‘चौकी पर आया तो जूतों से पीटूंगा’, दरोगा की धमकी का ऑडियो वायरल, जांच के बाद निलंबन

मिढ़ाकुर चौकी प्रभारी का कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल। शिकायतकर्ता ने गाली-गलौज और धमकी देने का आरोप लगाया। आरोप है कि आरोपियों को जेल भेजने के नाम पर एक लाख रुपये मांगे गए। मानवाधिकार आयोग और पुलिस अधिकारियों से की गई शिकायत। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर चौकी प्रभारी निलंबित। भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद मुकदमा दर्ज न होने पर उठ रहे सवाल। स्थानीय लोगों ने निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की।

Jun 13, 2026 - 01:55
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‘चौकी पर आया तो जूतों से पीटूंगा’, दरोगा की धमकी का ऑडियो वायरल, जांच के बाद निलंबन
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रिश्वत मांगने और गाली देने के आरोप में मिढ़ाकुर चौकी प्रभारी निलंबित, मानवाधिकार आयोग तक पहुंची शिकायत

आगरा। आगरा कमिश्नरेट पुलिस एक बार फिर विवादों में घिर गई है। थाना किरावली क्षेत्र की मिढ़ाकुर चौकी के तत्कालीन चौकी प्रभारी का एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में चौकी प्रभारी एक व्यक्ति के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए और चौकी पर आने पर जूतों से पीटने की धमकी देते हुए सुनाई दे रहे हैं। ऑडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।

मामले में शिकायतकर्ता गंगा पुत्र अमर सिंह निवासी सकतपुर ने मानवाधिकार आयोग तथा पुलिस अधिकारियों को शिकायत भेजकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार पड़ोसियों द्वारा उन पर लाठी-डंडों से हमला किया गया था, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। मेडिकल परीक्षण के बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, जिसकी विवेचना मिढ़ाकुर चौकी प्रभारी नवनीत सिंह कर रहे थे।

पीड़ित का आरोप है कि विवेचना के दौरान चौकी प्रभारी ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें जेल भेजने के नाम पर एक लाख रुपये की मांग की। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो कथित तौर पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग में शिकायत किए जाने की जानकारी मिलने पर चौकी प्रभारी ने फोन पर उन्हें गालियां दीं और धमकी भी दी, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है।

जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही, चौकी प्रभारी निलंबित

शिकायत और वायरल ऑडियो के सामने आने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच कराई। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने पर चौकी प्रभारी नवनीत सिंह को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि, रिश्वत मांगने जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। इसी बिंदु को लेकर स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ता पक्ष ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई पाई गई है, तो केवल निलंबन पर्याप्त कार्रवाई नहीं माना जा सकता।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

किरावली थाना क्षेत्र में हाल के दिनों में पुलिसकर्मियों पर धन उगाही और अनुचित व्यवहार के आरोपों के मामले सामने आते रहे हैं। कुछ दिन पूर्व भी कथित रूप से पैसे लेने का मामला चर्चा में आया था, लेकिन उसमें भी विभागीय कार्रवाई तक ही मामला सीमित रहने के आरोप लगे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जबकि पुलिस की प्राथमिकताएं सवालों के घेरे में हैं। ऐसे मामलों से न केवल जनता का भरोसा प्रभावित होता है, बल्कि आगरा कमिश्नरेट की छवि पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है।

जनता में नाराजगी, पारदर्शी कार्रवाई की मांग

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि रिश्वतखोरी और अभद्र व्यवहार के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की गई, तो पुलिस व्यवस्था पर लोगों का विश्वास और कमजोर होगा। लोगों ने मामले में निष्पक्ष जांच और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों पर अलग से मुकदमा दर्ज किए जाने की मांग की है।