डुप्लीकेट के सहारे वैध हथियार?, शस्त्र लाइसेंस का रहस्य, हर आरोपी के पास कॉपी, पर असली दस्तावेज नहीं
आगरा में अवैध असलाह लाइसेंस कांड की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। सभी आरोपियों के पास डुप्लीकेट लाइसेंस मिले हैं, लेकिन किसी के पास भी मूल लाइसेंस मौजूद नहीं है। अलग-अलग बहाने सामने आए हैं, जबकि एक लाइसेंस पूरी तरह फर्जी पाया गया है। जांच अब उस कॉमन लिंक और संभावित बड़े नेटवर्क पर केंद्रित है, जो डुप्लीकेट लाइसेंस जारी कर अवैध हथियारों को वैध दिखाने का काम कर रहा था।
आगरा। आगरा में सामने आए अवैध असलाह लाइसेंस प्रकरण ने जांच को नए और चौंकाने वाले मोड़ पर ला खड़ा किया है। जैसे-जैसे परतें खुल रही हैं, वैसे-वैसे यह मामला साधारण लापरवाही नहीं बल्कि सुनियोजित नेटवर्क की ओर इशारा करता नजर आ रहा है। अब तक जांच के दायरे में आए सभी व्यक्तियों के पास डुप्लीकेट असलाह लाइसेंस तो मिला है, लेकिन किसी के पास भी मूल (प्रथम) लाइसेंस उपलब्ध नहीं है। यही समानता इस पूरे प्रकरण को संदिग्ध बना रही है।
मूल लाइसेंस गायब, वजहें अलग-अलग
जांच के दौरान आरोपियों ने मूल लाइसेंस के गायब होने को लेकर अलग-अलग दावे किए। जैद ने लाइसेंस चोरी होने की बात कही। अरशद ने कहा कि उसका मूल लाइसेंस फट गया था। शोभित और गौतम ने लाइसेंस गिर जाने की जानकारी दी। वहीं राजेश बघेल का लाइसेंस जांच में पूरी तरह फर्जी पाया गया। कहानियां भले अलग हों, लेकिन हर मामले में मूल दस्तावेज और उसकी प्रति का न होना जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
विभागीय रिकॉर्ड भी संदेह के घेरे में
सामान्य प्रक्रिया के अनुसार असलाह लाइसेंस का रिकॉर्ड संबंधित विभागीय फाइलों में सुरक्षित रहता है। ऐसे में एक साथ सभी मूल लाइसेंसों का गायब होना प्रशासनिक स्तर पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। सूत्रों के मुताबिक, जांच अब उस “कॉमन लिंक” पर केंद्रित है, जहां से डुप्लीकेट लाइसेंस जारी होने की पूरी प्रक्रिया संचालित हुई हो सकती है। आशंका जताई जा रही है कि डुप्लीकेट लाइसेंस के नाम पर बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा कर अवैध हथियारों को वैध दिखाने का नेटवर्क सक्रिय था।
बड़े रैकेट की आशंका, प्रदेश स्तर तक जांच
जांच एजेंसियां अब पुराने रिकॉर्ड, लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों और दस्तावेजी प्रक्रिया की परत-दर-परत जांच कर रही हैं। यदि डुप्लीकेट लाइसेंस जारी करने की कड़ी जुड़ती है, तो यह मामला आगरा से निकलकर प्रदेश स्तर तक फैले बड़े रैकेट का खुलासा कर सकता है। फिलहाल इस कांड ने प्रशासनिक तंत्र और लाइसेंस प्रणाली दोनों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच की दिशा अब सीधे उस नेटवर्क की ओर बढ़ रही है, जो पर्दे के पीछे से पूरा खेल संचालित करता रहा।