आगरा मेट्रो को नई रफ्तार, आईएसबीटी–मन:कामेश्वर अप लाइन ट्रैक पूरा, जल्द शुरू होगा ट्रायल रन

आगरा। ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच बन रहे प्रथम कॉरिडोर के प्रायोरिटी सेक्शन में सफलतापूर्वक मेट्रो परिचालन शुरू होने के बाद, यूपीएमआरसी द्वारा आगरा मेट्रो के प्रथम कॉरिडोर के शेष भूमिगत भाग मन:कामेश्वर से आरबीएस कॉलेज को समय पर पूरा करने के लिए तेज गति के साथ कार्य किया जा रहा है।

Dec 27, 2025 - 21:02
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आगरा मेट्रो को नई रफ्तार, आईएसबीटी–मन:कामेश्वर अप लाइन ट्रैक पूरा, जल्द शुरू होगा ट्रायल रन
आगरा मेट्रो का आईएसबीटी–मन:कामेश्वर अप लाइन ट्रैक पूरा।

12 किमी ट्रैक में अप लाइन तैयार, डाउन लाइन का आधे से ज्यादा काम पूरा, एलिवेटेड सेक्शन और दूसरे कॉरिडोर पर भी तेज़ निर्माण कार्य

आगरा। ताज ईस्ट गेट से सिकंदरा के बीच बन रहे प्रथम कॉरिडोर के प्रायोरिटी सेक्शन में सफलतापूर्वक मेट्रो परिचालन शुरू होने के बाद, यूपीएमआरसी द्वारा आगरा मेट्रो के प्रथम कॉरिडोर के शेष भूमिगत भाग मन:कामेश्वर से आरबीएस कॉलेज को समय पर पूरा करने के लिए तेज गति के साथ कार्य किया जा रहा है। 

यूपी मेट्रो ने एक नई सफलता हासिल करते हुए आईएसबीटी से मन:कामेश्वर मेट्रो स्टेशन के बीच अप लाइन में ट्रैक बिछाने का काम पूरा कर लिया है। इसी क्रम में मनकामेश्वर से आगे इसी सप्ताह ट्रेन का ट्रायल रन आरंभ होगा और जल्द ही शेष भाग में संचालन शुरू कर दिया जाएगा ।

बता दें कि आईएसबीटी से मन:कामेश्वर के बीच में अप और डाउन मिलाकर लगभग 12 कि.मी. ट्रैक बिछाने का काम किया जा रहा है। इस भाग में अब तक अप लाइन में काम पूरा हो गया है, जबकि डाउन लाइन में भी 50 प्रतिशत से अधिक ट्रैक बिछ कर तैयार हो गया है।अप और डाउन लाइन में ट्रैक के साथ ही काम थर्ड रेल, सिग्नलिंग आदि का काम भी किया जा रहा है।  

आईएसबीटी से सिकंदरा तक शेष खंड के एलिवेटेड खंड पर सिविल कार्य भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। इसी प्रकार दूसरे कॉरिडोर आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक का निर्माण कार्य भी तेजी से किया जा रहा है, ताकि परियोजना को समय पर पूरा किया जा सके और आगरा के लोगों को समयबद्ध तरीके से विश्व स्तरीय मेट्रो प्रणाली प्रदान की जा सके।


ऐसे होता है भूमिगत ट्रैक का निर्माण

भूमिगत मेट्रो निर्माण हेतु सबसे पहले स्टेशन का निर्माण किया जाता है।  स्टेशन का ढांचा तैयार होने के बाद लॉन्चिंग शाफ्ट का निर्माण कर टनल बोरिंग मशीन लॉन्च की जाती है। टीबीएम मशीन के जरिए गोलाकार टनल बनकर तैयार होती है। टनल का आकार गोल होने के कारण सीधे ट्रैक बिछाना संभव नहीं है, इसलिए यहां ट्रैक स्लैब की कास्टिंग की जाती है। इसके बाद इसी समतल ट्रैक स्लैब बैलास्टलेस ट्रैक बिछाया जाता है।

बैलास्टलैस ट्रैक निर्माण के दौरान कॉन्क्रीट बीम (प्लिंथ बीम) पर पटरियों को बिछाया जाता है। पारंपरिक तौर पर प्रयोग होने वाले ट्रैक की तुलना बैलास्टलैस ट्रैक अधिक मजबूत होता है एवं इसका मेन्टिनेंस भी काफी कम है। 

हेड हार्डेंड रेल से ट्रेन को मिलती ट्रैक को मजबूती

बता दें कि रेलवे की तुलना में मेट्रो प्रणाली में पटरियों पर गाड़ियों का आवागमन अधिक होता है, यहां मेट्रो रेल औसतन पांच मिनट के अंतर पर चलती हैं। ऐसे में तेजी से ट्रेन की स्पीड पकड़ने और ब्रेक लगाने की स्थिति में ट्रेन के पहिये और पटरी के बीच अधिक घर्षण होता है। जिसके कारण सामान्य रेल जल्दी घिस सकती है जिससे पटरी टूटने, क्रेक आदि समस्या आ सकती है, लेकिन हेड हार्डेंड रेल के अधिक मजबूत होने के कारण ऐसी कोई समस्या नहीं आती है।


ऑटोमैटिक ट्रैक वेल्डिंग मशीन से बनती है लॉन्ग वेल्डेड रेल

भूमिगत भाग में ट्रैक बिछाने के लिए सबसे पहले क्रेन की मदद से ऑटोमेटिक ट्रैक वेल्डिंग मशीन को शाफ़्ट में पहुंचाया जाता है। इसके बाद पटरी के भागों को वेल्डिंग के जरिए जोड़कर लॉन्ग वेल्डिड रेल बनाई जाती है। इसके बाद टनल में ट्रैक स्लैब की कास्टिंग कर उस पर लॉन्ग वेल्डिड रेल बिछाई जाती है। वहीं, बैलास्टिड ट्रैक के लिए समतल भूमि पर गिट्टी एवं कॉन्क्रीट के स्लीपरों पर पटरी बिछाई जाती हैं।