दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का संदेश-'डिग्री के साथ संस्कार भी जरूरी, तभी सफल होगा राष्ट्र निर्माण

डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय का 92वां दीक्षांत समारोह शिवाजी मण्डपम में आयोजित। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 64 मेधावी विद्यार्थियों को 88 पदक प्रदान किए। कुल 79,832 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां मिलीं। जंतर-मंतर प्रदर्शन पर कहा—शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी। महिला सशक्तिकरण पर कहा—अगले 10 वर्षों में लड़कियां हर क्षेत्र में आगे होंगी। शिक्षकों से आलोचना से न डरने और सकारात्मक कार्य जारी रखने का आह्वान। छह नई विश्वविद्यालय परियोजनाओं का लोकार्पण। बच्चों की पर्यावरण आधारित प्रस्तुति की सराहना करते हुए उन्हें चॉकलेट वितरित की।

Aug 3, 2026 - 16:53
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दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का संदेश-'डिग्री के साथ संस्कार भी जरूरी, तभी सफल होगा राष्ट्र निर्माण
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल मेधावी छात्रों मेडल पहनातीं हुईं।

92वें दीक्षांत समारोह में 79,832 विद्यार्थियों को मिली उपाधि, 64 मेधावियों को 88 पदकों से किया सम्मानित

आगरा। डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के 92 वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने शिक्षा, संस्कार, महिला सशक्तिकरण, राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार रखे। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि "कुछ बच्चों की गलत हरकत ने माहौल बिगाड़ दिया। वे पढ़े-लिखे थे, लेकिन उनमें संस्कार नहीं थे। शिक्षा के साथ बच्चों में संस्कार देना भी उतना ही जरूरी है।

सोमवार को शिवाजी मण्डपम में आयोजित भव्य समारोह में राज्यपाल ने 64 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 88 पदक प्रदान किए। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध गोल्डन ग्रास (मदुर) शिल्पकार अरधेंदु शेखर दास को भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प एवं ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।

जंतर-मंतर प्रदर्शन पर राज्यपाल की प्रतिक्रिया

अपने संबोधन के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि समाज में केवल डिग्री हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा के साथ नैतिक मूल्य और संस्कार नहीं होंगे तो समाज का संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने कहा कि  "जो कुछ जंतर-मंतर पर हुआ, हमने देखा। कुछ बच्चों की गलत हरकत ने पूरे माहौल को खराब कर दिया। वे पढ़े-लिखे थे, लेकिन उनमें संस्कार नहीं थे। शिक्षा के साथ संस्कार भी देना होगा।"

आने वाले 10 वर्षों में लड़कियां हर क्षेत्र में आगे होंगी

राज्यपाल ने महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए कहा कि आने वाले दशक में लड़कियां हर क्षेत्र में पुरुषों से आगे निकलेंगी। उन्होंने कहा कि  "आने वाले 10 वर्षों में पीछे भी लड़कियां होंगी और आगे भी लड़कियां होंगी। आज के दीक्षांत समारोह में भी छात्राओं ने शानदार प्रदर्शन किया है।" उन्होंने यह भी कहा कि आज महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, तकनीक और नेतृत्व के हर क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं।

महिला कुलपतियों की नियुक्ति पर दिया बड़ा संदेश

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगभग नौ विश्वविद्यालयों में महिला कुलपतियों की नियुक्ति की है। उन्होंने कहा कि  "क्या महिलाओं में क्षमता नहीं है? क्या केवल पुरुषों में ही क्षमता होती है? मैं नियुक्ति किसी आवेदन के आधार पर नहीं करती, बल्कि यह देखती हूं कि किसने कितना अच्छा काम किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पद पर नियुक्ति योग्यता और कार्यक्षमता के आधार पर होनी चाहिए।

शिक्षकों से कहा-समाज के कौओं से मत डरिए

अपने संबोधन में राज्यपाल ने शिक्षकों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि अच्छे कार्य करने वालों को आलोचना से डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि  "आप बहुत अच्छा काम करते हैं लेकिन कभी-कभी डर जाते हैं। कोई अखबार में कुछ लिख देता है, कोई सवाल पूछ देता है। डरना नहीं है। समाज में ऐसे कौए बैठे हैं। ये समाज के कौए हैं। उन्हें अच्छा काम दिखाई नहीं देता। आप निर्माण करते रहिए।" उन्होंने शिक्षकों से सकारात्मक सोच के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

सिलेबस से ज्यादा जरूरी है अच्छा वातावरण

राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति और बदलते शिक्षा तंत्र की चर्चा करते हुए कहा कि पहले वर्षों तक पाठ्यक्रम नहीं बदलता था, लेकिन अब एनसीईआरटी के माध्यम से बदलाव किए गए हैं। उन्होंने कहा कि केवल किताबें ही व्यक्तित्व का निर्माण नहीं करतीं। शिक्षक और शैक्षणिक वातावरण भी विद्यार्थियों को गढ़ते हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं बल्कि बेहतर नागरिक बनाना है।

मेडलिस्ट छात्र की सास को लेकर मंच से ली चुटकी

समारोह के दौरान राज्यपाल ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि एक मेडलिस्ट छात्र के साथ उसके पति और माता तो आए, लेकिन सास नहीं आईं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि  "सास को भी आना चाहिए था। मैं तो कहती हूं जिनकी सास हैं, उन्हें भी बढ़-चढ़कर कार्यक्रमों में हिस्सा लेना चाहिए।" उनकी इस टिप्पणी पर पूरा सभागार तालियों और मुस्कान से गूंज उठा।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय का संबोधन

उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि आगरा केवल ताजमहल का शहर नहीं, बल्कि यह वीरता, संस्कृति और सामाजिक समरसता की भूमि भी है। उन्होंने कहा कि  छत्रपति शिवाजी महाराज ने आगरा से औरंगजेब की कैद तोड़कर इतिहास रचा।
बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर स्थापित यह विश्वविद्यालय सामाजिक न्याय और समान अवसर का प्रतीक है।
शिक्षा कभी समाप्त नहीं होती, जीवनभर सीखना पड़ता है। जिन्हें आज मेडल नहीं मिला, वे निराश न हों क्योंकि "कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। जिन विद्यार्थियों को मेडल मिला है, वे समाज के लिए रोल मॉडल बनें।

79,832 विद्यार्थियों को मिली उपाधि

इस वर्ष विश्वविद्यालय ने कुल 79,832 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं।

उपाधियों का विवरण
स्नातक (UG) – 55,686
स्नातकोत्तर (PG) – 9,150
प्रोफेशनल कोर्स – 14,826
पीएचडी – 167
डी.लिट्. – 3
64 मेधावी छात्रों को मिले 88 पदक

समारोह में कुल 64 मेधावी विद्यार्थियों को 88 स्वर्ण, रजत एवं अन्य पदकों से सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने सभी मेधावियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

अरधेंदु शेखर दास को मिली मानद उपाधि

पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध गोल्डन ग्रास (मदुर) शिल्पकार अरधेंदु शेखर दास को भारतीय पारंपरिक हस्तशिल्प और ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए विश्वविद्यालय ने मानद उपाधि प्रदान की।

छह नई परियोजनाओं का लोकार्पण

दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर की छह महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण भी किया। इनमें  मॉडल स्कूल का जीर्णोद्धार, मियावाकी निधिवन, चाणक्य सदन, सुल्तानगंज स्थित शताब्दी भवन, कणाद हाई-टेक सेंटर, डॉ. आंबेडकर प्रतिमा स्थल का नवीनीकरण शामिल हैं। 

बच्चों की प्रस्तुति ने जीता दिल

समारोह में छोटे-छोटे बच्चों ने "पर्यावरण बचाओ", "सेव वाटर" और जागरूकता आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बच्चों ने पेड़-पौधों और जल संरक्षण पर संदेश दिया। प्रस्तुति से प्रभावित होकर राज्यपाल स्वयं मंच पर पहुंचीं, बच्चों से बातचीत की, उन्हें चॉकलेट वितरित की और छाता लेकर प्रस्तुति देने वाली बच्चियों की विशेष सराहना की। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। 

इस समारोह के मुख्य अतिथि एनसीटीई के चेयरमैन प्रो. पंकज अरोड़ा रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और राज्यमंत्री रजनी तिवारी मौजूद रहे। दीक्षांत समारोह पर महिला स्वास्थ्य को लेकर खास पहल हुई। सीएमओ आगरा की पहल पर 14-15 साल की 100 बालिकाओं का निःशुल्क एचपीवी टीका लगाया गया और राज्यपाल ने इन सभी प्रमाण-पत्र प्रदान किए। कुलपति प्रो. आशु रानी ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। 

डीएम ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत

आगरा आगमन पर जिलाधिकारी मनीष बंसल ने एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का स्वागत किया। इसके बाद उनका काफिला शिवाजी मण्डपम पहुंचा, जहां दीक्षांत समारोह का आयोजन हुआ।