102 डिग्री बुखार भी नहीं रोक सका 'गोल्डन गर्ल' अरुंधति का दम, इंग्लैंड की चैंटेल रीड को 5-0 से हराकर रचा इतिहास

ग्लासगो (स्कॉटलैंड)। जज्बा, जुनून और देश के लिए कुछ कर गुजरने की चाह हो तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक पातीं। इसका ताजा उदाहरण कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय मुक्केबाज अरुंधति चौधरी ने पेश किया। 102 डिग्री बुखार से जूझने के बावजूद अरुंधति ने महिला 70 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में इंग्लैंड की चैंटेल रीड को एकतरफा 5-0 से हराकर भारत को स्वर्ण पदक दिलाया। उनकी इस उपलब्धि के साथ भारत ने बॉक्सिंग में 7 स्वर्ण सहित कुल 10 पदक अपने नाम किए।

Aug 2, 2026 - 21:08
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102 डिग्री बुखार भी नहीं रोक सका 'गोल्डन गर्ल' अरुंधति का दम, इंग्लैंड की चैंटेल रीड को 5-0 से हराकर रचा इतिहास

फाइनल मुकाबले में अरुंधति चौधरी ने शुरुआत से ही शानदार प्रदर्शन किया। पहले राउंड में पांच में से चार जजों ने उन्हें 10-10 अंक दिए। दूसरे राउंड में उन्होंने सभी जजों को प्रभावित करते हुए पूर्ण अंक हासिल किए। तीसरे और अंतिम राउंड में भी सभी जजों ने अरुंधति के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें सर्वसम्मति से विजेता घोषित किया।

102 डिग्री बुखार में खेलकर जीता स्वर्ण

मैच के बाद अरुंधति की बड़ी बहन चारू ने उनकी संघर्षपूर्ण जीत का खुलासा किया। उन्होंने एएनआई से बातचीत में कहा, आज हम अपनी खुशी छिपा नहीं पा रहे हैं। मुझे अपनी बहन पर बहुत गर्व है। उसने 102 डिग्री बुखार होने के बावजूद कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।

चारू के इस खुलासे के बाद अरुंधति के साहस और समर्पण की देशभर में सराहना हो रही है।

कोटा की बेटी ने बनाया अलग मुकाम

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए बॉक्सिंग में सात स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में छह हरियाणा से थे, जबकि अरुंधति चौधरी राजस्थान के कोटा की रहने वाली हैं। शिक्षा के लिए प्रसिद्ध कोटा शहर में जब उन्होंने बॉक्सिंग को करियर बनाने का निर्णय लिया, तब वहां उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए कोई बॉक्सिंग कोच तक उपलब्ध नहीं था।

23 वर्षीय अरुंधति पहले बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं। उन्होंने 15 वर्ष की उम्र में बॉक्सिंग की शुरुआत की और कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार मेहनत कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया।

पिता चाहते थे IAS या IIT का सपना

अरुंधति के पिता सुरेश चौधरी चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़ाई पर ध्यान दे। उन्होंने स्पोर्ट्सस्टार से बातचीत में बताया कि अरुंधति पढ़ाई में बेहद मेधावी थीं और विशेष रूप से गणित में काफी अच्छी थीं। उन्होंने कहा, मैं चाहता था कि वह आईआईटी की परीक्षा दे या फिर आईएएस बनने की तैयारी करे। मुझे पूरा विश्वास था कि वह इनमें से किसी एक परीक्षा में जरूर सफल होगी।

'मैं पहली भारतीय महिला ओलंपिक गोल्ड विजेता बनना चाहती हूं'

सुरेश चौधरी ने बताया कि एक दिन अरुंधति ने उनसे पूछा कि हर साल कितने छात्र आईएएस और आईआईटी की परीक्षा पास करते हैं। जब उन्होंने बताया कि लगभग 200 छात्र आईएएस और करीब 10 हजार छात्र आईआईटी में सफल होते हैं, तो अरुंधति ने उनसे एक और सवाल किया। उन्होंने पूछा, "पापा, कितने भारतीयों ने ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीता है?"

सुरेश चौधरी ने बताया कि उस समय उन्हें केवल अभिनव बिंद्रा का नाम याद था। यह सुनकर अरुंधति ने कहा, मैं पहली भारतीय महिला बनना चाहती हूं जो ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीते।

आज कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर अरुंधति चौधरी ने यह साबित कर दिया है कि उनका लक्ष्य केवल सपना नहीं, बल्कि उसे पूरा करने का मजबूत संकल्प भी है।

SP_Singh AURGURU Editor