संत रविदास ने समाज को मनुष्य की पहचान उसके आचरण, कर्म और संस्कार से होने की दिशा दी

आगरा। समरसता, समानता और सनातन चेतना के प्रखर संदेश के साथ विश्व हिंदू महासंघ, आगरा द्वारा संत शिरोमणि गुरु रविदास जन्मोत्सव समारोह एवं हिंदू सम्मेलन का आयोजन आवास विकास कॉलोनी स्थित एक रेस्टोरेंट में वैचारिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ संत रविदास जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

Feb 2, 2026 - 19:09
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संत रविदास ने समाज को मनुष्य की पहचान उसके आचरण, कर्म और संस्कार से होने की दिशा दी
आवास विकास स्थित एक रेस्टोरेंट में विश्व हिंदू महासंघ द्वारा आयोजित संत रविदास जयंती समारोह एवं हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते मुख्य वक्ता शरद परमार। मंच पर आसीन हैं अंकित उपाध्याय, सौरभ तिवारी, अश्वनी शर्मा, राजेश शर्मा, गजेंद्र शर्मा, किशन गुप्ता व अन्य।

मुख्य वक्ता शरद परमार ने अपने संबोधन में कहा कि कर्म, संस्कार और सनातन चेतना ही भारत की आत्मा हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संत रविदास जी ने जाति नहीं, कर्म को श्रेष्ठ माना और समाज को यह दिशा दी कि मनुष्य की पहचान उसके आचरण, कर्म और संस्कार से होती है।
उन्होंने कहा कि भारत ने सैकड़ों वर्षों की पराधीनता झेली, जिसके मूल में जातिवाद की सामाजिक कमजोरी रही। संत रविदास जैसे महापुरुषों ने इस विभाजन को तोड़कर समरस समाज का मार्ग दिखाया।

शरद परमार ने हिंदू समाज से अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करने का आह्वान करते हुए कहा कि जब भी अपने बच्चों को घर से बाहर भेजें, उनके मस्तक पर तिलक अवश्य लगाएं, क्योंकि तिलक सनातन संस्कार, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। सौरभ तिवारी ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने जीवन और वाणी से समाज को जोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया। महानगर अध्यक्ष किशन गुप्ता ने कहा कि संत रविदास का जीवन सनातन संस्कृति की व्यापक और समावेशी सोच का जीवंत उदाहरण है।

कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता एवं प्रदेश अध्यक्ष मातृशक्ति गंगा धाकड़ ने भी विचार व्यक्त किए। अंकित उपाध्याय, अश्वनी शर्मा, राजेश शर्मा, गजेंद्र शर्मा, शरद प्रजापति, देव ठाकुर, मीनू अग्रवाल, पूनम पचौरी, डिंपल गंभीर, राजीव गुप्ता, रोहित गर्ग, सौरभ अग्रवाल, राहुल गुप्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

SP_Singh AURGURU Editor