भक्ति के स्वर्ण क्षणों का साक्षी बना गोवर्धन, गिरिराज महाराज को अर्पित हुआ दिव्य छप्पन भोग, श्रद्धा, सेवा और श्रृंगार का अद्भुत संगम

आगरा/गोवर्धन। गिरिराज महाराज की कृपा, वैष्णव परंपरा की पवित्रता और भक्तों की निष्कलुष आस्था के बीच श्री गिरिराज जी सेवक मंडल परिवार, आगरा के तत्वावधान में श्री गुरु कार्ण्षि आश्रम, बड़ी परिक्रमा मार्ग, आन्योर, गोवर्धन में आयोजित दो दिवसीय श्री गिरिराज जी छप्पन भोग मनोरथ श्रद्धा और भव्यता के साथ संपन्न हुआ।

Dec 22, 2025 - 19:31
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भक्ति के स्वर्ण क्षणों का साक्षी बना गोवर्धन, गिरिराज महाराज को अर्पित हुआ दिव्य छप्पन भोग, श्रद्धा, सेवा और श्रृंगार का अद्भुत संगम
श्री गुरु काष्र्णि आश्रम, बड़ी परिक्रमा मार्ग, आन्योर, गोवर्धन में आयोजित दो दिवसीय श्री गिरिराज जी छप्पन भोग मनोरथ में दर्शन करते श्रद्धालु।

उत्सव के दूसरे दिन गोवर्धन धाम पूर्ण रूप से भक्ति, सेवा और दिव्यता में डूबा नजर आया। जैसे ही ठाकुर जी सूर्य गरुड़ ध्वजा रथ पर विराजित होकर भक्तों को दर्शन देने प्रकट हुए, समूचा गोवर्धन जय गिरिराज महाराज के जयघोषों से गूंज उठा।

कलश यात्रा से छप्पन भोग दर्शन तक, भक्ति की अविरल धारा

दूसरे दिन प्रातःकाल बाल भोग के उपरांत चांदी के कलशों के साथ भव्य कलश यात्रा निकाली गई। श्रद्धा और मर्यादा के साथ निकली इस यात्रा का नेतृत्व वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य आयोजन स्थल पर विधिवत कलश स्थापना हुई।
हरि ओम महाराज और महंत कपिल नागर के मार्गदर्शन में दीप प्रज्वलन के साथ दिव्य छप्पन भोग मनोरथ दर्शन आरंभ हुए।

चांदी के विशाल थाल में 56 भोग, 1100 छबरियां अर्पित

ठाकुर जी को 11 किलो वजनी चांदी के विशाल थाल में विविध प्रकार के छप्पन भोग अर्पित किए गए। साथ ही 1100 छबरियों में भी भोग समर्पित हुआ। ठाकुर जी का श्रृंगार विशेष आकर्षण का केंद्र रहा- हीरे-जड़े आभूषण, चांदी की छड़ी, और गरुड़ ध्वजा रथ पर विराजमान गिरिराज महाराज साक्षात कृपा स्वरूप प्रतीत हुए।

501 साधु-संतों की सेवा, हजारों श्रद्धालुओं ने पाई महाप्रसादी

छप्पन भोग दर्शन के साथ विशाल साधु सेवा आयोजित हुई, जिसमें 501 साधु-संतों को श्रद्धाभाव से भोजन प्रसादी कराई गई। तत्पश्चात भक्तों के लिए विशाल महाप्रसादी (भाव भोजन) का आयोजन हुआ, जिसमें गोवर्धन पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया। महाप्रसादी का दृश्य श्रद्धा के ज्वार सरीखा अनुभव कराता रहा।

भजन संध्या ने बांधा समां, रात्रि में विशेष दुग्ध भोग

संध्याकाल की भव्य भजन संध्या ने वातावरण को रस, भाव और भक्ति से सराबोर कर दिया। दक्षिण भारतीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजनों, कीर्तनों और झांकियों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। रात्रि में ठाकुर जी को अमृत तुल्य दुग्ध का विशेष भोग चांदी के पात्र में अर्पित किया गया।

शयन आरती के साथ भावपूर्ण समापन

समापन अवसर पर शयन आरती संपन्न हुई। दीपों की ज्योति, शंख-नाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और नम आंखों के बीच जब गिरिराज महाराज की आरती उतारी गई, तो मानो स्वयं गोवर्धन धरा भी इस अलौकिक क्षण की साक्षी बन गई।

द्वादश ज्योतिर्लिंग थीम बनी आकर्षण

आयोजन स्थल की सजावट द्वादश ज्योतिर्लिंग की दिव्य थीम पर की गई। लगभग 20 फीट ऊंचा भव्य प्रवेश द्वार, झूमरों और कलात्मक सज्जा से सुसज्जित रहा। प्रवेश द्वार पर स्थापित विशाल शिवलिंग के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ की कृपा प्राप्त की। मुख्य पंडाल में ठाकुर जी को 40 फीट ऊंचे और 50 फीट चौड़े भव्य मंच पर विराजमान किया गया, जिसने संपूर्ण गोवर्धन धाम को अलौकिक तीर्थ का स्वरूप प्रदान किया।

SP_Singh AURGURU Editor