यूजीसी के विरोध में आगरा में सड़क पर उतरे हजारों युवा, ट्रैक्टर मार्च रोकने पर पुलिस से भिड़ंत

आगरा में यूजीसी की नई व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। एत्मादपुर के संवई गांव में करीब एक हजार युवा ट्रैक्टरों से कलेक्ट्रेट जाने निकले, लेकिन पुलिस और PAC ने गांव से करीब 200 मीटर आगे बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। आगे बढ़ने को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक के बाद धक्का-मुक्की हुई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गांव की ओर खदेड़ दिया। एत्मादपुर से कलेक्ट्रेट तक कई मार्गों पर बैरिकेडिंग और ड्रोन से निगरानी की गई। वहीं कालिंदी विहार में भी करीब डेढ़ घंटे तक यूजीसी के विरोध में प्रदर्शन हुआ, जिसके बाद प्रदर्शनकारी वापस लौट गए।

Sep 18, 2026 - 14:36
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यूजीसी के विरोध में आगरा में सड़क पर उतरे हजारों युवा, ट्रैक्टर मार्च रोकने पर पुलिस से भिड़ंत
प्रदर्शनकारियों को रोकती पुलिस।

एत्मादपुर से कालिंदी विहार तक हाई अलर्ट, संवई गांव में बैरियर पर नोकझोंक के बाद धक्का-मुक्की, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गांव की ओर खदेड़ा, कलेक्ट्रेट तक चप्पे-चप्पे पर फोर्स, ड्रोन से निगरानी

आगरा। यूजीसी की नई व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को आगरा में विरोध-प्रदर्शन का माहौल रहा। एत्मादपुर क्षेत्र के संवई गांव में प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च को लेकर सुबह से ही पुलिस-प्रशासन अलर्ट रहा। गांव से करीब 200 मीटर आगे बढ़े करीब एक हजार युवाओं को पुलिस और पीएसी ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। कलेक्ट्रेट जाने की जिद पर अड़े प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पहले नोकझोंक हुई और देखते ही देखते धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गांव की तरफ खदेड़ दिया। दोपहर तक मौके पर दोनों पक्ष आमने-सामने डटे रहे।

दरअसल, सिस्टम सुधर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशुमान ठाकुर के नेतृत्व में संवई से आगरा कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च का ऐलान किया गया था। आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन भानु समेत क्षत्रिय समाज के कुछ पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों का समर्थन मिला था। हालांकि गुरुवार को कई समर्थकों ने युवाओं के भविष्य और पूर्व आंदोलनों में दर्ज मुकदमों का हवाला देते हुए आंदोलन से अपना समर्थन वापस लेने और युवाओं से इसमें शामिल नहीं होने की अपील की थी। भारतीय किसान यूनियन भानु ने भी कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की थी।

इसके बावजूद अंशुमान ठाकुर ने देर रात आंदोलन जारी रखने और ट्रैक्टर मार्च निकालने की बात कही। इसके बाद पुलिस-प्रशासन ने किसी भी तरह के टकराव को रोकने के लिए रात से ही तैयारी शुरू कर दी। पुलिस टीमों ने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया। बुजुर्गों और युवाओं से कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की गई। शुक्रवार तड़के करीब चार बजे से ही पुलिस की सक्रियता बढ़ा दी गई थी।

200 मीटर आगे बढ़ते ही रोका मार्च

शुक्रवार सुबह संवई गांव से बड़ी संख्या में युवा ट्रैक्टरों के साथ आगरा की ओर निकल पड़े। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर वे करीब 200 मीटर ही आगे बढ़ पाए थे कि पहले से तैनात पुलिस और PAC ने बैरियर लगाकर रास्ता रोक दिया। रास्ते में बैरिकेडिंग के साथ क्रेन भी लगाई गई थी, ताकि ट्रैक्टर आगे न बढ़ सकें। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट जाने की मांग की। पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। कुछ देर बाद स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। फोर्स के सक्रिय होते ही पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को पीछे की ओर खदेड़ दिया। काफी दूर तक पीछा करने के बाद पुलिसकर्मी वापस बैरियर पर लौट आए। इसके बाद प्रदर्शनकारी भी दोबारा एकजुट होने लगे। सड़क किनारे बड़ी संख्या में ट्रैक्टर खड़े रहे और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर बनाए रही।

एत्मादपुर से कलेक्ट्रेट तक बैरिकेडिंग

प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने आगरा की ओर आने वाले कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी। आंवलखेड़ा और बरहन की तरफ से आने वाले रास्तों को भी रोका गया। एत्मादपुर, कुबेरपुर और रामबाग समेत प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया। संवेदनशील स्थानों पर PAC की भी तैनाती रही। सुरक्षा व्यवस्था के तहत ड्रोन से भी निगरानी की गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति का जायजा लेती रहीं। डीसीपी बेस्ट आदित्य कुमार भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। पुलिस की ओर से एहतियात के तौर पर कुछ किसान नेताओं को घरों में ही नजरबंद किए जाने की बात सामने आई। अधिकारियों का जोर इस बात पर रहा कि प्रदर्शन के दौरान किसी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।

गुरुवार को समर्थन वापसी की अपील

ट्रैक्टर मार्च से एक दिन पहले गुरुवार को फतेहाबाद रोड पर क्षत्रिय समाज और युवाओं के भविष्य को लेकर बैठक भी हुई थी। इसमें वक्ताओं ने पूर्व के आंदोलनों में युवाओं पर दर्ज मुकदमों का हवाला देते हुए नए आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके परिणामों और नेतृत्व की जवाबदेही पर विचार करने की अपील की। क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गौरी शंकर सिकरवार ने कहा कि समाज और नौजवानों के भविष्य को सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार आंदोलन की घोषणा करने वाले नेता बाद में पीछे हट जाते हैं, जबकि मुकदमों और पुलिस कार्रवाई का सामना युवाओं और उनके परिवारों को करना पड़ता है। वहीं क्षत्रिय राजपूत महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर दिलीप सिंह चौहान ने कहा कि जनहित के मुद्दों पर विरोध का अधिकार है, लेकिन युवाओं को किसी की व्यक्तिगत राजनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने पहले पुराने मामलों के समाधान और इसके बाद नए आंदोलनों पर विचार करने की बात कही।

कालिंदी विहार में भी यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन

इधर, आगरा के कालिंदी विहार क्षेत्र में भी शुक्रवार सुबह UGC की नई व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन हुआ। CNG पंप के पीछे करीब 10:30 बजे करणी सेना के प्रदेश महामंत्री दिनेश जादौन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतर आए। करीब डेढ़ घंटे तक चले प्रदर्शन के दौरान सड़क पर जाम की स्थिति बन गई और वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही। प्रदर्शन में युवा ही नहीं, बल्कि वृद्ध, महिलाएं और बच्चे भी शामिल हुए। हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने 'UGC रोल बैक करो' और 'काला कानून वापस लो' जैसे नारे लगाए। इसके अलावा 'इंकलाब जिंदाबाद', 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारे भी लगाए गए।

सूचना मिलते ही ट्रांस यमुना थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और सड़क पर यातायात व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया। करीब 12 बजे प्रदर्शनकारी वापस लौट गए, जिसके बाद पुलिस ने यातायात सामान्य कराया। प्रदर्शन में करणी सेना के युवा प्रदेश अध्यक्ष करण ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गेश सिसोदिया समेत विशाल उपाध्याय, ललित जादौन, मोहित सिकरवार, रोहित सिकरवार, गौरव ठाकुर, उदय ठाकुर, गोलू पंडित, मोहन उपाध्याय और हिमांशु ठाकुर सहित कई लोग मौजूद रहे।

पुलिस ने पहले ही संभाल लिया था मोर्चा

संवई में ट्रैक्टर मार्च की घोषणा के बाद पुलिस ने गुरुवार से ही गांवों में संपर्क अभियान शुरू कर दिया था। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने लोगों से बातचीत कर स्पष्ट किया कि विरोध शांतिपूर्ण तरीके से किया जाए और कानून व्यवस्था प्रभावित करने वाला कोई कदम न उठाया जाए। प्रशासन की कोशिश थी कि प्रदर्शनकारियों को कलेक्ट्रेट की ओर जाने से पहले ही रोक दिया जाए। इसी रणनीति के तहत संवई से आगे बैरियर लगाए गए और आगरा की ओर आने वाले विभिन्न रास्तों पर पुलिस बल तैनात किया गया। शुक्रवार को संवई और कालिंदी विहार में हुए प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी। संवई में ट्रैक्टरों की मौजूदगी और दोपहर तक प्रदर्शनकारियों के दोबारा एकजुट होने की कोशिश के चलते पुलिस बल तैनात रहा।