आगरा में विद्यार्थियों को गीता से जोड़ने की तैयारी, 13 दिसंबर को होगा गीता ओलम्पियाड पुरस्कार समारोह

आगरा में युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के लिए इस्कॉन की ओर से इंटरनेशनल गीता ओलम्पियाड का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष करीब 40 हजार विद्यार्थियों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। चार वर्गों में होने वाली प्रतियोगिता के विजेताओं का पुरस्कार वितरण समारोह 13 दिसंबर को सूरसदन में होगा। इससे पहले श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर में आमंत्रण पत्र विमोचन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

Oct 3, 2026 - 21:02
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आगरा में विद्यार्थियों को गीता से जोड़ने की तैयारी, 13 दिसंबर को होगा गीता ओलम्पियाड पुरस्कार समारोह
गीता ओलम्पियाड पुरस्कार समारोह का पोस्टर विमोचन करते आयोजक।

मोह, चिंता और असमंजस से लेकर जीवन के हर द्वंद्व का समाधान देती है गीता : अरविन्द स्वरूप प्रभु | चार वर्गों में होगी परीक्षा, करीब 100 स्कूलों में चल रहीं गीता सार की कक्षाएं

आगरा। जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही मार्ग चुनने से लेकर मोह, चिंता, असमंजस और कर्तव्य को लेकर पैदा होने वाले द्वंद्व का समाधान भगवद्गीता में मिलता है। गीता केवल युद्धभूमि में अर्जुन को दिए गए भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य जीवन में भी मनुष्य को सही दृष्टिकोण, कर्म और निर्णय की प्रेरणा देती है। इसी विचार को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से इस्कॉन की ओर से आगरा में इंटरनेशनल गीता ओलम्पियाड का आयोजन किया जा रहा है।

13 दिसंबर को सूरसदन में होने वाले गीता ओलम्पियाड के पुरस्कार वितरण समारोह के आमंत्रण पत्र का विमोचन श्रीजगन्नाथ मंदिर परिसर में किया गया। इस दौरान इस्कॉन मंदिर के अध्यक्ष अरविन्द स्वरूप प्रभु ने कहा कि गीता जीवन के उन सवालों का मार्गदर्शन करती है, जिनका सामना हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में करता है। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति को अपने कर्तव्य और सही निर्णय को लेकर जो द्वंद्व होता है, उसका समाधान भगवान श्रीकृष्ण ने गीता के माध्यम से समझाया है।

युवा पीढ़ी को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का प्रयास

अरविन्द स्वरूप प्रभु ने बताया कि युवा पीढ़ी भारतीय परंपराओं, संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी रहे, इसके लिए इस्कॉन की ओर से शहर के विभिन्न स्कूलों में गीता सार की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इन कक्षाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को नैतिक, सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों की शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष गीता ओलम्पियाड में आगरा के करीब 40 हजार विद्यार्थियों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रतियोगिता के विजेता विद्यार्थियों को आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे। पुरस्कार वितरण समारोह 13 दिसंबर को सूरसदन में आयोजित किया जाएगा।

चार वर्गों में होगी गीता ओलम्पियाड की परीक्षा

इस वर्ष गीता ओलम्पियाड को विद्यार्थियों की कक्षाओं के आधार पर चार वर्गों में बांटा गया है। पहला वर्ग कक्षा 1 और 2, दूसरा वर्ग कक्षा 3 से 5, तीसरा वर्ग कक्षा 6 से 8 और चौथा वर्ग कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए होगा। इस्कॉन की अदिति गौरांगी ने बताया कि आगरा के करीब 100 छोटे-बड़े स्कूलों में कक्षा 1 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए गीता सार की कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। मिशनरी स्कूलों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। विद्यार्थियों को गीता के मूल संदेश और जीवनोपयोगी शिक्षाओं से परिचित कराने के बाद परीक्षा आयोजित की जाती है।

कक्षा के एक सप्ताह बाद 50 अंकों की परीक्षा

अदिति गौरांगी ने बताया कि गीता सार की कक्षा आयोजित होने के करीब एक सप्ताह बाद विद्यार्थियों की 50 अंकों की परीक्षा ली जाती है। परीक्षा के बाद विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाते हैं। जिन स्कूलों में किसी कारणवश गीता सार की कक्षाएं संचालित करने की अनुमति नहीं मिल पाती, वहां विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था भी की जा रही है।

40 रुपये में करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन

गीता ओलम्पियाड में शामिल होने के लिए विद्यार्थियों के लिए 40 रुपये का रजिस्ट्रेशन शुल्क रखा गया है। विद्यार्थी बार कोड के माध्यम से अथवा 9927091147, 8958982047 और 9897646412 नंबरों पर संपर्क कर पंजीकरण करा सकते हैं।

गीता की शिक्षा से सामाजिक समस्याओं पर नियंत्रण का प्रयास

समाजसेवी नितेश अग्रवाल और सेन्ट एन्ट्रूज पब्लिक स्कूल के निदेशक गिरधर शर्मा ने कहा कि गीता मनुष्य को कर्म करने की प्रेरणा देती है और परिणाम की चिंता से मुक्त होकर अपने प्रयास पर ध्यान केंद्रित करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि आज बच्चे अपनी संस्कृति और संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं। यदि समय रहते उन्हें सही दिशा नहीं दी गई तो आने वाले समय में सामाजिक स्तर पर गंभीर परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि गीता ओलम्पियाड आने वाली पीढ़ी को जागरूक करने की दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके माध्यम से बच्चों को परिवार, समाज और जीवन के प्रति जिम्मेदारी का बोध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि टूटते परिवार, घर-घर बढ़ता कलह, तलाक और वृद्धों का अकेलेपन या वृद्धाश्रम में जीवन बिताना जैसी सामाजिक समस्याओं को संस्कारों और सही सोच के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि व्यक्ति का नियंत्रण उसके प्रयास पर होता है, परिणाम पर नहीं। गीता का यह विचार जीवन में तनाव, असफलता के भय और अनावश्यक चिंता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कार्यक्रम में आशू मित्तल, ओमप्रकाश अग्रवाल, राजेश उपाध्याय, रवि नारंग विश्वास, शाश्वत नन्दलाल, सुशील अग्रवाल, शशि सारस्वत, मनमोहिनी, अदिति गौरांगी, राजेश, सूरज और यश सहित अन्य लोग मौजूद रहे।