मीठे जल की धारा में जागी सनातन चेतना: श्रीमनःकामेश्वर मंदिर के प्राचीन कुएं का वैदिक विधि से पूजन-और लोकार्पण

जहां जल में श्रद्धा का वास हो और परंपरा में संस्कृति की सांसें बहती हों, वहां केवल जीर्णोद्धार नहीं होता, विरासत का पुनर्जागरण होता है। आगरा के अति प्राचीन श्रीमनःकामेश्वर मंदिर परिसर में स्थित ऐतिहासिक कुएं का विधिवत पूजन और लोकार्पण ऐसा ही एक पावन अवसर बना, जहां भक्ति, सनातन परंपरा और जल-संरक्षण की त्रिवेणी एक साथ प्रवाहित हुई।

Jan 7, 2026 - 15:48
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मीठे जल की धारा में जागी सनातन चेतना: श्रीमनःकामेश्वर मंदिर के प्राचीन कुएं का वैदिक विधि से पूजन-और लोकार्पण
श्रीमनःकामेश्वर मंदिर, रावत पाड़ा परिसर में प्राचीन कुएं के जीर्णोद्धार के उपरांत मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह के साथ में श्रीमहंत योगेश पुरी एवं मठ प्रशासक हरिहर पुरी।

आगरा। श्रीमनःकामेश्वर मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन कुएं के जीर्णोद्धार के उपरांत बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भव्य पूजन एवं लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। इस पावन अवसर पर मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने श्रीमनःकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी के मार्गदर्शन में कुएं का विधिवत पूजन कर लोकार्पण किया। पूरे परिसर में मंत्रध्वनि, श्रद्धा और आस्था की अनुभूति व्याप्त रही।

समारोह में मंदिर मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने रामेश्वर से विशेष रूप से लाए गए 22 पवित्र कूपों का जल इस ऐतिहासिक कुएं में प्रवाहित किया। पवित्र जल के संग यह कुआं पुनः आध्यात्मिक चेतना, परंपरा और सांस्कृतिक स्मृति का जीवंत प्रतीक बन गया।

मंडलायुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्राचीन कुएं हमारी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर हैं। श्री मनकामेश्वर मंदिर मठ परिवार द्वारा किया गया यह कार्य केवल जीर्णोद्धार नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को सुरक्षित रखने का संकल्प है। यह पहल जल संरक्षण और धार्मिक परंपराओं—दोनों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।

महंत योगेश पुरी ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि यह कुआं केवल मीठे जल का स्रोत नहीं रहा, बल्कि विवाह, संस्कार और विविध धार्मिक अनुष्ठानों का प्रमुख केंद्र था। समय के साथ कुआं पूजन की परंपरा बोरिंग तक सिमट गई थी। अब शहर के मध्य इस प्राचीन कुएं के पुनः संचालन से यह पावन विधि फिर जीवित होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा चलाए जा रहे जल संरक्षण अभियानों की भावना के अनुरूप यह प्रयास सामाजिक चेतना को भी जागृत करेगा।

मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने जीर्णोद्धार के पीछे की प्रेरक कथा साझा करते हुए बताया कि रामायण सर्किट यात्रा के दौरान अयोध्या से जनकपुर जाते समय नंदीग्राम में स्थित कुंड में 27 तीर्थों का जल डालकर श्रीराम के राज्याभिषेक की परंपरा से वे अत्यंत प्रेरित हुए।
उन्होंने कहा, उसी दिव्य परंपरा से प्रेरणा लेकर यह संकल्प लिया गया कि मंदिर परिसर के बंद पड़े कुएं का जीर्णोद्धार कर प्राचीन विधि से श्री मनकामेश्वर बाबा का अभिषेक पुनः प्रारंभ किया जाए।

हरिहर पुरी ने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों में कुएं और जल स्रोत पर्यटन के प्रमुख केंद्र होते हैं। उसी प्रकार यह कुआं भी आगरा आने वाले धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा और हमारी सनातन सभ्यता को समझने का सशक्त माध्यम बनेगा।

उन्होंने बताया कि इस पावन और ऐतिहासिक कार्य में अमर गुप्ता एवं विजय सिंह का विशेष सहयोग रहा।

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SP_Singh AURGURU Editor