आगरा में पूर्व राष्ट्रपति कोविंद बोले- छत्रपति शिवाजी महाराज जनता के मन को जानने वाले आदर्श शासक

आगरा। जाणता राजा केवल नाटक नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से जोड़ने वाली एक संस्कार यात्रा है। यह संदेश पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ताज नगरी आगरा में आयोजित ‘जाणता राजा’ महानाट्य के मंचन का उद्घाटन करने के बाद दिया। दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा आयोजित इस सांस्कृतिक उत्सव में भाग लेकर उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज की गाथा भारत के लिए केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की दिशा दिखाने वाली प्रेरणा है।

Oct 4, 2025 - 19:22
 0
आगरा में पूर्व राष्ट्रपति कोविंद बोले- छत्रपति शिवाजी महाराज जनता के मन को जानने वाले आदर्श शासक
जाणता राजा महानाट्य का उद्घाटन के मौके पर राष्ट्रगान के दौरान मौजूद पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, यूपी के कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह और अन्य अतिथि।

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि यह हर्ष का विषय है कि हमारे संस्कृति मंत्री ने इस नाटक के अवसर पर आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज की स्मृति को चिरस्थायी रूप देने की घोषणाएं की हैं, जो आने वाली पीढ़ियों तक इस नगरी में उनकी अमर गाथा को जीवंत रखेंगी। उन्होंने इसके लिए पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह को इसके लिए बधाई दी। कोविंद ने यह भी साझा किया कि उन्हें यह सौभाग्य प्राप्त हुआ है कि वे इस नाटक को पूर्व में तीन बार देख चुके हैं। पहली बार सांसद रहते हुए दिल्ली में, दूसरी बार महाराष्ट्र के औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) और तीसरी बार रायगढ़ किले की यात्रा के दौरान। उन्होंने कहा कि इतना सजीव, ऐतिहासिक और भावनात्मक मंचन उन्होंने अपने जीवन में और कहीं नहीं देखा।

अपने संबोधन में पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि ‘जाणता राजा’ नाम का गूढ़ अर्थ है वह शासक जो जनता का मन जानता है। शिवाजी महाराज ऐसे शासक थे जिन्होंने अपनी प्रजा की भावना, आवश्यकता और पीड़ा को भली-भांति समझा। उनकी दूरदर्शिता, न्यायप्रियता, करुणा और नीति ने उन्हें एक आदर्श शासक बनाया। शिवाजी महाराज यह भली-भाँति जानते थे कि सच्ची राज्यव्यवस्था तलवार की धार से नहीं, बल्कि नीति और न्याय से चलती है। उनका व्यक्तित्व विजयी होने पर भी विनम्र और संघर्ष के क्षणों में भी मर्यादित रहा। मर्यादा वही विशेषता है जो भगवान श्रीराम से लेकर आज तक हमारे लिए प्रेरणा स्रोत रही है। यही कारण है कि ‘जाणता राजा’ केवल नाटक नहीं बल्कि 17वीं शताब्दी के मराठा राज्य और भारत की आत्मा को वर्तमान से जोड़ने वाला एक जीवंत सेतु है।

कोविंद ने आगे कहा कि जब हम विकसित भारत 2047 के सपने की बात करते हैं, तो शिवाजी महाराज का आदर्श नेतृत्व हमें प्रेरणा देता है। विकसित भारत का अर्थ केवल आर्थिक वृद्धि और GDP की गति नहीं, बल्कि ऐसा भारत है जहाँ हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षित आजीविका, स्वच्छ परिवेश और जीवन में समान अवसर प्राप्त हों। जहां शासन उत्तरदायी, न्याय सुलभ और पारदर्शी हो, तथा विकास का अर्थ मानवीय गरिमा, पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक समरसता भी हो। यही समग्र दृष्टि शिवाजी महाराज की नीति-दृष्टि थी और हमें उनसे यही प्रेरणा लेनी चाहिए कि नीति, निष्ठा और सेवा भाव से ही राष्ट्र सशक्त होता है।

अपने भाषण में उन्होंने दिव्य प्रेम सेवा मिशन का विशेष आभार व्यक्त किया और कहा कि यह संस्था 1997 में आशीष गौतम द्वारा हरिद्वार में कुछ युवाओं के साथ तब आरंभ की गई थी जब उन्होंने कुष्ठ रोगियों की सेवा का संकल्प लिया था। आज यह मिशन सेवा, संस्कार और समर्पण की एक विराट धारा बन चुका है।

अपने संबोधन के अंत में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि हमें अपने जीवन में शिवाजी महाराज के आदर्शों का पालन करने का संकल्प लेना चाहिए। सेवा-भाव से राष्ट्रीय हित की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए और अपनी ऊर्जा, प्रतिभा व संसाधनों का एक अंश उन लोगों के लिए समर्पित करना चाहिए जो विकास की दौड़ में पीछे रह गए हैं। यही सच्ची राष्ट्रसेवा है और यही आत्मनिर्भर भारत की दिशा है।

SP_Singh AURGURU Editor