योगी सरकार का नशा माफिया पर करारा प्रहार, कोडीन सिरप नेटवर्क ध्वस्त, 52 जिलों में 161 एफआईआर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करने के लिए तीन महीने पहले शुरू किए गए विशेष अभियान में अब चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने राज्य के 52 जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाते हुए 161 फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जबकि पुलिस और एसटीएफ अब तक 85 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।

Dec 29, 2025 - 18:58
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योगी सरकार का नशा माफिया पर करारा प्रहार, कोडीन सिरप नेटवर्क ध्वस्त, 52 जिलों में 161 एफआईआर
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तीन महीने के विशेष अभियान में एफएसडीए, पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई, करोड़ों बोतलों का अवैध खेल उजागर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में नशे के कारोबार के खिलाफ योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करने के लिए तीन महीने पहले शुरू किए गए विशेष अभियान में अब चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने राज्य के 52 जिलों में व्यापक जांच अभियान चलाते हुए 161 फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जबकि पुलिस और एसटीएफ अब तक 85 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देश दिए थे कि एनडीपीएस श्रेणी की दवाओं के अवैध भंडारण, खरीद–फरोख्त और डायवर्जन को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में एफएसडीए की टीमें उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि झारखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों तक फैले नेटवर्क के सबूत जुटाए गए।

फार्मा कंपनियों से सुपर स्टॉकिस्ट तक पहुंची जांच

जांच में खुलासा हुआ कि दिल्ली और रांची के सुपर स्टॉकिस्टों के माध्यम से थोक विक्रेताओं की एक समानान्तर सप्लाई चेन खड़ी की गई थी। हैरानी की बात यह रही कि इस नेटवर्क से जुड़ी अधिकांश फर्में यह तक साबित नहीं कर सकीं कि दवाएं वास्तविक रिटेल मेडिकल स्टोर को बेची गईं। एफएसडीए की टीम ने केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, ग्वालियर से कोडीन फॉस्फेट के कोटा और उठान के रिकॉर्ड भी खंगाले, जिससे अवैध आपूर्ति की परतें एक-एक कर खुलती चली गईं।

करोड़ों बोतलों का संदिग्ध प्रवाह

जांच में यह सामने आया कि राज्य में बिना प्रमाणित चिकित्सीय उपयोग के भारी मात्रा में कफ सिरप की सप्लाई की गई, जिनमें प्रमुख रूप से 2.23 करोड़ से अधिक बोतलें फेन्सिडिल (ऐबोट), 73 लाख से अधिक बोतलें एस्कॉफ (लैबोरेट फार्मा) करीब 25 लाख बोतलें अन्य कंपनियों की, इन सभी को लेकर यह आशंका प्रबल है कि इन्हें नशे के लिए डायवर्ट किया गया।

गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती की तैयारी

एफएसडीए ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर नशे से अर्जित संपत्तियों की पहचान और जब्ती की प्रक्रिया तेज करने को कहा है। संकेत हैं कि कई मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया जाएगा। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामलों को सही ठहराते हुए आरोपियों की याचिकाएं खारिज कर सरकार के सख्त रुख पर मुहर लगा दी है।

लाइसेंसिंग सिस्टम होगा और सख्त

सरकार अब थोक औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं कड़ा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क पर तैयार SIT की विस्तृत रिपोर्ट अगले महीने तक मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर और बड़े प्रशासनिक व कानूनी फैसले संभव हैं।