आने वाले समय में वैश्विक आपदा का रूप ले सकता है मानसिक स्वास्थ्य, आगरा में हुए अंतर्राष्ट्रीय संवाद में अमेरिका के डॉ. आर्थर सी. इवांस ने बजाया खतरे का अलार्म
मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक शिक्षा को लेकर आगरा रविवार को वैश्विक विमर्श का केंद्र बनकर उभरा, जब फीलिंग माइंड्स संस्था के कार्यालय पर अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञों का उच्चस्तरीय संवाद आयोजित हुआ। इस मंच से स्पष्ट चेतावनी दी गई कि यदि मानसिक स्वास्थ्य की संवेदनशीलता को समय रहते नहीं समझा गया, तो यह आने वाले समय में एक वैश्विक त्रासदी का रूप ले सकती है।
आगरा। विमल विहार, सिकंदरा–बोदला रोड स्थित फीलिंग माइंड्स संस्था के कार्यालय पर आयोजित विशेष अंतरराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक संवाद सत्र में विश्वप्रसिद्ध विशेषज्ञों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े समकालीन, व्यवहारिक और नीतिगत पहलुओं पर गहन मंथन किया। इस संवाद ने आगरा को मानसिक स्वास्थ्य के वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाई।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. आर्थर सी. इवांस, वाइस प्रेसिडेंट एवं सीईओ, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन तथा विश्वविख्यात फिलाडेल्फिया मॉडल के निर्माता उपस्थित रहे। उनके साथ डॉ. एन वर्नन, पूर्व अध्यक्ष, अल्बर्ट एलिस इंस्टीट्यूट, न्यूयॉर्क (अमेरिका) और डॉ. रेनर कुर्ज़, मुख्य मनोवैज्ञानिक, हुकामा एनालिटिक्स लिमिटेड, लंदन ने भी अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए फीलिंग माइंड्स संस्था की संस्थापक एवं आईएसएमएचएए की अध्यक्ष डॉ. चीनू अग्रवाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य किसी एक देश या समाज का विषय नहीं, बल्कि एक वैश्विक मानवीय सरोकार है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब तक नीति निर्माता, मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर, शिक्षक, चिकित्सक, अभिभावक और समुदाय मिलकर साझा जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक इन चुनौतियों का स्थायी समाधान संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि फीलिंग माइंड्स और आईएसएमएचएए जैसे मंच नीति, शोध और व्यवहार को एक साथ लाकर ठोस कार्यवाही का आधार तैयार कर रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य बना तो वैश्विक आपदा: डॉ. आर्थर सी. इवांस
कार्यक्रम का केंद्रीय आकर्षण डॉ. आर्थर सी. इवांस और डॉ. चीनू अग्रवाल के बीच हुआ विशेष संवाद रहा। इस दौरान वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों, भावनात्मक शिक्षा की भूमिका, नीति और व्यवहार के बीच की खाई तथा समाज में मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने के दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
डॉ. इवांस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि दुनिया ने समय रहते मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता नहीं दी, तो यह आने वाले समय में एक वैश्विक आपदा का रूप ले सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य सामाजिक उत्तरदायित्व
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मेयर हेमलता दिवाकर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य हर वर्ग से जुड़ा विषय है। जब समाज मानसिक रूप से स्वस्थ होगा, तभी वास्तविक विकास और खुशहाली संभव है।
चमड़ा एवं फुटवियर उद्योग परिषद के अध्यक्ष पूरन डावर ने कहा कि यह विडंबना है कि जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को मानव प्रगति का माध्यम माना गया, वही पश्चिमी देशों में अवसाद का कारण बन रहा है।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य अब केवल चिकित्सा का विषय नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक उत्तरदायित्व और नीति निर्धारण का आधार बन चुका है।
इस अवसर पर पर्यावरणविद एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता केसी तथा सेंट जॉन्स कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. एसपी सिंह ने भी अपने विचार रखे।
दिल्ली में होगी तीन दिवसीय ग्लोबल मेंटल हेल्थ पॉलिसी समिट–2026
कार्यक्रम में आईएसएमएचएए के कोषाध्यक्ष डॉ. रविंद्र अग्रवाल ने ग्लोबल मेंटल हेल्थ पॉलिसी समिट–2026 की जानकारी साझा की और डिजिटल पोस्टर का विमोचन किया।
उन्होंने बताया कि यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन 6, 7 और 8 जनवरी 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित होगा। समिट की थीम “ब्रिजिंग पॉलिसी एंड प्रैक्टिस – लेट एक्शन स्पीक” रखी गई है।
इस समिट में नीति निर्माता, शोधकर्ता, शिक्षाविद, चिकित्सक, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता राउंड टेबल चर्चा, अकादमिक सत्र, कीनोट व्याख्यान, पोस्टर और केस स्टडी प्रस्तुतियों के माध्यम से ठोस और मापनीय समाधान प्रस्तुत करेंगे।