आगरा का फरैरा कांडः पांच साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी दो दरिंदों को फांसी की सजा

आगरा। आगरा में पांच साल की एक मासूम के साथ हुई हैवानियत पर अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। बाह क्षेत्र के फरैरा गांव में पांच वर्षीय बालिका के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के दोषी अमित व निखिल को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट (एडीजे-27) सोनिका चौधरी की अदालत ने शुक्रवार को फांसी की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि यह अपराध समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला है और ऐसे दरिंदों को केवल मृत्युदंड ही उचित दंड है।

Oct 16, 2025 - 15:11
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आगरा का फरैरा कांडः पांच साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या के आरोपी दो दरिंदों को फांसी की सजा

घटना 18 मार्च 2024 की है। बाह थाना क्षेत्र के फरैरा गांव निवासी वादी की पांच वर्षीय बेटी घर के पास नहर किनारे खेल रही थी। उसी दौरान गांव के ही अमित और निखिल बाइक पर सवार होकर आए और बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गए। जब काफी देर तक बच्ची वापस नहीं लौटी तो परिवार ने खोजबीन शुरू की और थाने में अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस की जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने मासूम के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी और उसके शव को सरसों के खेत में दबा दिया है। इतना ही नहीं, दोनों ने मासूम के पिता को फोन कर छह लाख रुपये की फिरौती भी मांगी थी।

पुलिस ने सरसों के खेत से बालिका का शव बरामद करने के साथ ही आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उनके खिलाफ धारा 363, 364ए, 302, 201, 376डीबी, 377 आईपीसी तथा धारा 5/6 पॉक्सो एक्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। ट्रायल एडीजे-27 सोनिका चौधरी की अदालत में चला। अभियोजन की ओर से एडीजीसी सुभाष गिरि ने पैरवी की और 18 गवाहों के बयान दर्ज कराए।

अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी माना। दोनों को फांसी की सजा से साबित होता है कि कोर्ट ने यह माना कि यह अपराध न केवल पीड़ित परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए भयावह है। ऐसे अपराधियों के लिए नरमी दिखाना न्याय के साथ अन्याय होगा। इस आधार पर दोनों को फांसी की सजा सुनाई गई।

अदालत में सन्नाटा, परिवार की आंखों में आंसू

सजा सुनाए जाने के वक्त कोर्ट रूम खचाखच भरा हुआ था। जैसे ही जज ने दोनों दरिंदों को फांसी का फैसला सुनाया, दोनों के चेहरों की हवाइयां उड़ गईं। उनके परिजन फफक कर रो पड़े, वहीं पीड़ित परिवार की आंखों से खुशी के थे। अदालत कक्ष में मौजूद लोगों ने इस निर्णय को ‘न्याय की जीत’ बताया।

एडीजीसी सुभाष गिरि का बयान

सरकार की ओर से पैरवी कर रहे एडीजीसी सुभाष गिरि ने कहा कि यह निर्णय न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को और मजबूत करेगा। अभियोजन पक्ष ने सभी साक्ष्य व गवाहों के माध्यम से यह सिद्ध किया कि अभियुक्तों ने जघन्य अपराध किया था।

SP_Singh AURGURU Editor