दादाजी महाराज की तृतीय पुण्य तिथि पर हजूरी भवन में उमड़े देश-विदेश के सत्संगी, अर्पित की श्रद्धांजलि
आगरा। राधास्वामी मत के आदि केंद्र हजूरी भवन, पीपलमंडी में मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और स्मृति का विराट संगम देखने को मिला। हजूरी भवन के पूर्व आचार्य एवं राधास्वामी मत के पांचवें गुरु प्रो. अगम प्रसाद माथुर ‘दादाजी महाराज’ की तृतीय पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित सत्संग में देश-विदेश से आए हजारों सत्संगियों ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
दादाजी महाराज की समाधि को अत्यंत आकर्षक एवं दिव्य रूप से सजाया गया था। तड़के सुबह से ही समाधि के समक्ष मत्था टेकने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। वातावरण राधास्वामी के गूंजते जयकारों और भक्ति भाव से ओतप्रोत रहा।
सत्संग के दौरान विभिन्न आध्यात्मिक ग्रंथों से पाठ किए गए। भजनों की मधुर स्वर-लहरियों पर सत्संगी भाव-विभोर होकर झूम उठे। पूरे हजूरी भवन परिसर में आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का अनुपम दृश्य देखने को मिला।
सत्संग उपरांत भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लाखों सत्संगियों ने प्रसाद ग्रहण किया। अनुशासन, सेवा और समर्पण के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन राधास्वामी परंपरा की विराटता का जीवंत उदाहरण बना।
इतिहास, शिक्षा और अध्यात्म का अद्वितीय संगम
दादाजी महाराज का नाम देश के प्रमुख इतिहासकारों में आदर के साथ लिया जाता है। उनकी पुस्तकों के उद्धरण आज भी विभिन्न मंचों और शोध कार्यों में प्रयुक्त होते हैं।
धर्मगुरु, शिक्षाविद्, इतिहासवेत्ता, लेखक और साहित्यकार के रूप में उन्होंने विशिष्ट ख्याति अर्जित की। वे वर्ष 1982 से 1985 तथा 1988 से 1991 तक दो बार आगरा विश्वविद्यालय (अब डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय) के कुलपति रहे।
इसके अतिरिक्त वर्ष 1980 में उनके मार्गदर्शन में यादगार-ए-सुलह कुल का ऐतिहासिक आयोजन आगरा किला और फतेहपुर सीकरी में कराया गया, जिसे आज भी एक बेमिसाल सांस्कृतिक-ऐतिहासिक आयोजन के रूप में याद किया जाता है।
हजूरी भवन में सजी समाधियां
हजूरी भवन में राधास्वामी मत के महान आचार्यों हजूर महाराज, तृतीय आचार्य लालाजी महाराज, चतुर्थ आचार्य कुंवरजी जी महाराज और दादाजी महाराज की समाधियां स्थित हैं। पुण्य तिथि के अवसर पर इन सभी समाधियों को विशेष रूप से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक वैभव से आलोकित हो उठा।