15 महीने की शादी, नौ माह की गर्भवती पत्नी की संदिग्ध मौत और दहेज की क्रूर कहानी: बरेली अदालत ने पति को ठहराया दोषी, सुनाई आजीवन कारावास की सजा
-रमेश कुमार सिंह- बरेली। शादी के महज़ 15 महीने बाद गर्भवती युवती की दहेज के लिए हत्या के मामले में बरेली की अदालत ने सख्त फैसला सुनाते हुए पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश कुमारी आफशां ने शनिवार को दहेज हत्या के दोषी गोविंद सिंह (26) को उम्रकैद और 35 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया, जबकि साक्ष्यों के अभाव में मृतका के सास-ससुर को बरी कर दिया गया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि दोषी द्वारा जेल में बिताया गया समय सजा में समायोजित किया जाएगा।
शादी के 15 महीने बाद उजड़ गई जिंदगी
अभियोजन के अनुसार घटना 14 अगस्त 2020 की है। थाना सुभाष नगर क्षेत्र निवासी वीरपाल ने अपनी बेटी पूनम यादव (22) की दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए दामाद गोविंद सिंह, उसके पिता जसवीर सिंह और मां द्रोपदी देवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी, 498-ए तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत दर्ज किया गया।
वीरपाल ने पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी बेटी पूनम की शादी 20 अप्रैल 2019 को थाना सुभाष नगर क्षेत्र के मढीनाथ निवासी गोविंद सिंह से की थी। शादी में करीब 12 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद से दहेज की मांग को लेकर बेटी के साथ मारपीट और प्रताड़ना शुरू हो गई थी।
फोन कॉल पर आई बेटी की मौत की खबर
वीरपाल के अनुसार 14 अगस्त 2020 को दोपहर करीब 12:40 बजे रिकू नामक व्यक्ति का फोन आया और उसने बताया कि उनकी बेटी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। इससे पहले कि वह कुछ पूछ पाते, फोन कट गया। घबराए परिजन तुरंत पूनम की ससुराल पहुंचे, जहां वह साड़ी के फंदे से पंखे पर लटकी हुई मिली, जबकि उसके पैर जमीन को छू रहे थे।
परिजनों ने आरोप लगाया कि ससुरालियों ने पूनम की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप देने के लिए फंदे से लटका दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह भी पुष्टि हुई कि पूनम नौ माह की गर्भवती थी।
भाई के जन्मदिन से चार दिन पहले मायके आई थी पूनम
मायके पक्ष ने बताया कि घटना से चार दिन पहले पूनम अपने भाई के जन्मदिन पर मायके आई थी। पहले ससुराल वालों ने उसे भेजने से इनकार किया, लेकिन अधिक आग्रह पर उसे भेजा गया और अगले ही दिन वापस बुला लिया गया। उसी दौरान पूनम ने अपनी मां को बताया था कि उसका पति गोविंद शादी के दो महीने बाद से ही दहेज के लिए मारपीट करता है और उस पर शक भी करता है।
अदालत में पेश किए गये 10 गवाह
डीजीसी रीतराम राजपूत ने बताया कि अभियोजन पक्ष की ओर से उन्होंने और एडीजीसी सुनील पांडेय ने अदालत में 10 गवाह पेश किए। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पति गोविंद सिंह को दहेज मृत्यु का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
साथ ही अदालत ने यह भी माना कि मृतका के सास-ससुर के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए जसवीर सिंह और द्रोपदी देवी को दोषमुक्त कर दिया गया।
अदालत का यह फैसला दहेज के खिलाफ कड़ा संदेश है। एक गर्भवती महिला की मौत के इस मामले ने समाज में दहेज प्रथा की क्रूर सच्चाई को फिर उजागर कर दिया है।