तमस में रश्मियों की चमक: डॉ. रमा ‘रश्मि’ की कृतियों के लोकार्पण में गूंजा नारी शक्ति का स्वर, विचारों ने झकझोरा समाज
आगरा। ताजनगरी के शैक्षणिक और साहित्यिक परिवेश में शनिवार को एक सशक्त और विचारोत्तेजक आयोजन का साक्षी बना डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय का जुबली हॉल, जहां डॉ. रमा ‘रश्मि’ की दो महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर साहित्य, शिक्षा और समाज के अनेक दिग्गजों की उपस्थिति में नारी विमर्श, संवेदनाओं और सामाजिक चेतना पर गहन चर्चा हुई।
कन्हैया लाल माणिक लाल मुंशी हिंदी एवं भाषा विज्ञान विद्यापीठ (केएमआई) और साहित्य साधिका समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के प्रमुख साहित्यकार, शिक्षाविद और सामाजिक हस्तियां बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
साहित्य साधना और सम्मान का संगम
साहित्य संगीत संगम संस्था द्वारा श्री श्यामलाल वर्मा गद्य साधना सम्मान 2026 के लिए चयनित डॉ. रमा ‘रश्मि’ की गद्य कृति ‘नारी विमर्श और प्रभा खेतान’ तथा काव्य कृति ‘धूप और चांद’ का संयुक्त लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम ने नारी विमर्श, सामाजिक चेतना और साहित्यिक अभिव्यक्ति को एक मंच पर लाकर जीवंत संवाद का वातावरण बनाया।
मुख्य अतिथि का स्पष्ट संदेश- स्वतंत्रता बनाम स्वच्छंदता
मुख्य अतिथि बेबी रानी मौर्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि रमा ‘रश्मि’ का साहित्य आज की बेटियों को सही दिशा देगा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता का मतलब स्वच्छंदता नहीं है। माता-पिता को धोखा देना उचित नहीं है, उनके विश्वास को बनाए रखना ही सच्ची स्वतंत्रता है। उन्होंने यह भी कहा कि नारी अपने पिता के आशीर्वाद और पति के सहयोग से हर ऊंचाई को छू सकती है।
कुलपति का नारी शक्ति पर प्रखर वक्तव्य
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्रो. आशु रानी ने कहा कि केएमआई एक ऊर्जावान और सृजनशील संस्थान है, जहां हर शिक्षक की अपनी विशिष्ट पहचान है। नारी विमर्श पर उन्होंने कहा कि नारी और पुरुष में शारीरिक अंतर जरूर है, लेकिन संवेदना, सृजन, चेतना, शक्ति और साहस में कोई अंतर नहीं है। इसका जीवंत उदाहरण रमा ‘रश्मि’ हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में पुरुषों से कहा कि यदि ईश्वर में विश्वास न हो, तो कम से कम पत्नी को परमेश्वर मानना चाहिए।
विशिष्ट अतिथियों ने सराहा रचना कर्म
विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रदीप श्रीधर ने कहा कि डॉ. रमा ‘रश्मि’ की कविताएं समकालीन समाज का सटीक दर्पण हैं, जो वर्तमान जीवन की वास्तविकताओं को उजागर करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सीमा समृद्धि, जो निर्भया कांड की पीड़िताओं के लिए निःशुल्क लड़ाई लड़ चुकी हैं, ने कहा कि स्त्री विमर्श दरअसल मानवता के अधिकारों की लड़ाई है। इतिहास नहीं बदला जा सकता, लेकिन वर्तमान को बेहतर बनाया जा सकता है। आज की स्त्री अपनी सोच को गिरवी नहीं रखती, वह वही करती है जो करना चाहती है।
समीक्षकों ने दी उच्च कोटि की साहित्यिक मान्यता
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. नीलम भटनागर ने ‘नारी विमर्श और प्रभा खेतान’ को हिंदी साहित्य में एक महत्वपूर्ण और स्थायी योगदान बताया। उन्होंने कहा कि नारी सशक्तिकरण के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता अत्यंत आवश्यक है और रमा ‘रश्मि’ इसका सशक्त उदाहरण हैं।
डॉ. अनिल उपाध्याय ने कहा कि यदि प्रभा खेतान का साहित्य नारी विमर्श की गीता है, तो रमा ‘रश्मि’ की यह पुस्तक उस गीता पर लिखा गया उत्कृष्ट और प्रामाणिक भाष्य है।
काव्य कृति ‘धूप और चांद’ पर समीक्षक डॉ. आरएस तिवारी ‘शिखरेश’ ने इसे यथार्थवाद, आशावाद और मानवीय संवेदनाओं की त्रिवेणी बताया।
साहित्य साधिका समिति की संस्थापक, वरिष्ठ साहित्यकार और आरबीएस कॉलेज की पूर्व प्राचार्य डॉ. सुषमा सिंह ने भी रमा 'रश्मि' की रचना धर्मिता को सराहा।
लेखिका की भावनात्मक अभिव्यक्ति
डॉ. रमा ‘रश्मि’ ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा- तमस के वातावरण में अपनी रश्मियाँ बिखेरती हूं, साहित्य को समर्पित हो सत्य को साधती हूं।
उन्होंने कहा कि उनकी कविताएं उनके हृदय के छोटे-छोटे अंश हैं, जो शब्दों के माध्यम से अभिव्यक्त होते हैं। अपनी गद्य कृति पर उन्होंने कहा कि प्रभा खेतान का साहित्य नारी विमर्श को समझने का सर्वोत्तम माध्यम है।
कविता पाठ और सांस्कृतिक प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम में रीता शर्मा, नूतन अग्रवाल, ममता भारती, अलका अग्रवाल, डॉ. मंजू स्वाति, संगीता अग्रवाल और राकेश निर्मल ने रमा ‘रश्मि’ की कविताओं का भावपूर्ण पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. राजेंद्र दवे द्वारा स्वस्ति वाचन से हुई, जबकि ललिता कर्मचंदानी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। संचालन श्रुति सिन्हा ने किया और साहित्य साधिका समिति की सचिव डॉ. यशोधरा यादव ने आभार व्यक्त किया।
परिवार और गणमान्य लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम में रमा ‘रश्मि’ के परिवार से श्री रूप किशोर वर्मा, भूपेंद्र सिंह, भानेंद्र सिंह, मनोज कुमार, श्रीमती रीना, राजेश कुमार, रोहित कुमार, रेखा और नमस्या उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त शहर के अनेक प्रतिष्ठित साहित्यकार और शिक्षाविद जैसे बाँकेलाल गौड़, प्रो. शिखा श्रीधर, रमेश पंडित, डॉ. राजेंद्र मिलन, राज बहादुर राज, नीरज जैन, शीलेंद्र वशिष्ठ, कुमार ललित, डॉ. ब्रज बिहारी लाल बिरजू, जितेंद्र फौजदार, डॉ. शेषपाल सिंह, मीरा परिहार, रवींद्र वर्मा, अलका चौधरी, साधना वैद, डॉ. केशव शर्मा, रामेंद्र शर्मा ‘रवि’, दुर्ग विजय सिंह दीप, डॉ. युवराज सिंह, आनंद राय, नंद नंदन गर्ग, रितु गोयल, हिमानी चतुर्वेदी, अदिति कात्यायन, प्रकाश गुप्ता ‘बेबाक’, मानसिंह मनहर, दीपक श्रीवास्तव, पुष्कल गुप्ता, प्रभुदत्त उपाध्याय, मंजू यादव (ग्रामीण) सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।