विख्यात शिक्षाविद् और पूर्व कुलपति डॉ. गिरीश चंद्र सक्सेना का निधन, आगरा में कल होगाअंतिम संस्कार
आगरा। शिक्षा, विज्ञान और विश्वविद्यालय प्रशासन के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले विख्यात शिक्षाविद्, प्रसिद्ध शोध रसायनज्ञ, हिंदी विज्ञान साहित्यकार एवं लोकतंत्र सेनानी डॉ. गिरीश चंद्र सक्सेना का सोमवार सुबह 3 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित मैक्स द्वारका अस्पताल में निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। उनके निधन से शिक्षा जगत, वैज्ञानिक समुदाय और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार मंगलवार (4 अगस्त को) आगरा के ताजगंज स्थित इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में राज्य सम्मान के साथ किया जाएगा।
शिक्षा, अनुसंधान और विश्वविद्यालय प्रशासन को समर्पित रहा जीवन
डॉ. गिरीश चंद्र सक्सेना ने अपना संपूर्ण जीवन शिक्षा, शोध और उच्च शिक्षा के विकास के लिए समर्पित किया। उन्होंने आगरा के राजा बलवंत सिंह (आर.बी.एस.) कॉलेज में रसायन विज्ञान विभागाध्यक्ष और बाद में प्राचार्य के रूप में लंबे समय तक सेवाएं दीं। उनके प्रशासनिक अनुभव और शैक्षणिक नेतृत्व के कारण उन्हें देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
वर्ष 1998 से 2001 तक उन्होंने डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य किया। इसके बाद 2001 से 2004 तक वे डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के कुलपति रहे। उनके कार्यकाल में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और शैक्षणिक गुणवत्ता को नई दिशा मिली।
राष्ट्रीय स्तर पर निभाईं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
डॉ. सक्सेना का योगदान केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय तथा महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के उच्च स्तरीय निकायों के सदस्य रहे। इसके अलावा कई केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलपति चयन समितियों में अध्यक्ष और सदस्य के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वे नैक (NAAC) पीयर टीम के अध्यक्ष भी रहे और देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में गुणवत्ता सुधार की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दिया।
रसायन विज्ञान के क्षेत्र में रहा उल्लेखनीय योगदान
डॉ. गिरीश चंद्र सक्सेना अकार्बनिक एवं समन्वय रसायन (Inorganic and Coordination Chemistry) के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित शोधकर्ताओं में गिने जाते थे। उन्होंने 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए। इसके अलावा 60 राष्ट्रीय और 6 अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलनों का आयोजन एवं संचालन किया। उनके मार्गदर्शन में 51 शोधार्थियों ने पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की।
हिंदी विज्ञान साहित्य को नई पहचान दिलाई
डॉ. सक्सेना ने हिंदी में विज्ञान लेखन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विज्ञान को सरल भाषा में आमजन तक पहुंचाने के उनके प्रयासों को व्यापक सराहना मिली। हिंदी विज्ञान साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2017 में आत्माराम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया था।
वे इंडियन काउंसिल ऑफ केमिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे तथा अनेक राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थाओं से आजीवन जुड़े रहे।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए जेल भी गए
डॉ. गिरीश चंद्र सक्सेना केवल शिक्षाविद् ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के सजग प्रहरी भी थे। वर्ष 1975 से 1977 के आपातकाल के दौरान उन्होंने शिक्षक आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्हें मीसा के तहत गिरफ्तार कर बरेली केंद्रीय कारागार में निरुद्ध किया गया। लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को देखते हुए उन्हें लोकतंत्र सेनानी के रूप में मान्यता प्रदान की गई।
वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे और लंबे समय तक सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय रहे।
राज्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
परिजनों के अनुसार डॉ. गिरीश चंद्र सक्सेना का अंतिम संस्कार मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को ताजगंज, आगरा स्थित इलेक्ट्रिक शवदाह गृह में राज्य सम्मान के साथ किया जाएगा।
डॉ. सक्सेना के निधन पर शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया। श्रद्धांजलि देने वालों में पूर्व कुलपति प्रो. राजेश धाकरे, प्रो. मनोज कुमार रावत, प्रो. ए.सी. गोयल, प्रो. विनोद कुमार, प्रो. अमित अग्रवाल, प्रो. भूपेंद्र सिंह, शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव, रोटरी क्लब के पी.एन. अस्थाना तथा नरेश सूद प्रमुख हैं।
सभी ने कहा कि डॉ. गिरीश चंद्र सक्सेना का व्यक्तित्व बहुआयामी था। शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बनी रहेगी। उनके निधन से उच्च शिक्षा जगत ने एक दूरदर्शी शिक्षाविद्, कुशल प्रशासक और महान वैज्ञानिक को खो दिया है।