आगरा मेट्रो के द्वितीय कॉरिडोर में तेजी, कैंट से आगरा कॉलेज तक प्रायोरिटी स्ट्रेच आकार लेने लगा
आगरा मेट्रो के द्वितीय कॉरिडोर के आगरा कैंट–आगरा कॉलेज प्रायोरिटी स्ट्रेच पर सिविल निर्माण कार्य तेजी से अंतिम चरण में पहुंच रहा है। पांचों स्टेशनों की संरचनाएं आकार ले चुकी हैं, जबकि आगरा कैंट, सदर बाजार और प्रतापपुरा में सिस्टम्स रूम तैयार कर तकनीकी कार्य शुरू कर दिए गए हैं। आगरा कैंट स्टेशन पर पीईबी स्ट्रक्चर का निर्माण भी शुरू हो गया है। वायडक्ट के 240 में से 230 यू-गर्डर तथा स्टेशनों के सभी 50 यू-गर्डर लगाए जा चुके हैं। अब स्टेशन फिनिशिंग, पत्थर लगाने और अन्य तकनीकी कार्यों पर जोर है।
स्टेशनों पर सिविल कार्य लगभग पूरा, सिस्टम्स रूम तैयार; आगरा कैंट स्टेशन पर पीईबी स्ट्रक्चर का काम शुरू
आगरा। आगरा मेट्रो के द्वितीय कॉरिडोर के तहत आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक के प्रायोरिटी स्ट्रेच पर निर्माण कार्य अब तेजी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। लगभग सभी स्टेशनों ने अपना आकार लेना शुरू कर दिया है और स्टेशनों की सिविल संरचना का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके साथ ही सिस्टम्स से जुड़े कार्य, स्टेशन फिनिशिंग और पीईबी (Pre-Engineered Building) स्ट्रक्चर लगाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
प्रायोरिटी स्ट्रेच में कुल पांच स्टेशन प्रस्तावित हैं—आगरा कैंट, सदर बाजार, प्रतापपुरा, कलेक्ट्रेट और आगरा कॉलेज। इन सभी स्टेशनों पर निर्माण गतिविधियां तेजी से चल रही हैं। सिविल संरचना तैयार होने के बाद अब स्टेशन परिसर को अंतिम स्वरूप देने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
तीन स्टेशनों पर तैयार हुए सिस्टम्स रूम
आगरा कैंट, सदर बाजार और प्रतापपुरा मेट्रो स्टेशनों पर सिस्टम्स रूम तैयार हो चुके हैं और इनमें सिस्टम्स से जुड़े कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं। ये विशेष कक्ष स्टेशन के संचालन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। इनमें सिग्नलिंग, एयर कंडीशनिंग तथा स्टेशन की विद्युत आपूर्ति से संबंधित उपकरण स्थापित किए जाते हैं। सिस्टम्स से जुड़े इन कार्यों के शुरू होने के साथ ही परियोजना केवल सिविल निर्माण से आगे बढ़कर मेट्रो संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी ढांचे की दिशा में भी आगे बढ़ रही है।
आगरा कैंट स्टेशन पर पीईबी स्ट्रक्चर का काम शुरू
आगरा कैंट मेट्रो स्टेशन पर अब पीईबी (Pre-Engineered Building) स्ट्रक्चर लगाने का कार्य भी प्रारंभ हो गया है। पीईबी स्ट्रक्चर स्टेशन के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है और यह स्टेशन को कवर प्रदान करने के साथ-साथ उसके वास्तु स्वरूप को अंतिम रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पीईबी स्ट्रक्चर में पॉलीकार्बोनेट शीट्स का उपयोग किया जाता है। इन शीट्स की खासियत यह है कि वे दिन के समय प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश को स्टेशन के भीतर पहुंचने में मदद करती हैं। इससे दिन में कृत्रिम प्रकाश व्यवस्था के लिए एलईडी लाइट्स पर निर्भरता कम की जा सकती है।
इस तरह प्राकृतिक रोशनी के अधिकतम उपयोग के कारण पीईबी स्ट्रक्चर स्टेशन को अधिक ऊर्जा-कुशल और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में मददगार साबित होता है। यही वजह है कि आगरा मेट्रो के स्टेशनों को आधुनिक और टिकाऊ परिवहन ढांचे के अनुरूप विकसित किया जा रहा है।
पिलर निर्माण भी अंतिम दौर में
प्रायोरिटी स्ट्रेच के वायडक्ट निर्माण की बात करें तो रावली को छोड़कर लगभग सभी पियर्स (पिलर्स) की कास्टिंग पूरी की जा चुकी है। रावली क्षेत्र में स्टील स्पैन इरेक्शन के बाद शेष सिविल कार्य भी महीने के अंत तक लगभग पूरा होने की उम्मीद है। मेट्रो के पिलर निर्माण में इन-सिटू तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, यानी पिलर का निर्माण स्थल पर ही किया जाता है। वहीं वायडक्ट की अन्य प्रमुख संरचनाएं जैसे यू-गर्डर और पियर कैप आदि कास्टिंग यार्ड में तैयार किए जाते हैं और बाद में भारी क्रेन की सहायता से निर्धारित स्थान पर स्थापित किए जाते हैं।
वायडक्ट के यू-गर्डर लगाने का काम लगभग पूरा
प्रायोरिटी स्ट्रेच के वायडक्ट पर 230 में से 240 यू-गर्डर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि स्टेशनों के लिए निर्धारित सभी 50 यू-गर्डर भी रखे जा चुके हैं। यू-गर्डर मेट्रो के एलिवेटेड वायडक्ट का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। इनके सफल इरेक्शन के साथ वायडक्ट का बड़ा हिस्सा आकार लेने लगता है और ट्रैक बिछाने सहित आगे के तकनीकी कार्यों के लिए आधार तैयार होता है।
स्टेशन संरचना के प्रमुख गर्डर भी तैयार
प्रायोरिटी स्ट्रेच के स्टेशनों से जुड़े प्रमुख सिविल स्ट्रक्चर का निर्माण भी तेजी से पूरा किया गया है। स्टेशन निर्माण के लिए निर्धारित सभी 24 क्रॉस आर्म्स तैयार किए जा चुके हैं। इसी तरह स्टेशन कॉनकोर्स के लिए सभी 163 डबल-टी गर्डर, सभी 40 कॉनकोर्स एल-गर्डर, 45 प्लेटफॉर्म एल-गर्डर और सभी 56 प्लेटफॉर्म पाई-गर्डर का भी सफलतापूर्वक परिनिर्माण किया जा चुका है। पाई-गर्डर का आकार गणित के ‘π’ (पाई) चिन्ह जैसा दिखाई देता है। स्टेशन प्लेटफॉर्म और संबंधित संरचनाओं के निर्माण में इन गर्डरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
अब फिनिशिंग वर्क पर जोर
सिविल स्ट्रक्चर के निर्माण के साथ अब स्टेशनों पर फिनिशिंग कार्य भी तेज हो गए हैं। स्टेशनों पर पत्थर लगाने, सतहों को अंतिम रूप देने और अन्य फिनिशिंग गतिविधियां शुरू कर दी गई हैं। निर्माण की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए प्रायोरिटी स्ट्रेच के अधिकांश प्रमुख सिविल कार्य अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचते दिखाई दे रहे हैं। रावली पर स्टील स्पैन के इरेक्शन के बाद शेष सिविल कार्यों में आखिरी पिलर का निर्माण भी लगभग पूरा हो जाएगा।
इस तरह आगरा मेट्रो के द्वितीय कॉरिडोर का आगरा कैंट से आगरा कॉलेज तक का प्रायोरिटी स्ट्रेच अब केवल पिलर और वायडक्ट तक सीमित निर्माण परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि स्टेशन स्ट्रक्चर, सिस्टम्स रूम, पीईबी और फिनिशिंग कार्यों के साथ मेट्रो संचालन के लिए आवश्यक समग्र बुनियादी ढांचे का रूप लेने लगा है।