अकेला कारण नहीं माना जा सकता। बाजार पर इसका असर व्यापक वैश्विक और घरेलू कारणों के बीच एक अतिरिक्त दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
20 लाख करोड़ का मतलब क्या है?
बाजार पूंजीकरण में 20 लाख करोड़ रुपये की कमी का अर्थ यह नहीं है कि निवेशकों के बैंक खातों से इतनी रकम निकल गई। शेयरों के बाजार भाव गिरने से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कम हुआ है। यही राशि बाजार पूंजीकरण में कमी के रूप में दिखाई देती है।
अब सोमवार पर टिकीं निगाहें
लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद अब सोमवार का कारोबार बाजार की अगली दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निवेशक यह देखेंगे कि निचले स्तरों पर खरीदारी लौटती है या विदेशी बिकवाली का दबाव कायम रहता है। कच्चे तेल की कीमत, रुपये की चाल, एफआईआई गतिविधियां और अमेरिकी बाजारों के संकेत शुरुआती कारोबार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।
अगर सोमवार को निचले स्तरों पर खरीदारी आती है तो लगातार गिरावट के बाद बाजार में कुछ राहत की उम्मीद बन सकती है। इसके विपरीत, एफआईआई की बिकवाली जारी रहने और कच्चे तेल में तेजी बने रहने पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में सोमवार का सत्र केवल एक नया कारोबारी सप्ताह नहीं, बल्कि लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार की अगली चाल का महत्वपूर्ण संकेत देने वाला सत्र होगा।