मोरारी बापू की रामकथा में छलका भक्ति का सागर, ‘भोजन कम करो, भजन ज्यादा’ का दिया मंत्र
आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित जेपी वेडिंग ग्राउंड में चल रही नौ दिवसीय श्रीरामकथा के तीसरे दिन मोरारी बापू ने ‘मानस ऋषि पंचमी’ प्रसंग के माध्यम से ऋषि और मुनि के अंतर को समझाया। उन्होंने कहा कि ऋषि बाहरी ब्रह्मांड की खोज करता है, जबकि मुनि अंतर्जगत की यात्रा करता है। बापू ने काकभुशुंडि, विश्वामित्र, कबीर, गुरु नानक, मीराबाई और हनुमान जी के प्रसंगों के जरिए श्रद्धालुओं को जीवन के सूत्र बताए। युवाओं को तनाव से बचने के लिए एकांत में हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी और कहा—“भोजन कम करें और भजन ज्यादा करें।” मीराबाई के पद और रामधुन सुनकर कथा पंडाल में श्रद्धालु भावविभोर हो गए। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बापू ने कहा कि “मशीन मशीन है, व्यासपीठ मिशन है।” कार्यक्रम में विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।
ऋषि बाहर के ब्रह्मांड के खोजी, मुनि भीतर के ब्रह्मांड के यात्री-मोरारी बापू; मीरा के पद और रामधुन पर भावविभोर हुए हजारों श्रद्धालु
आगरा। फतेहाबाद रोड स्थित जेपी वेडिंग ग्राउंड में करुणानिधान परिवार की ओर से आयोजित नौ दिवसीय श्रीरामकथा के तीसरे दिन गुरुवार को भक्ति, ज्ञान और संतवाणी का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा व्यास मोरारी बापू ने ‘मानस ऋषि पंचमी’ के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए ऋषि और मुनि के अंतर को बेहद सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा कि ऋषि बाहर के ब्रह्मांड की खोज करता है, जबकि मुनि भीतर के ब्रह्मांड की यात्रा करता है। कथा के दौरान रामनाम, कृष्ण-भक्ति, मीराबाई के पद और रामधुन से पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया। कई श्रद्धालु भावुक होकर अपनी आंखों से छलकते आंसुओं को रोक नहीं सके।
ऋषि बाहरी ब्रह्मांड का अन्वेषक, मुनि अंतर्जगत का यात्री
मोरारी बापू ने मानस से ‘ऋषि’ शब्द का उल्लेख करते हुए सभी मुनियों को प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में जितने भी बड़े वैज्ञानिक हुए, उन्होंने बाहरी जगत और ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने का प्रयास किया। आइंस्टीन, न्यूटन और अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग जैसे लोगों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि परमाणु से लेकर अंतरिक्ष तक की खोज करने वाला बाहरी ब्रह्मांड का अन्वेषक है। उन्होंने कहा कि भारतीय मनीषा ने बाहरी जगत की खोज करने वालों को ऋषि-भाव से देखा, जबकि जो व्यक्ति अपने भीतर उतरकर अंतर्जगत को जानने का प्रयास करता है, वह मुनि के मार्ग पर चलता है। बापू ने कहा कि बाहरी यात्रा ज्ञान का विस्तार करती है, जबकि भीतर की यात्रा आत्मबोध की ओर ले जाती है।
काकभुशुंडि जी ने की बाहर और भीतर दोनों की यात्रा
रामकथा के परम गायक काकभुशुंडि जी का उदाहरण देते हुए मोरारी बापू ने कहा कि उनकी यात्रा बाहरी और भीतरी दोनों रही। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ब्रह्मांड को देखता है, जबकि दूसरा अपने भीतर के ब्रह्मांड को जानता है। बापू ने विश्वामित्र का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब विश्वामित्र स्वर्ग की रचना करते हैं तो उनका ऋषि स्वरूप दिखाई देता है, वहीं जब वे अंतर्दृष्टि और भीतर के दर्शन को जागृत करते हैं तो उनका मुनि भाव सामने आता है। उन्होंने साधकों को मौन साधना का अभ्यास करने की सलाह दी। बापू ने कहा कि सप्ताह में कम से कम एक दिन मौन रखना चाहिए। यदि यह संभव नहीं है तो व्यक्ति अपने जन्मदिन पर अपनी आयु के बराबर घंटे मौन धारण कर सकता है।
कबीर, नानक, मीरा और तुकाराम में दिखे ऋषि-मुनि के गुण
कथा के दौरान श्रद्धालुओं की प्रश्न-पत्रियों का उत्तर देते हुए मोरारी बापू ने कबीर, गुरु नानक, रामकृष्ण, मीराबाई, नरसी मेहता और तुकाराम जैसे संतों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संतों में ऋषि और मुनि दोनों के गुण दिखाई देते हैं, इसलिए ये संयुक्त रूप से साधु-स्वरूप हैं। गुरु का चित्र घर में लगाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि गुरु का चित्र आंखों के सामने रहकर व्यक्ति को प्रेरणा देता है। एकलव्य का उदाहरण देते हुए बापू ने कहा कि उसने गुरु की मूर्ति के सामने साधना की और अपने लक्ष्य को प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि गुरु का चित्र केवल देखने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि उससे गुरु के चरित्र और आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।
राम की हर लीला में छिपा है जीवन का संदेश
मोरारी बापू ने श्रीराम के जीवन की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि अयोध्या से पंचवटी, वनवास से किष्किंधा, रावण युद्ध से लेकर रामराज्याभिषेक तक भगवान राम ने अपने जीवन के माध्यम से धर्म, मर्यादा और कर्तव्य का चित्रण किया। उन्होंने कहा कि इसी तरह श्रीकृष्ण की ब्रज लीलाओं में प्रेम, भक्ति और समर्पण का संदेश मिलता है। भगवान के जीवन प्रसंग केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि उनसे जीवन जीने की प्रेरणा लेने के लिए हैं। बापू ने कहा कि सच्चा शिष्य अपने गुरु का बहुत अधिक बखान नहीं करता। सच्चे शिष्य के आचरण से ही गुरु की खुशबू फैलती है।
ऋषियों के पास सिद्धि, मुनियों के पास शुद्धि
मोरारी बापू ने कहा कि ऋषियों के पास सिद्धि होती है और मुनियों के पास शुद्धि। ऋषि कर्मयोगी होते हैं और समाज के लिए निर्माण करते हैं। वहीं मुनि अंतर्मन की शुद्धि और आत्मचिंतन के मार्ग पर चलते हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं को कपटपूर्ण साधु-संग से बचने की सलाह देते हुए कहा कि जिसके पास भजन की संपदा नहीं है, वह मुनि नहीं हो सकता। मुनि का मौन भी सार्थक होता है और उसका वचन भी। जगद्गुरु वल्लभाचार्य के सूत्र का उल्लेख करते हुए बापू ने कहा कि घर के लोग यदि एक-दूसरे के सहायक बनें तो वही सत्संग है। यदि परिवार के सदस्य स्वयं सत्संग न करें, लेकिन आपको सत्संग से रोकें भी नहीं, तो उनके प्रति भी धन्यवाद का भाव रखना चाहिए।
युवाओं के तनाव पर बोले बापू- एकांत में करें हनुमान चालीसा का पाठ
युवाओं में बढ़ते तनाव से जुड़े प्रश्न का उत्तर देते हुए मोरारी बापू ने सुबह और शाम कुछ समय एकांत में बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हनुमान जी का ध्यान चंचल मन को शांत करने में सहायक हो सकता है। व्यासपीठ के पीछे हनुमान जी का चित्र रखने के सवाल पर बापू ने कहा कि व्यासपीठ की जो भी प्रतिष्ठा है, वह हनुमान जी की कृपा से है। उन्होंने हनुमान जी को गृहस्थ, ब्रह्मचारी, संन्यासी और वानप्रस्थ—जीवन की हर अवस्था के लिए आदर्श बताया।
‘भोजन कम करो और भजन ज्यादा’ का दिया जीवन मंत्र
कथा के दौरान मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं को सरल लेकिन गहरा जीवन सूत्र दिया—“भोजन कम करें और भजन ज्यादा करें।” उन्होंने कहा कि भजन केवल धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि मनुष्य को भीतर से बदलने वाली साधना है। बापू ने श्रद्धालुओं से प्रेम और संवेदना के साथ जीवन जीने का आह्वान करते हुए कहा कि जीवन में जो व्यक्ति दुखी मिले, उसे गले लगाकर चलें और समाज में प्रेम की गंगा बहाते रहें।
मीरा के पदों पर भावविभोर हुआ कथा पंडाल
रामकथा के बीच श्रीकृष्ण की धुन और मीराबाई के पदों की गूंज ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया। बापू ने मीरा की कृष्णभक्ति का वर्णन किया तो कथा पंडाल में श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। रामनाम और कृष्णभक्ति के इस संगम के बीच कई श्रद्धालुओं की आंखों से भक्ति के आंसू छलक पड़े। बापू ने कहा कि जो मानस की उपासना करेगा, मानस सदैव उसके सामने खड़ा रहेगा। उन्होंने श्रद्धालुओं को रात में सोने से पहले मानस की कुछ चौपाइयों का पाठ करने और शुभ विचारों के साथ सोने की प्रेरणा दी।
‘मशीन मशीन है, व्यासपीठ मिशन है’
कथा के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक के बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख हुआ। मोरारी बापू ने कहा कि तकनीक मनुष्य के लिए उपयोगी है, लेकिन यदि तकनीक मन और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाने लगे तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा—“मशीन मशीन होती है, व्यासपीठ मिशन है।” उनके अनुसार व्यासपीठ का उद्देश्य केवल कथा कहना नहीं, बल्कि अच्छे और संवेदनशील मनुष्य तैयार करना है।
आरती में शामिल हुए विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल
श्रीरामकथा के तीसरे दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। कथा के दौरान भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच विभिन्न धार्मिक प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। कार्यक्रम में उमाशंकर व्यास, श्री प्रेमनिधि मंदिर के मुख्य सेवायत हरिमोहन गोस्वामी सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने आरती उतारी। करुणानिधान परिवार की ओर से आयोजित यह नौ दिवसीय श्रीरामकथा 15 से 23 सितंबर तक चल रही है, जिसमें प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर मोरारी बापू के श्रीमुख से रामकथा का रसपान कर रहे हैं।