शब्दों का महाकुंभ बना ताज साहित्य उत्सव, कविता-शायरी में धड़कता रहा समाज और संवेदना का सच
आगरा। ताज साहित्य उत्सव के अंतर्गत रविवार को विभिन्न सत्रों में जब प्रशासन, सृजन, व्यंग्य, प्रेम, देशभक्ति और शायरी के स्वर मंच पर उतरे, तो यह आयोजन केवल साहित्यिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि समाज, समय और संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज बन गया। देश-विदेश से आए रचनाकारों, प्रशासनिक अधिकारियों, कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बदलते सामाजिक मूल्यों, प्रेम-विरह, बाजारवाद, अस्मिता, राष्ट्रबोध और मानवीय सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
कमल के पथः सृजन से प्रशासन तक सत्र
इस सत्र में प्रशासनिक दायित्व निभाने वाले अधिकारियों ने अपनी लेखनी से रचनात्मक संसार का परिचय दिया। टीवी एंकर व पत्रकार पियूष पांडे के संचालन में कार्यक्रम ने गंभीर प्रश्नों और संवेदनशील संवादों के साथ दर्शकों को बांधे रखा।
प्रशासनिक अधिकारी महेश श्रीवास्तव ने सामाजिक कटुता पर चोट करते हुए नफरतों को त्यागने का संदेश दिया। सहायक नगर आयुक्त राकेश त्यागी ने स्मृतियों और समय के रिश्ते को शब्दों में पिरोया। लोकसभा के संयुक्त निदेशक रणविजय ने वर्तमान समय में ईमान और अस्मिता की चुनौती को रेखांकित किया।
केन्द्रीय हिन्दी संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील बाबूराव कुलकर्णी ने वैश्वीकरण और बाजारवाद पर तीखा व्यंग्य किया। राज्यसभा के संयुक्त निदेशक ने हरियाणवी रंग में रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं को गुदगुदाया। विधानसभा लखनऊ से आईं डॉ. सुफलता त्रिपाठी ने बेटियों के आत्मविश्वास और संस्कारों को स्वर दिया। असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी बीपी सिंह की रचना में आशा और सवेरा झलका।
कार्यक्रम में पवन आगरी ने पियूष पांडे से उनकी मनोज वाजपेयी पर लिखी पुस्तक पर संवाद भी किया। कार्यक्रम में जीडी गोयनका के चेयरमैन कान्ता प्रसाद अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
लेखनी के उभरते नक्षत्र सत्र
इस सत्र में देश के विभिन्न प्रांतों से आए कवियों ने मिट्टी की सौंधी खुशबू, मां की लोरी और गांव-शहर के द्वंद्व को मंच पर जीवंत कर दिया।
अमित शुक्ला, राम शब्द बेनू, राहुल सिंह शेष ने प्रेम, पीड़ा और सामाजिक यथार्थ को सशक्त अभिव्यक्ति दी। ऋतु चतुर्वेदी, देवेश दीक्षित देव सहित अन्य कवियों की रचनाओं ने टूटन, स्मृति और मानवीय भावनाओं को स्वर दिया। संचालन पवन आगरी ने किया।
वायरल मंच के साधक सत्र
इस सत्र में प्रेम, विरह, आक्रोश और आनंद की भावनाएं लहरों की तरह मंच से दर्शकों तक पहुंचीं। संचालन अवनीश त्रिपाठी ने व्यंग्यात्मक अंदाज में किया।
अमित शर्मा, शिखा सिंह रजिता, बबिता पांडे, सुनील साहेब, पंकज अभिराज, नीर गोरखपुरी, पूजा शुक्ला और शुभम की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को कभी गुदगुदाया तो कभी भावुक कर दिया।
इसी सत्र में जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के कक्षा 6 के छात्र अनुग्रह श्रीवास्तव की पुस्तक ‘बियॉन्ड द सिल्वर्ड ग्लास’ का विमोचन भी किया गया।
सितारे ज़मीन परः सृजन की सच्ची लड़ाई सत्र
इस सत्र में काव्य जगत के चमकते सितारों ने सामाजिक, राजनीतिक और राष्ट्रवादी चेतना को स्वर दिया।
नितिन मिश्रा, प्रीति अग्रवाल, विपिन माहिलाबादी, प्रिया श्रीवास्तव, शिखा सिंह (उरजिता), प्रीति त्रिपाठी और रोली तिवारी की रचनाओं ने मंच को भावनाओं से भर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अखिलेश मिश्रा ने सामाजिक-राजनीतिक विडंबनाओं पर तीखी कविता प्रस्तुत की। संचालन संयोजक पवन आगरी ने किया।
शायरी के सरताजः अदब की तहजीब सत्र
इस सत्र में मिस्र की प्रसिद्ध शायरा वला जमाल सहित देश के जाने-माने शायरों की महफिल सजी।
वला जमाल, मुमताज नसीम, राजवीर राज, रंजीता सिंह (फलक), निधि गुप्ता (कशिश), आलोक (अविरल) और आलोक यादव की शायरी ने प्रेम, वफा, जुदाई और इंसानी जज़्बातों को गहराई से उकेरा। शेर-नग्मों की यह महफिल देर तक दर्शकों के दिलों में उतरती रही।