₹1 करोड़ दिखाया, कारोबार ₹20 करोड़, आरआरआर इंफ्रा बिल्डर पर आयकर सर्वे में बड़ा खुलासा

आरआरआर इंफ्रा बिल्डर (अहिंसा ग्रुप) पर आयकर विभाग के सर्वे में घोषित आय और वास्तविक कारोबार के बीच बड़ा अंतर सामने आया। कंपनी जहां सालाना ₹1 करोड़ की आय दिखा रही थी, वहीं वास्तविक टर्नओवर लगभग ₹20 करोड़ तक पहुंच रहा था। प्लॉट और आवास बिक्री में कथित नकद लेन-देन के दस्तावेज मिले हैं। जांच के दौरान बिल्डर ने बकाया कर जमा करने की सहमति दी है।

Feb 20, 2026 - 20:36
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₹1 करोड़ दिखाया, कारोबार ₹20 करोड़, आरआरआर इंफ्रा बिल्डर पर आयकर सर्वे में बड़ा खुलासा
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प्लॉट-मकान बिक्री में कथित कैश डील, रिकॉर्ड से बाहर रखी गई आय

आगरा। रियल एस्टेट कंपनी आरआरआर इंफ्रा बिल्डर (अहिंसा ग्रुप) पर आयकर विभाग के सर्वे में बड़े पैमाने पर आय छुपाने के संकेत मिले हैं। विभागीय टीमों को ऐसे दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिनसे पता चलता है कि प्लॉट और आवास की बिक्री में भारी मात्रा में नकद लेन-देन किया गया और उसे व्यवस्थित रूप से आधिकारिक खातों से बाहर रखा गया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कंपनी सालाना लगभग ₹1 करोड़ का आयकर रिटर्न दाखिल कर रही थी, जबकि उसका वास्तविक कारोबार करीब ₹20 करोड़ तक पहुंच रहा था। तिमाही आधार पर भी लगभग ₹30 लाख की आय दर्शाई जाती थी, जो वास्तविक लेन-देन की तुलना में बेहद कम है। जब आयकर अधिकारियों ने दस्तावेजी साक्ष्य सामने रखे, तो जांच के दौरान ही बिल्डर ने तथ्यों को स्वीकार करते हुए बकाया कर जमा करने की सहमति दे दी।

तीन दिन तक चली कार्रवाई

आयकर विभाग की टीमों ने मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे से शहर के अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ सर्वे शुरू किया, जो गुरुवार सुबह तक चला। कार्रवाई में हाथरस रोड स्थित मुख्य कार्यालय, एत्मादपुर की रियल एस्टेट साइट, कुंडौल में विकसित हो रहा ‘ग्रांड ग्रीन वैली’ प्रोजेक्ट, संचालक रोहित जैन और उनसे जुड़े अन्य ठिकाने शामिल रहे। करीब तीन दर्जन अधिकारियों और कर निरीक्षकों की टीम ने दस्तावेज, डिजिटल डाटा और खातों की गहन जांच की।

कैश ट्रांजेक्शन का जाल

सूत्रों के अनुसार, नकद में ली गई रकम को विभिन्न माध्यमों से खपाया गया ताकि उसे आधिकारिक खातों में दर्ज न किया जाए। इससे कंपनी को बड़े पैमाने पर लाभ हुआ, लेकिन देय टैक्स का भुगतान नहीं किया गया। अधिकारियों का मानना है कि इस नेटवर्क में अन्य सफेदपोश लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं। विभाग अब जब्त दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रहा है।

वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में कार्रवाई

पूरी कार्रवाई प्रधान आयकर आयुक्त अनुपम कांत गर्ग के नेतृत्व में की गई। सर्वे की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन दस्तावेजों की जांच जारी है। विभाग की ओर से आगे और सख्त कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।