शब्दों से रौशन हुआ मन: आगरा में ‘आलोकनामा’ ने सपनों की ओर मोड़ दिया हर सफ़र

आगरा। जब शब्द साधना बन जाएं और कहानी श्रोता की अपनी लगने लगे, तब मंच केवल प्रस्तुति स्थल नहीं रहता, वह संवेदनाओं का तीर्थ बन जाता है। ऐसा ही भावनात्मक और बौद्धिक दृश्य होटल हॉलीडे इन में देखने को मिला, जहां स्पाइसी शुगर संस्था के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध कवि एवं लेखक आलोक श्रीवास्तव ने अपने विशिष्ट कहानी-पाठ ‘आलोकनामा – सपनों का सफ़र’ के माध्यम से श्रोताओं को आत्मचिंतन, संघर्ष और सपनों की यात्रा पर ले गया।

Jan 28, 2026 - 20:35
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शब्दों से रौशन हुआ मन: आगरा में ‘आलोकनामा’ ने सपनों की ओर मोड़ दिया हर सफ़र
होटल हॉलीडे इन में बुधवार को स्पाइसी शुगर संस्था द्वारा आयोजित ‘आलोकनामा – सपनों का सफ़र’ कार्यक्रम में कहानी पाठ करते सुप्रसिद्ध लेखक आलोक श्रीवास्तव।

कार्यक्रम की शुरुआत आलोक श्रीवास्तव द्वारा रामलीला की पंक्तियां गुनगुनाने से हुई- रामलीला को गुनगुनाने चले…और यहीं से उन्होंने जीवन, आस्था और आत्मविश्वास की उस राह पर श्रोताओं को ले जाना शुरू किया, जहां हर मोड़ पर अनुभव, संघर्ष और सपनों की सच्चाई खड़ी थी।

कार्यक्रम में मौजूद शहर के गणमान्य लोग। 

आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि जीवन का सफ़र कई बार पेंगुइन की चाल जैसा डगमगाता है, लेकिन जो व्यक्ति सब कुछ छोड़कर अपने सपनों के पीछे चल पड़ता है, वही अंततः अपने मुकाम तक पहुँचता है। उन्होंने दो टूक कहा कि जैसा बनना चाहते हो, वैसा सोचो। क्योंकि जैसा सोचोगे, वैसे ही बन जाओगे। वक्त सब कुछ देखता है। ये शब्द श्रोताओं के भीतर देर तक गूंजते रहे।

इसके बाद उन्होंने ‘हीरामन’ की कथा सुनाई। एक ऐसे व्यक्ति की कहानी, जिसने ठान लिया था कि एक दिन दुनिया उसके लफ़्ज़ों से उजाला लेगी। उन्होंने कहा कि कहानी कहना कला हो सकती है, लेकिन कहानी को सुन पाना असली कला है। हीरामन की कहानी इतनी आत्मीय थी कि सभागार में मौजूद हर व्यक्ति स्वयं को उसमें देखने लगा।

लगभग 90 मिनट की इस कथात्मक यात्रा में आलोक श्रीवास्तव ने शब्दों के माध्यम से श्रोताओं को भीतर तक झकझोर दिया।
उन्होंने कहा, सपने वो नहीं होते जो खुली आंखों से देखे जाएं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने न दें। संघर्ष की कहानी तभी सुनी जाती है जब आप सफल हो जाते हैं।
इन पंक्तियों के साथ पूरा सभागार एक गहरे मौन में डूब गया। यह आत्मसंवाद का मौन था।

स्पाइसी शुगर संस्था की संस्थापक अध्यक्ष पूनम सचदेवा ने कहा कि
“आलोकनामा केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भावनाओं और आत्मबोध की यात्रा है। आलोक श्रीवास्तव शब्दों के सधे हुए मुसाफ़िर हैं, जिनकी रचनाएं मंच से उतरकर सीधे दिल में उतरती हैं। उन्होंने कहा कि प्रेम, स्त्री-सम्मान, रिश्तों की जटिलता और सामाजिक संवेदना उनकी रचनाओं की पहचान है।

देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर सराही गई प्रस्तुतियां, काव्य-संकलन और डिजिटल मंचों पर अपार लोकप्रियता उन्हें समकालीन हिंदी साहित्य का प्रभावशाली हस्ताक्षर बनाती हैं।

आलोक श्रीवास्तव का सम्मान

कार्यक्रम के समापन पर स्पाइसी शुगर संस्था की ओर से आलोक श्रीवास्तव का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से हरविजय सिंह बाहिया, डॉ. अशोक विज, सुनीता विज, राजीव भूषण, डॉ. रंजना बंसल, डॉ. नीतू चौधरी, डॉ. रुचि चतुर्वेदी, पवन आगरी, रजत कपूर, दीपिका वासन, अजय शर्मा, लवली कथूरिया, विनीत खेड़ा, वेदपाल धार, डॉ. शर्मिला पंजवानी सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की व्यवस्थाएं चांदनी ग्रोवर, सिमरन अवतानी, शिखा जैन, पुष्पा, रेनू, गरिमा, रिंपी जैन, पूजा आदि ने संभालीं।

SP_Singh AURGURU Editor