आस्था, आध्यात्म और विज्ञान का संगम देगा ब्रजभूमि को नई पहचान: मथुरा में बनेगा देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति म्यूजियम, गो-परंपरा और गो-आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
मथुरा। ब्रजभूमि मथुरा अब देश को एक अनूठी सांस्कृतिक और वैज्ञानिक सौगात देने जा रही है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की पहल पर मथुरा स्थित पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के परिसर में देश का पहला राष्ट्रीय गो-संस्कृति म्यूजियम स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना के लिए विश्वविद्यालय परिसर में भूमि का चयन कर लिया गया है और इसे राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक–शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
यह म्यूजियम आस्था, आध्यात्म और आधुनिक विज्ञान के संगम का प्रतीक होगा। यहां गोवंश के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टि से गाय और उसके उत्पादों की उपयोगिता को आम जनमानस तक प्रभावी और आधुनिक माध्यमों से पहुंचाया जाएगा। परंपरा और विज्ञान के इस समन्वय से गो-संरक्षण, गो-पालन और गो-आधारित जीवनशैली की समग्र और व्यावहारिक समझ विकसित की जाएगी।
शनिवार को प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण दल में ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी सी.पी. सिंह, परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सूरज पटेल, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष श्रीमती लक्ष्मी एन., परिषद के पर्यावरण सलाहकार मुकेश शर्मा तथा वेटरनेरी यूनिवर्सिटी से डॉ. अमित शुक्ला शामिल रहे। इस दौरान म्यूजियम की अवधारणा, संरचना और भावी स्वरूप पर विस्तृत चर्चा की गई।
मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने बताया कि म्यूजियम में डिजिटल और प्रतीकात्मक स्वरूप में गोवंश के 100 मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें देश में पाई जाने वाली सभी प्रमुख गोवंशीय नस्लों के साथ-साथ लुप्तप्राय प्रजातियां भी शामिल होंगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां भारत की समृद्ध और वैज्ञानिक गो-परंपरा को करीब से जान सकें।
म्यूजियम का एक बड़ा आकर्षण गाय के दूध और उससे बनने वाले उत्पादों—दूध, दही, पनीर, घी आदि की विशेष प्रदर्शनी होगी। यहां इन उत्पादों की वैज्ञानिक, पोषणात्मक और आयुर्वेदिक उपयोगिता को आधुनिक तकनीकों, डिजिटल डिस्प्ले और इंटरेक्टिव माध्यमों से प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही परिसर में एक आधुनिक दुग्ध उत्पाद पार्लर भी विकसित किया जाएगा, जहां आगंतुकों को शुद्ध और गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराए जाएंगे।
परियोजना के अंतर्गत भारतीय संस्कृति में गाय को प्राप्त माता का स्थान और सनातन परंपरा में उसकी आध्यात्मिक भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित किया जाएगा। म्यूजियम यह संदेश देगा कि गो-संरक्षण केवल कृषि या अर्थव्यवस्था तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह धार्मिक साधना, सात्त्विक जीवनशैली और लोककल्याण से गहराई से जुड़ा हुआ है।
मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप राष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया जा रहा यह गो-संस्कृति म्यूजियम ब्रज क्षेत्र की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा और गो-आधारित अर्थव्यवस्था को वैज्ञानिक मानकों पर समझने और अपनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।