बरेली में बीती रात के कहर से अभी भी जनजीवन अस्त-व्यस्त, 20 घंटे बाद भी बिजली व्यवस्था बेपटरी, एक युवक की मौत की जानकारी भी सामने आई, यूनिवर्सिटी कैंपस में 200 से अधिक पेड़ धराशायी, कई लोग घायल
-आरके सिंह- बरेली। बुधवार रात बरेली में आई विनाशकारी आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश के बाद अब नुकसान की भयावह तस्वीरें लगातार सामने आ रही हैं। 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने जिले में व्यापक तबाही मचाई है। इस आपदा में घर के आंगन में सो रहे एक युवक की आंधी में उड़कर आए सोलर पैनल की चपेट में आने से मौत हो गई, जबकि अलग-अलग घटनाओं में 13 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हजारों पेड़, बिजली के खंभे और यूनिपोल धराशायी हो गए हैं, जिससे जिले की बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और 20 घंटे बाद भी कई क्षेत्रों में बिजली बहाल नहीं हो सकी है।
आंगन में सो रहे युवक पर गिरा सोलर पैनल, मौत
थाना कैंट क्षेत्र के नकटिया निवासी केरी सिंह (25) पुत्र रामपाल बुधवार रात अपने घर के आंगन में सो रहे थे। इसी दौरान तेज आंधी में पड़ोसी मकान की छत पर लगा सोलर पैनल उड़कर उनके ऊपर आ गिरा। गंभीर रूप से घायल केरी सिंह को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान गुरुवार को उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस अधीक्षक नगर मानुष पारीक ने बताया कि शव का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इसी घटना में पड़ोस की सविता (17) पुत्री मैकूलाल भी घायल हुई हैं। उनके पैर में फ्रैक्चर होने के कारण उपचार जारी है।
संत मनी आश्रम में गिरा पीपल का पेड़
तूफान की दूसरी बड़ी घटना थाना कैंट क्षेत्र स्थित संत मनी आश्रम में हुई, जहां तेज हवाओं के कारण एक पुराना पीपल का विशाल पेड़ गिर पड़ा। पेड़ की चपेट में आकर चार लोग घायल हो गए।
घायलों में हरीश (26) निवासी मोहनपुर के हाथ में फ्रैक्चर आया है, जबकि रवि (30) के सिर और कमर में गंभीर चोटें आई हैं। पप्पू उर्फ मोंटी (75) के सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनका उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है। वहीं रामभरी (50) को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
तेज आंधी के दौरान एक ऑटो पर भी पेड़ गिर गया, जिससे उसमें सवार एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
रोहिलखंड विश्वविद्यालय में अभूतपूर्व नुकसान
आंधी-तूफान ने महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय परिसर को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। परिसर में 200 से अधिक छोटे-बड़े पेड़ जड़ से उखड़ गए, जबकि विद्युत लाइनों का पूरा नेटवर्क ध्वस्त हो गया।
विश्वविद्यालय के सुरक्षा अधिकारी सुधांशु शर्मा ने बताया कि पिछले 20 वर्षों में विश्वविद्यालय परिसर में आंधी से इतना बड़ा नुकसान कभी नहीं हुआ था।
शहर में ब्लैकआउट जैसे हालात
तूफान के बाद पूरे बरेली शहर में बिजली आपूर्ति ठप हो गई। जगह-जगह पेड़ और बिजली के खंभे तारों पर गिरने से विद्युत व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। बुधवार रात से शुरू हुआ बिजली संकट गुरुवार देर शाम तक भी पूरी तरह दूर नहीं हो सका, जिससे शहर के कई हिस्सों में ब्लैकआउट जैसे हालात बने रहे।
बिजली विभाग युद्धस्तर पर जुटा
मुख्य अभियंता, बरेली जोन प्रथम ज्ञान प्रकाश ने बताया कि 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं के कारण बड़ी संख्या में पेड़ विद्युत लाइनों पर गिर गए हैं, जिससे बिजली के तारों और खंभों को गंभीर क्षति पहुंची है।
उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त नेटवर्क को दुरुस्त करने का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है, लेकिन आपूर्ति पूरी तरह सामान्य होने में अभी और समय लग सकता है। विभाग के सभी अधिकारी और कर्मचारी लगातार मरम्मत कार्य में जुटे हुए हैं।
प्रशासन के सामने चुनौती
आंधी के बाद अब प्रशासन के सामने जनजीवन को सामान्य बनाने की बड़ी चुनौती है। बिजली, यातायात और संचार व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए विभिन्न विभागों की टीमें लगातार राहत और बहाली कार्य में जुटी हुई हैं।