जैन दर्शन की शक्ति से आत्मगौरव का संचार, मुनि श्री ने समझाया मन और मस्तिष्क का विज्ञान
आगरा के छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में आयोजित Wonderful Jainism के दूसरे सत्र "माइंडफुलनेस (सजगता)" में पूज्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं को मन और मस्तिष्क की "इनर इंजीनियरिंग" का संदेश दिया। उन्होंने रोचक उदाहरणों के माध्यम से सकारात्मक सोच, आत्मचिंतन और जैन दर्शन के वैज्ञानिक पक्ष को समझाया। प्रेरक प्रवचन के बाद पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा और युवाओं ने "Proud to be a Jain" का सामूहिक उद्घोष कर जैन धर्म के प्रति अपना आत्मगौरव व्यक्त किया।
आगरा। छीपीटोला स्थित निर्मल सेवा सदन में आयोजित 'वंडरफुल जैनिज़्म' श्रृंखला का दूसरा विशेष सत्र रविवार को अत्यंत उत्साह, आध्यात्मिक ऊर्जा और युवा जोश के बीच संपन्न हुआ। मुनि श्री समत्व सागर जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस प्रेरणादायी कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं, युवतियों, पुरुषों एवं महिलाओं को जैन धर्म, उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आध्यात्मिक मूल्यों और आत्म-विकास के मार्ग से जोड़ना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ श्रद्धालुओं द्वारा मुनि श्री के पाद प्रक्षालन के साथ हुआ। इसके पश्चात संयुक्त धर्मसभा में पूज्य मुनि श्री ने 'वंडरफुल जैनिज़्म' के दूसरे विशेष सत्र "माइंडफुलनेस (सजगता)" पर प्रभावशाली उद्बोधन दिया। उनके ओजस्वी प्रवचनों ने उपस्थित युवाओं के मन में जैन धर्म के प्रति आत्मगौरव और आत्मविश्वास का नया संचार किया। प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने अपनी विशिष्ट शैली में कहा कि आज वे श्रोताओं का "सबसे जटिल ऑपरेशन" करने जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह शरीर का नहीं, बल्कि मन और मस्तिष्क का ऑपरेशन होगा, जिसके बाद सभी की सोच, जीवनशैली और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।
उन्होंने हार्ट सर्जरी और ब्रेन सर्जरी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सफल ऑपरेशन के बाद व्यक्ति को नया जीवन मिलता है, उसी प्रकार इस आध्यात्मिक सत्र के बाद भी प्रत्येक व्यक्ति की नई जीवनशैली की शुरुआत होगी। अपने संदेश को रोचक बनाने के लिए उन्होंने काल्पनिक रूप से स्क्रूड्राइवर, नट-बोल्ट, बैरिंग और इंजीनियरिंग टूलकिट का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कई लोगों के "ब्रेन के नट-बोल्ट ढीले हो गए हैं", किसी के "दिल के वॉल्व ठीक से काम नहीं कर रहे", तो किसी के मन में अनावश्यक "कचरा" भर गया है। आज इन सभी की "इनर इंजीनियरिंग" कर उन्हें सकारात्मक ऊर्जा से भरने का प्रयास किया जाएगा।
मुनि श्री ने कहा कि सबसे पहले स्वयं का डायग्नोसिस आवश्यक है। जब तक व्यक्ति अपने मन और मस्तिष्क की वास्तविक स्थिति को नहीं पहचानता, तब तक परिवर्तन संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि आज समाज की सबसे बड़ी समस्या यही है कि न तो दिल सही दिशा में है और न ही दिमाग सही ढंग से काम कर रहा है। यदि दोनों का संतुलन स्थापित हो जाए तो जीवन स्वतः सफल और सुखद बन सकता है।
उन्होंने "ब्रेन" को सबसे सुरक्षित और संवेदनशील क्षेत्र बताते हुए कहा कि जिस प्रकार किसी उच्च सुरक्षा वाले मुख्यालय में बिना अनुमति प्रवेश नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार मन और मस्तिष्क में भी नकारात्मक विचारों का प्रवेश रोकना आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने विचारों को शुद्ध रखें, सकारात्मक सोच अपनाएं और जैन दर्शन के सिद्धांतों को जीवन में उतारें।
मुनि श्री के प्रेरणादायी संबोधन के बाद पूरा सभागार कई मिनटों तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ एक स्वर में "प्राउड टू बी ए जैन" का उद्घोष किया, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मगौरव से भर दिया। कार्यक्रम का संचालन सतेंद्र जैन शास्त्री ने किया। उपस्थित श्रद्धालुओं का कहना था कि मुनि श्री का यह उद्बोधन किसी आध्यात्मिक "एनर्जी ड्रिंक" से कम नहीं था, जिसने सभी को नई सोच और नई प्रेरणा प्रदान की।
इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, प्रवीन जैन (पद्मावती), आनंद जैन, शैलेश जैन (लाला जी), मुकेश जैन, रमेश जैन, आशीष जैन, विवेक जैन, आशीष जैन (बाबा), सचिन जैन (तार), नितिन, सनी, अनिकेत, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित समिति के पदाधिकारी, समस्त मंडल एवं बड़ी संख्या में सकल जैन समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।