यूपी, बिहार-बंगाल के लिए बुलेट ट्रेन का ऐलान, सिर्फ 6 घंटे में दिल्ली से पहुंचेंगे सिलीगुड़ी, अश्विनी वैष्णव ने बताई पूरी योजना

दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना पूरी होने पर 20 घंटे का सफर केवल 6 घंटे में पूरा होगा, जबकि 300-320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली ट्रेनें उत्तर भारत की कनेक्टिविटी बढ़ाएंगी।

Jun 11, 2026 - 20:58
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 यूपी, बिहार-बंगाल के लिए बुलेट ट्रेन का ऐलान, सिर्फ 6 घंटे में दिल्ली से पहुंचेंगे सिलीगुड़ी, अश्विनी वैष्णव ने बताई पूरी योजना


 
 
नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने नई बुलेट ट्रेन परियोजना का ऐलान कर दिया है। अब दिल्ली से सिलीगुड़ी के बीच यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए आने वाले वर्षों में सफर का अनुभव पूरी तरह बदल जाएगा। केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली को उत्तर बंगाल के प्रमुख शहर सिलीगुड़ी से हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के जरिए जोड़ने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।

प्रस्तावित दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन परियोजना के पूरा होने के बाद वर्तमान में करीब 20 घंटे में तय होने वाली दूरी महज 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इस महत्वाकांक्षी योजना से न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के कई शहरों में आर्थिक गतिविधियों को भी नया बल मिलने की उम्मीद है।

प्रस्तावित कॉरिडोर को मौजूदा रेलवे लाइनों के उन्नयन के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा। इसके लिए पूरी तरह अलग और समर्पित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क तैयार किया जाएगा। बुलेट ट्रेनें 300 से 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी, जिससे लंबी दूरी की यात्रा का समय कम हो जाएगा।

इन ट्रेनों में आधुनिक एयरोडायनामिक डिजाइन का उपयोग किया जाएगा, जिससे हवा का दबाव कम होगा और यात्रियों को अधिक आरामदायक सफर मिलेगा। सुरक्षा के लिए उन्नत टक्कर-रोधी तकनीक लगाई जाएगी, जबकि यात्रियों को अतिरिक्त लेगरूम और घूमने वाली सीटों जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी।

दिल्ली-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन मार्ग 1000 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा और दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार तथा पश्चिम बंगाल से होकर गुजरेगा। इस रूट की खासियत यह होगी कि इसे केवल दूरी कम करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि अधिकतम लोगों को कनेक्टिविटी देने के लिए डिजाइन किया जाएगा।

योजना के अनुसार ट्रेन नई दिल्ली से चलकर लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहरों से होते हुए सिलीगुड़ी पहुंचेगी। इससे उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच तेज और सुविधाजनक संपर्क स्थापित होगा।

नई दिल्ली इस कॉरिडोर का शुरुआती केंद्र होगी। लखनऊ के जरिए उत्तर प्रदेश के मध्य हिस्से को हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। वाराणसी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र को भी इस परियोजना से लाभ मिलेगा। बिहार की राजधानी पटना को बड़े यात्री केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जबकि सिलीगुड़ी उत्तर बंगाल और पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार के रूप में अंतिम स्टेशन होगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की घोषणा के बाद यह परियोजना फिलहाल प्रारंभिक योजना और अध्ययन के चरण में है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का कार्य नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपा जाएगा।

डीपीआर के तहत ड्रोन सर्वे, संभावित रूट का निर्धारण, भूमि की स्थिति का अध्ययन और पर्यावरणीय प्रभावों का आंकलन किया जाएगा। प्रारंभिक स्तर पर केंद्र सरकार की सहमति मिल चुकी है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए संबंधित राज्यों से भी आवश्यक मंजूरियां लेनी होंगी।

इतनी लंबी दूरी के एलिवेटेड हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के निर्माण में भारी निवेश की आवश्यकता होगी। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि परियोजना पर 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च आ सकता है। हालांकि वास्तविक लागत का आंकड़ा विस्तृत सर्वेक्षण और तकनीकी अध्ययन के बाद ही सामने आएगा।