आगरा में कोआपरेटिव गोदाम घोटाले पर डीएम का सख्त रुख: जांच रिपोर्ट न मिलने तक सात अफसरों की सैलरी रोकी
आगरा। सहकारी समितियों के गोदाम निर्माण में करोड़ों के कथित घोटाले पर आखिरकार प्रशासन हरकत में आ गया है। किसान नेताओं की शिकायत पर मंडलायुक्त स्तर से कड़ा संज्ञान लिए जाने के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बड़ा कदम उठाते हुए सात अधिकारियों के वेतन पर रोक लगा दी है। स्पष्ट आदेश दिया गया है कि जब तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की जाएगी, तब तक किसी भी अधिकारी को वेतन नहीं मिलेगा। 29 अप्रैल 2026 को जारी इस आदेश ने संबंधित विभागों में खलबली मचा दी है और लंबे समय से दबे मामले में नई हलचल पैदा कर दी है।
15 महीने तक दबाए रखी गई जांच
मामले की जड़ में 7 जनवरी 2025 को तत्कालीन जिलाधिकारी अरविंद मालपा बंगारी द्वारा 21 गोदामों की टीएसी जांच के दिए गए आदेश हैं। आरोप है कि पूरे 15 महीनों तक न तो जांच पूरी की गई और न ही कोई अधिकारी मौके पर निरीक्षण के लिए पहुंचा। इसी लापरवाही को लेकर किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने अपर आयुक्त से शिकायत की थी। अपर आयुक्त ने जिलाधिकारी को क्रार्रवाई के लिए लिखा था।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज
जिलाधिकारी द्वारा जिन अधिकारियों के वेतन पर रोक लगाई गई है, उनमें सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, अधिशाषी अभियंता प्रांतीय खंड लोक निर्माण विभाग आगरा, अधिशाषी अभियंता जल निगम ग्रामीण, सहायक अभियंता भवन लोक निर्माण विभाग, अधिशाषी अभियंता निर्माण खंड लोक निर्माण विभाग, अधिशाषी अभियंता सिंचाई विभाग और सहायक अभियंता पीएमजीएसवाई (आरईडी) आगरा शामिल हैं।
गोदाम बने ही नहीं, पैसा हजम
किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी शिकायत में कहा कि सहकारी समितियों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा करीब 4 करोड़ 12 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत में गोदाम बने ही नहीं। कुछ अधूरे पड़े हैं तो कुछ का काम ही शुरू नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से पूरा पैसा हड़प लिया गया।
फर्जी फर्म, फर्जी दस्तावेज, जांच में खुलासा
प्रशासनिक जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। तत्कालीन एसीएम द्वितीय और एसीएम चतुर्थ द्वारा की गई एक जांच रिपोर्ट के अनुसार जिस फर्म को ठेका दिया गया, वह पूरी तरह फर्जी पाई गई। फर्म के दस्तावेज, एफडीआर, आधार कार्ड तक नकली निकले। इतना ही नहीं, इस फर्जीवाड़े के आधार पर टेंडर जारी किया गया। इस मामले में अप्रैल 2025 में मुकदमा दर्ज किया गया था और आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया जा चुका है।
सुविधा शुल्क लेकर रोकी गई जांच
ताज सिटी आलू समिति के प्रदेश सचिव लक्ष्मी नारायण बघेल ने आरोप लगाया कि दबंग फर्म मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत किसी अधिकारी ने नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि टीएसी जांच टीम के अधिकारियों ने द्वारा जांच को निजी हितों के कारण जानबूझकर लटकाया गया।
आलू उत्पादक किसान नेता लाखन सिंह त्यागी ने दावा किया कि संबंधित फर्म के ठेकेदार ने लाखों रुपये सुविधा शुल्क के रूप में दिए, ताकि जांच को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि अब जब जांच आगे बढ़ेगी, तो कई बड़े नाम सामने आएंगे और पूरा खेल उजागर होगा।
दोषियों पर मुकदमे की मांग तेज
किसान नेताओं ने साफ कहा है कि सहकारी समितियों के गोदाम घोटाले में शामिल सभी दोषी अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त मुकदमा दर्ज होना चाहिए। उनका कहना है कि यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि किसानों के हक पर सीधा डाका है।