400 करोड़ रुपये का बाईपास, फिर भी एनएच-19 पर ट्रकों का सैलाब: गैर-आगरा भारी वाहनों पर सख्त रोक न होने से सड़क सुरक्षा पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, सख्ती क्यों नहीं दिखा रहा प्रशासन?
आगरा। उत्तरी बाईपास के पूरी तरह सक्रिय होने और उस पर भारी यातायात के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 19 (एनएच-19) पर गैर-आगरा गंतव्य वाले भारी वाणिज्यिक वाहनों का दबाव कम नहीं हो पा रहा है। यह स्थिति न केवल ट्रैफिक प्रबंधन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि आम नागरिकों की सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बनती जा रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे केसी जैन एडवोकेट ने शुक्रवार की सायं 7:56 बजे किए गए प्रत्यक्ष निरीक्षण में यह स्पष्ट रूप से देखा कि बड़ी संख्या में ऐसे ट्रक एनएच-19 से गुजर रहे थे, जिनका गंतव्य आगरा नहीं था। जबकि 400 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित उत्तरी बाईपास का मूल उद्देश्य ही यही था कि शहर के भीतर से गुजरने वाले भारी वाहनों को बाहर किया जाए और एनएच-19 को स्थानीय एवं आवश्यक यातायात के लिए सुरक्षित बनाया जाए।
निरीक्षण के दौरान उत्तरी बाईपास के एक हिस्से पर मात्र 10 मिनट की गणना में 115 वाहन दर्ज किए गए। इस आधार पर अनुमानित यातायात लगभग 690 वाहन प्रति घंटा बैठता है, जो 24 घंटे में लगभग 16,560 वाहन (एक दिशा में) हो सकता है। दोनों दिशाओं का आंकलन किया जाए तो यह संख्या करीब 33,000 वाहन प्रतिदिन तक पहुंचती है। इससे स्पष्ट है कि बाईपास पर यातायात है, फिर भी एनएच-19 पर भारी ट्रकों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि पूर्ण ट्रैफिक डायवर्जन अभी लागू नहीं हो सका है।
वर्तमान स्थिति में एनएच-19 पर स्थानीय यातायात, स्कूल वाहन, एंबुलेंस, निजी कारें, दोपहिया वाहन और भारी ट्रक एक साथ चल रहे हैं। यह मिश्रित दबाव दुर्घटनाओं की आशंका को कई गुना बढ़ा देता है। सड़क दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं होतीं, बल्कि वे परिवारों की ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल देती हैं। इसलिए यह विषय केवल यातायात व्यवस्था का नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
यह मुद्दा हाल ही में आयोजित जिला पर्यावरण समिति की बैठक में भी प्रमुखता से उठाया गया, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क सुरक्षा कार्यकर्ता के.सी. जैन ने जिलाधिकारी आगरा के समक्ष एनएच-19 पर गैर-आगरा गंतव्य वाले भारी वाहनों के दबाव का विषय रखा। जिलाधिकारी ने इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था। प्रशासन द्वारा अब तक किए गए आंशिक ट्रैफिक डायवर्जन के प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह बताती है कि ये प्रयास अभी पर्याप्त नहीं हैं।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका (सिविल) संख्या 13381/1984 में समय-समय पर दिए गए निर्देशों की भावना भी यही रही है कि गैर-आगरा गंतव्य वाले भारी वाणिज्यिक वाहनों को अनिवार्य रूप से बाईपास की ओर मोड़ा जाए। इसके लिए प्रवेश बिंदुओं पर सख्त प्रवर्तन, स्पष्ट संकेतक, निरंतर निगरानी और वैज्ञानिक ट्रैफिक ऑडिट की आवश्यकता है, ताकि एनएच-19 को वास्तव में स्थानीय और आवश्यक यातायात के लिए सुरक्षित बनाया जा सके।
अपने वक्तव्य में अधिवक्ता के.सी. जैन ने कहा कि 400 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि से बने उत्तरी बाईपास का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा, जब एनएच-19 पर गैर-आगरा गंतव्य वाले भारी वाहनों का दबाव प्रभावी रूप से समाप्त होगा। सड़क पर चलने वाला हर व्यक्ति सुरक्षित घर लौटने का अधिकार रखता है। अब आवश्यकता है कि ट्रैफिक डायवर्जन को कागज़ों तक सीमित न रखकर पूरी कठोरता के साथ धरातल पर लागू किया जाए।
Top of Form