गणतंत्र दिवस पर ताजमहल में तिरंगा फहराने का दावा, हिंदू महासभा की गतिविधि से मचा हड़कंप
गणतंत्र दिवस पर अखिल भारत हिन्दू महासभा के कार्यकर्ताओं ने ताजमहल परिसर में तिरंगा फहराने का दावा किया, जिससे प्रशासन में हड़कंप मच गया। संगठन ने ताजमहल को “तेजोमहालय” बताते हुए अपने पुराने दावे दोहराए। मामले की जांच एएसआई और सीआईएसएफ कर रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
आगरा। आगरा स्थित विश्वविख्यात ताजमहल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर अखिल भारत हिन्दू महासभा से जुड़े हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने ताजमहल परिसर के भीतर तिरंगा फहराने और भारत माता की जय के नारे लगाने का दावा किया है। संगठन के इस दावे के बाद प्रशासनिक और सुरक्षा महकमे में हलचल तेज हो गई है।
हिंदू महासभा के कार्यकर्ता नंदू कुमार और नितेश भारद्वाज ने दावा किया कि 26 जनवरी को वे ताजमहल के अंदर प्रवेश करने में सफल रहे और वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने ताजमहल को “तेजोमहालय” बताते हुए इसे प्राचीन शिव मंदिर होने का पुराना दावा दोहराया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि ताजमहल बनने के बाद यह पहला अवसर है जब उसके अंदर राष्ट्रध्वज फहराया गया।
संगठन का तर्क है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा देशभर में मदरसों और मस्जिदों में राष्ट्रध्वज फहराने के आह्वान के बाद उन्होंने यह कदम उठाया। हिंदू महासभा का कहना है कि वे लंबे समय से ताजमहल में हिंदू धार्मिक गतिविधियों की अनुमति की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ऐतिहासिक तथ्यों को दबा रहे हैं।
यह पहला मौका नहीं है जब अखिल भारत हिन्दू महासभा ने ताजमहल को लेकर विवादित गतिविधि की हो। इससे पहले सावन माह में संगठन के पदाधिकारियों ने ताजमहल परिसर में शिवलिंग होने का दावा करते हुए जलाभिषेक करने की घोषणा की थी। उस समय सुरक्षा एजेंसियों ने जांच के आदेश दिए थे और कई पदाधिकारियों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए थे।
ताजमहल में पूर्व में नमाज अदा करने, हनुमान चालीसा पाठ और भगवा झंडा फहराने जैसे मामलों को लेकर भी विवाद हो चुके हैं। हर ऐसे घटनाक्रम के बाद ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक कड़ी कर दी जाती है।
फिलहाल इस ताजा दावे के बाद एएसआई और सीआईएसएफ पूरे घटनाक्रम की गंभीरता से जांच कर रही हैं। ताजमहल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में तिरंगा फहराने की घटना हुई या नहीं। प्रशासन ने किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने की बात कही है।