महाराजा सूरजमल के आगरा विजय दिवस पर गूंजा काव्य का स्वर, कवियों ने किया शौर्य और स्वाभिमान का वंदन

संस्कार भारती, आगरा महानगर और डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में महाराजा सूरजमल द्वारा 12 जून 1761 को आगरा किला विजय की स्मृति में 16वीं ‘नमन काव्य गोष्ठी’ का आयोजन संस्कृति भवन, आगरा में किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महाराजा सूरजमल के शौर्य, स्वाभिमान और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को याद किया, वहीं कवियों और कवयित्रियों ने ओज, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक चेतना से ओतप्रोत रचनाओं का पाठ कर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

Jun 13, 2026 - 00:10
 0
महाराजा सूरजमल के आगरा विजय दिवस पर गूंजा काव्य का स्वर, कवियों ने किया शौर्य और स्वाभिमान का वंदन
महाराजा सूरजमल द्वारा 12 जून 1761 को आगरा किले पर विजय प्राप्त करने की ऐतिहासिक स्मृति को समर्पित ‘नमन काव्य गोष्ठी’ में काव्य पाठ करने वाले कवि।

आगरा। महाराजा सूरजमल द्वारा 12 जून 1761 को आगरा किले पर विजय प्राप्त करने की ऐतिहासिक स्मृति को समर्पित 16वीं ‘नमन काव्य गोष्ठी’ का आयोजन शुक्रवार को संस्कृति भवन, आगरा में किया गया। संस्कार भारती, आगरा महानगर एवं डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और इतिहास के संगम का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रो. लवकुश कुमार मिश्रा ने कहा कि महाराजा सूरजमल की आगरा विजय भारतीय स्वाभिमान, साहस और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक घटना का पुनर्स्मरण नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ने के साथ-साथ भारतीय दृष्टिकोण का सशक्त नैरेटिव स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्य अतिथि एवं पूर्व एसडीएम आचार्य यादराम सिंह ‘कविकिंकर’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आगरा किले में महाराजा सूरजमल के गौरवगान की व्यवस्था कराया जाना भारतीय स्वाभिमान के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास इतिहास के उन स्वर्णिम अध्यायों को जनमानस तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं, जिन्हें लंबे समय तक अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो. लवकुश कुमार मिश्रा, आचार्य यादराम सिंह कविकिंकर, वरिष्ठ कवि अशोक गोयल, अध्यक्ष आर्किटेक्ट राजीव द्विवेदी, प्रांतीय संरक्षक हरिमोहन सिंह कोठिया तथा प्रांतीय महामंत्री नंद नंदन गर्ग द्वारा महाराजा सूरजमल के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।

ब्रजभाषा की वरिष्ठ कवयित्री मीना शर्मा ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महाराजा सूरजमल को समर्पित अपनी रचना प्रस्तुत की। इसके बाद मंच पर कवियों का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें राष्ट्रभक्ति, शौर्य, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों से ओतप्रोत कविताओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कवि राजीव क्वात्रा ‘आगरावासी’ ने वीरता और देशभक्ति से ओतप्रोत रचना सुनाकर युवाओं में राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। वहीं कवि प्रणव कुलश्रेष्ठ (टूंडला) ने महाराजा सूरजमल के निर्भीक और निष्कपट व्यक्तित्व का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वरिष्ठ कवि अशोक गोयल ने अपनी ओजपूर्ण कविता के माध्यम से देश के लिए बलिदान देने वाले युवाओं के साहस और समर्पण को रेखांकित किया। कवि संजय कुमार एडवोकेट ने महाराजा सूरजमल के पराक्रम और आगरा से उनके ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्हें महान योद्धा बताया।

डा. ब्रजविहारी लाल ‘बिरजू’ की हास्य-व्यंग्य मिश्रित प्रस्तुति ने श्रोताओं को खूब आनंदित किया, जबकि कवयित्री मोहिनी भटनागर ने राष्ट्र निर्माण और सामूहिक विकास का संदेश देती कविता प्रस्तुत की। डॉ. आभा सिंह गुप्ता ने जीवन में प्रेम, सकारात्मकता और आत्ममंथन का संदेश दिया, वहीं कवयित्री अलका अग्रवाल ने संघर्षों के बीच आत्मविश्वास और दृढ़ता की भावना को अपनी रचना में अभिव्यक्त किया।

काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार एवं प्रांतीय संरक्षक हरिमोहन सिंह कोठिया, अशोक गोयल, अलका शर्मा, अजय मिश्रा, प्रणव कुलश्रेष्ठ, आचार्य उमाशंकर पाराशर, चंद्रशेखर शर्मा ‘ग्रीनमैन’, मीना शर्मा, नूतन अग्रवाल ‘ज्योति’, मोहिनी भटनागर, डॉ. आभा, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. रुचि सिंघल, डॉ. शुभदा पाण्डेय, सुमन शर्मा, रश्मि सिंह, डॉ. दिनेश शर्मा, बृज बिहारी लाल ‘बिरजू’, हरिकांत शर्मा, राजीव क्वात्रा ‘आगरावासी’, रामअवतार शर्मा, रूपेश कुलश्रेष्ठ, विजया तिवारी, राकेश शर्मा और अलका अग्रवाल सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।

कार्यक्रम का संचालन अलका शर्मा एवं संजय कुमार एडवोकेट ने संयुक्त रूप से किया। संयोजन प्रभुदत्त उपाध्याय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महामंत्री ओम स्वरूप गर्ग ने व्यक्त किया। इस अवसर पर सतीश गुप्ता, महेश धाकड़, उमा गुप्ता, डॉ. रुचि सिंघल, मदन लाल अग्रवाल सहित अनेक साहित्य प्रेमी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने इतिहास, साहित्य और सांस्कृतिक चेतना के समन्वय का प्रभावशाली संदेश दिया।