सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, बार काउंसिल चुनावों की समितियों के रिटायर्ड जजों को मानदेय क्यों नहीं, बार काउंसिल से मांगा जवाब
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने राज्य बार काउंसिल के चुनावों से संबंधित एक मामले में अहम सुनवाई की। उन्होंने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को बुधवार तक अपना रुख स्पष्ट साफ करने के निर्देश भी दिए।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया से सवाल किया कि वह राज्य बार काउंसिल चुनावों के संचालन की निगरानी करने वाली उच्च स्तरीय चुनाव समितियों के सदस्य हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीशों को पर्याप्त मानदेय और यात्रा भत्ता क्यों नहीं दे रही है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI ) सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने उच्च स्तरीय चुनाव पर्यवेक्षण समिति के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता वी गिरि द्वारा मौखिक रूप से उल्लेख किए जाने पर इस मामले पर सुनवाई की।
लाइव लॉ की एक स्टोरी के अनुसार, एडवोकेट गिरि ने निवेदन किया कि मानदेय चुनाव समिति के सदस्यों के पद के अनुरूप होना चाहिए, जो पूर्व में हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश रह चुके हैं। गिरि ने कहा-जब यह सुझाव बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को दिया गया, तो हमें जवाब मिला कि यह बहुत अधिक है और उनके लिए ऐसा करना संभव नहीं होगा। गिरि ने अनुरोध किया कि या तो न्यायालय कोई आदेश पारित करे या न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुधांशु धूलिया को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अधिकृत करे। उन्होंने BCI द्वारा न्यायमूर्ति धूलिया को दिए गए जवाब को पीठ को सौंप दिया।
गिरि ने यह भी मुद्दा उठाया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने राजस्थान बार काउंसिल चुनावों के लिए अपनी अलग समिति का गठन इस बहाने से किया है कि 18 नवंबर, 2024 को पारित आदेश में राजस्थान का उल्लेख नहीं था, जिसके तहत समितियों का गठन किया गया था। गिरि ने कहा कि बीसीआई की यह कार्रवाई आदेश के शाब्दिक और भावना दोनों के विपरीत है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बीसीआई का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील से पूछा-आपने राजस्थान को क्यों शामिल नहीं किया और आप अलग से समिति का गठन क्यों कर रहे हैं?" गिरि ने बताया कि इस समिति ने चुनावों की अधिसूचना भी जारी कर दी है।
CJI सूर्यकांत की पीठ ने बीसीआई को बुधवार तक इन दोनों मुद्दों पर जवाब देने को कहा। आदेश में बीसीआई को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया कि उसने अदालत को सूचित किए बिना राजस्थान बार काउंसिल चुनावों के लिए एक अलग समिति का गठन क्यों किया। मुख्य न्यायाधीश कांत ने बीसीआई द्वारा समिति के सदस्यों को भत्ते न देने पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा-आपने चुनाव शुल्क इस आधार पर तय किया था कि इससे चुनाव कराने के लिए पर्याप्त धनराशि जुटाई जा सकेगी। अब आप रिटायर्ड जजों से कह रहे हैं कि आप उन्हें मानदेय नहीं दे सकते, आप यात्रा भत्ता नहीं दे सकते। वे क्या करेंगे? क्या उनके पास अपने विमान हैं?
गिरि ने बताया कि समिति के सदस्य के रूप में नियुक्त एक न्यायाधीश ने कहा कि सभी बुकिंग न्यायाधीशों को स्वयं ही करनी होंगी। जब वे वहां पहुंचते हैं, तो उन्हें जो सुविधाएं दी जाती हैं, वे पूर्व मुख्य न्यायाधीश के अनुरूप नहीं होतीं, यह बहुत कठिन है। बुकिंग का खर्च उन्हें अपनी जेब से देना पड़ता है। यह सही नहीं है। वहीं, बीसीआई के वकील ने बताया कि उन्होंने भुगतान का प्रस्ताव देते हुए एक हलफनामा दाखिल किया है। गिरि ने कहा कि बीसीआई ने प्रतिपूर्ति का प्रस्ताव दिया है, जिसमें काफी समय लगेगा। पीठ ने बीसीआई को कल तक जवाब देने को कहा और उसे चेतावनी दी कि वह न्यायालय से आदेश न दिलवाएं।