माघ पूर्णिमा पर आगरा के श्रीमनःकामेश्वर मंदिर में 11 रुद्र अखंड ज्योति रजतावरण का जीर्णोद्धार, वैदिक विधि से सिद्ध हुआ मनोरथ
आगरा। सनातन आस्था, वैदिक परंपरा और अखंड साधना के अनुपम केंद्र रावतपाड़ा स्थित प्राचीन एवं सिद्ध श्रीमनःकामेश्वर मंदिर में माघ पूर्णिमा के पावन अवसर पर एक ऐतिहासिक एवं दिव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार, गुरुजनों के आशीर्वाद और अखंड श्रद्धा के साथ मंदिर परिसर में चांदी निर्मित 11 रुद्र अखंड ज्योति रजतावरण का जीर्णोद्धार विधि-विधानपूर्वक पूर्ण किया गया।
इस पावन अवसर पर महंत योगेश पुरी ने पूर्व अखंड दीपक से एक-एक कर जोत लेकर सभी रजत दीपों को प्रज्ज्वलित किया। संध्याकाल में सूर्यास्त के समय वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ सम्पन्न हुए इस मनोरथ में श्रद्धा, अनुशासन और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
महंत योगेश पुरी ने बताया कि यह पुण्य कार्य 27 पीढ़ियों के श्री महंत गुरुजनों के आशीर्वाद से सिद्ध हुआ है। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण भारत में श्रीमनःकामेश्वर मंदिर एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां 11 रुद्र अखंड ज्योतियां रजतावरण स्वरूप में सतत प्रज्वलित हैं। ये 11 ज्योतियां द्वादश ज्योतिर्लिंगों के प्रतीक स्वरूप हैं, जिनमें से एक स्वयं बाबा श्रीमनःकामेश्वर हैं। यह व्यवस्था सनातन साधना की अद्वितीय पहचान है।
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि ये अखंड ज्योतियां सैकड़ों वर्षों से निरंतर प्रज्ज्वलित हैं और कोरोना काल जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी इनकी अखंडता बनी रही, जो बाबा मनःकामेश्वर की कृपा का सजीव प्रमाण है।
अखंड ज्योति प्रज्वलन के इस पावन अवसर पर मंदिर में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने भी दीप प्रज्ज्वलित कर बाबा से सुख, शांति, समृद्धि और लोककल्याण की कामना की।
2028 में 200 किलो चांदी का आवरण धारण करेंगे बाबा श्रीमनःकामेश्वर
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि विगत वर्ष सावन मास से पूर्व बाबा श्रीमनःकामेश्वर को 100 किलोग्राम चांदी से निर्मित भव्य रजत द्वार समर्पित किया गया था, जिस पर भगवान शिव के सभी प्रमुख प्रतीक चिन्ह अंकित हैं। अब अगला लक्ष्य वर्ष 2028 में मुख्य शिवलिंग के चांदी के आवरण को बदलना है। इसके तहत लगभग 200 किलोग्राम चांदी का नया आवरण मुख्य शिवलिंग पर धारण कराया जाएगा।