एआई-रसायन विज्ञान के समन्वय में राष्ट्र समाधान का सूत्र: दयालबाग में गूंजा नवाचार का संकल्प

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रयोगात्मक विज्ञान के समन्वय से देश के सामने खड़ी जटिल समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त होगा। अनुसंधान, शिक्षा और उद्योग, तीनों क्षेत्रों में एआई निर्णायक भूमिका निभाने जा रही है। यह स्पष्ट संदेश दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी से सामने आया, जहां विज्ञान को भविष्य की दिशा देने वाले मंथन ने नई सोच और नए प्रयोगों की नींव रखी।

Jan 11, 2026 - 19:09
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एआई-रसायन विज्ञान के समन्वय में राष्ट्र समाधान का सूत्र: दयालबाग में गूंजा नवाचार का संकल्प
दयालबाग डीम्ड यूनिवर्सिटी में रसायन विज्ञान अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उभरती भूमिका विषयक संगोष्ठी में डॊ. आंबेडकर विवि की कुलपति प्रो. आशू रानी को स्मृति चिह्न प्रदान करते संगोष्ठी आयोजक।

आगरा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और प्रयोगों के संयोजन से देश की समस्याओं का समाधान होगा। यह विचार डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में आयोजित संगोष्ठी “रसायन विज्ञान अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उभरती भूमिका” में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एआई को पारंपरिक रासायनिक विज्ञान के साथ एकीकृत कर जटिल अनुसंधान चुनौतियों का समाधान संभव है और इससे शिक्षा जगत व उद्योग दोनों में नवाचार को नई गति मिलेगी।

संस्थान के रसायन विज्ञान विभाग के तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में आईआईएसईआर भोपाल के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग के डॉ. साई फणी कुमार वंगाला तथा आईआईटी इंदौर के रासायनिक अभियांत्रिकी विभाग की डॉ. रूपांजली प्रसाद ने तकनीकी व्याख्यान दिए। दोनों विशेषज्ञों ने एआई आधारित मॉडलिंग, डेटा विश्लेषण और प्रक्रिया अनुकूलन के माध्यम से रसायन विज्ञान में हो रहे अत्याधुनिक प्रयोगों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक प्रोफेसर सी. पटवर्धन ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रासायनिक विज्ञान का समन्वय संस्थान के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है, जो नवोन्मेषी, मूल्य-आधारित और अनुप्रयोग-उन्मुख अनुसंधान को बढ़ावा देता है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे मूलभूत रासायनिक ज्ञान के साथ-साथ गणनात्मक और विश्लेषणात्मक कौशल भी विकसित करें, ताकि वैश्विक स्तर की चुनौतियों का सामना किया जा सके।

संगोष्ठी के आरंभ में रसायन विभाग के प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत किया और आधुनिक रसायन विज्ञान अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बढ़ती भूमिका पर परिचयात्मक प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर रजिस्ट्रार प्रोफेसर संजीव स्वामी, कोषाध्यक्ष सुश्री स्नेह बिजलानी, प्रोफेसर विभा आर. सत्संगी, प्रोफेसर साहब दास, प्रोफेसर के. महाराज कुमारी, डॉ. पुष्पा साहनी, डॉ. सुधीर वर्मा, डॉ. रंजीत कुमार, डॉ. अपर्णा सत्संगी, डॉ. मंजू श्रीवास्तव, डॉ. सचिन सक्सेना, डॉ. योगिता जैन और डॉ. गुंजन गोस्वामी सहित अनेक शिक्षाविद् व शोधकर्ता उपस्थित रहे।
संगोष्ठी का समन्वय प्रोफेसर अनीता लखानी ने किया, जबकि डॉ. नाज़िया सिद्दीकी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

SP_Singh AURGURU Editor