खानदानी डायबिटीज का खतरा भी पूरी तरह तय नहीं, कम प्रोसेस्ड खाना और रोज की शारीरिक सक्रियता से जोखिम घटने का संकेत

एक नई रिसर्च में पाया गया है कि कम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन और नियमित शारीरिक सक्रियता का संबंध टाइप-2 डायबिटीज के कम जोखिम से है। उच्च आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों में भी ये संबंध देखे गए। दोनों आदतों को साथ अपनाने वाले उच्च आनुवंशिक जोखिम वाले समूह में डायबिटीज का जोखिम 49 प्रतिशत कम पाया गया। हालांकि यह अवलोकनात्मक अध्ययन है, इसलिए इससे यह साबित नहीं होता कि खानपान या व्यायाम किसी व्यक्ति का जोखिम निश्चित प्रतिशत तक घटा देते हैं।

Sep 29, 2026 - 22:50
Sep 29, 2026 - 22:54
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खानदानी डायबिटीज का खतरा भी पूरी तरह तय नहीं, कम प्रोसेस्ड खाना और रोज की शारीरिक सक्रियता से जोखिम घटने का संकेत
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लंदन। परिवार में टाइप-2 डायबिटीज का इतिहास है तो इसका मतलब यह नहीं कि बीमारी होना तय है। नई रिसर्च में सामने आया है कि आनुवंशिक रूप से डायबिटीज के ज्यादा जोखिम वाले लोगों में भी कम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन और नियमित शारीरिक सक्रियता का संबंध बीमारी के कम जोखिम से है। ब्रिटेन के 56,964 लोगों के आंकड़ों पर किए गए अध्ययन में कम प्रोसेस्ड भोजन लेने और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कम पाया गया। यह अध्ययन यूरोपियन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज (EASD) की मिलान में 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चल रही वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया जा रहा है।

करीब 57 हजार लोगों पर हुआ अध्ययन

शोधकर्ताओं ने यूके बायोबैंक के 56,964 वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। प्रतिभागियों की औसत उम्र 69.5 वर्ष थी और इनमें 42.3 प्रतिशत पुरुष थे। भोजन की जानकारी प्रश्नावली के जरिए ली गई, जबकि शारीरिक गतिविधि मापने के लिए प्रतिभागियों ने एक सप्ताह तक कलाई पर गतिविधि मापने वाला उपकरण पहना। इसके अलावा उनके आनुवंशिक आंकड़ों का इस्तेमाल टाइप-2 डायबिटीज के आनुवंशिक जोखिम का अनुमान लगाने में किया गया। प्रतिभागियों का औसतन 7.8 वर्ष तक फॉलोअप किया गया। इस अवधि में 926 लोगों में टाइप-2 डायबिटीज विकसित हुई।

जितना ज्यादा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन, उतना ज्यादा जोखिम

अध्ययन में भोजन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की हिस्सेदारी और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम के बीच संबंध पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, भोजन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की मात्रा वजन के आधार पर हर 10 प्रतिशत बढ़ने के साथ डायबिटीज का जोखिम करीब 7 प्रतिशत अधिक पाया गया।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में आम तौर पर ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं जिनमें औद्योगिक स्तर पर कई प्रक्रियाओं के साथ विभिन्न सामग्री, स्वाद, मिठास या अन्य पदार्थ जोड़े जाते हैं। अध्ययन में खाद्य पदार्थों को NOVA वर्गीकरण के आधार पर वर्गीकृत किया गया था।

व्यायाम करने वालों में भी कम जोखिम

शोध में विश्व स्वास्थ्य संगठन की सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम से तेज शारीरिक गतिविधि वाली सिफारिश को पूरा करने वाले लोगों में, कम सक्रिय लोगों की तुलना में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम 39 प्रतिशत कम पाया गया। तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना, पैदल चलना, लंबी पैदल यात्रा और ऐसी शारीरिक गतिविधियां जिनसे सांस और हृदय गति बढ़ती है, इस श्रेणी में आ सकती हैं।

ज्यादा आनुवंशिक जोखिम वालों में भी फायदा दिखा

अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन लोगों से जुड़ा था जिनमें आनुवंशिक रूप से टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम ज्यादा था। ऐसे लोगों में भोजन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की मात्रा कम रखने का संबंध बीमारी के 35 प्रतिशत कम जोखिम से और अनुशंसित स्तर की शारीरिक गतिविधि का संबंध 33 प्रतिशत कम जोखिम से पाया गया।

जिन लोगों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की मात्रा ज्यादा थी, उनमें भी पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करने वालों का डायबिटीज जोखिम कम पाया गया। उच्च आनुवंशिक जोखिम वाले समूह में यह संबंध 31 प्रतिशत कम जोखिम का था।

दोनों आदतें साथ हों तो संबंध और मजबूत

शोधकर्ताओं ने भोजन और व्यायाम को अलग-अलग ही नहीं, दोनों को साथ लेकर भी विश्लेषण किया। उच्च आनुवंशिक जोखिम वाले लोगों में कम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि दोनों का पालन करने वालों में टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम 49 प्रतिशत कम पाया गया। मध्यम आनुवंशिक जोखिम वाले समूह में यह आंकड़ा 70 प्रतिशत और कम आनुवंशिक जोखिम वाले समूह में 59 प्रतिशत था।

हालांकि 70 प्रतिशत के आंकड़े का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत डायबिटीज की संभावना 70 प्रतिशत घटा सकता है। यह अध्ययन में अलग-अलग समूहों के बीच देखा गया सापेक्ष संबंध है। विशेषज्ञों ने इस अंतर को समझना जरूरी बताया है।

रिसर्च की सबसे बड़ी सावधानी क्या है?

यह अध्ययन काफी बड़ा और लंबे समय तक चलने वाला है, लेकिन यह अवलोकनात्मक अध्ययन है। यानी शोधकर्ताओं ने लोगों की जीवनशैली और बाद में सामने आई बीमारी के बीच संबंध देखा है। इससे यह साबित नहीं होता कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन कम करने या व्यायाम बढ़ाने से किसी व्यक्ति का डायबिटीज जोखिम निश्चित प्रतिशत तक कम ही हो जाएगा।

विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि भोजन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड एक बहुत व्यापक श्रेणी है। इसके अंतर्गत आने वाले अलग-अलग खाद्य पदार्थों की पोषण संरचना अलग हो सकती है। अध्ययन में भोजन की जानकारी प्रतिभागियों द्वारा दी गई थी, जबकि शारीरिक गतिविधि केवल एक सप्ताह तक उपकरण से मापी गई थी। इसलिए परिणामों की व्याख्या सावधानी से करनी चाहिए।

आम आदमी के लिए क्या संदेश?

इस रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि आनुवंशिक जोखिम जीवनशैली की भूमिका को पूरी तरह खत्म नहीं करता। परिवार में डायबिटीज होने पर भी भोजन और शारीरिक सक्रियता जैसे बदले जा सकने वाले व्यवहार स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति के लिए डायबिटीज का वास्तविक जोखिम केवल परिवार के इतिहास या खानपान से तय नहीं होता; उम्र, वजन, शारीरिक सक्रियता और अन्य स्वास्थ्य कारक भी भूमिका निभाते हैं।

यह शोधपत्र एसोसिएशंस ऑफ अल्ट्राप्रोसेस्ड फूड इनटेक, वेयरेबल-मेझर्ड लाइफस्टाइल फैक्टर्स, एंड जेनेटिक ससेप्टिबिलिटी विद इंसिडेंट टाइप टू डायबिटीज शीर्षक से प्रकाशित हुआ है। इसके प्रमुख शोधकर्ता वेनशिन शू और उनके सहयोगी हैं। शोधपत्र चिकित्सा विज्ञान की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘डायबिटीज’ में 17 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुआ है।

SP_Singh AURGURU Editor