रामकथा की अमृतधारा में डूबा आगरा: कथा पंडालों में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, भक्ति-भाव और संस्कारों का संदेश

आगरा। शहर में इन दिनों श्रीराम कथा के विभिन्न आयोजनों में श्रद्धा और भक्ति की अविरल धारा बह रही है। कथा पंडालों में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों के माध्यम से मर्यादा, संस्कार और पारिवारिक मूल्यों का संदेश दिया जा रहा है। कहीं शिव और राम के अद्भुत संबंध का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति में सराबोर किया गया तो कहीं राम-सीता विवाह और शिव धनुष भंग के प्रसंगों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

Mar 15, 2026 - 21:57
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रामकथा की अमृतधारा में डूबा आगरा: कथा पंडालों में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, भक्ति-भाव और संस्कारों का संदेश
रोहता के पीएस गार्डन में राम कथा कहते कथाव्यास स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज। साथ हैं आयोजक।

चित्रकूट धाम बना रोहता का पीएस गार्डन, स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज के मुखारविंद से बही श्रीराम कथा

आगरा में श्रीकामतानाथ सेवा समिति के तत्वावधान में रोहता स्थित पीएस गार्डन में आयोजित श्रीराम कथा के प्रथम दिवस पर कथा स्थल मानो चित्रकूट धाम में परिवर्तित हो गया। व्यासपीठ पर विराजमान स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य महाराज ने संगीतमय शैली में चौपाई- एक बार त्रेता जुग माहीं, संभु गए कुम्भज ऋषि पाहीं… रामकथा मुनि बर्ज बखानी, सुनि महेश परम सुखुमानी… का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान शिव स्वयं श्रीराम कथा के परम श्रोता हैं।

उन्होंने कहा कि शिवजी दिन-रात श्रीराम के नाम का जप करते हैं। उन्होंने कहा कि हृदय में वही बसता है जो सबसे प्रिय होता है, और शिवजी को सियाराम का नाम सर्वाधिक प्रिय है।

स्वामी जी ने कहा कि जो व्यक्ति श्रद्धा से रामकथा सुनता है वह भगवान शिव की कृपा का पात्र बन जाता है। शिव-सती प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संकीर्ण विचार और संशय रिश्तों में दूरी पैदा करते हैं। यदि समाज रामकथा के संस्कारों को अपनाए तो हर घर शिवालय और रामालय बन सकता है।

कथा के दौरान करुणा कर अपना लो राम, अपनी शरण में ले लो राम…जैसे भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए। इस अवसर पर दयाराम देवाचार्य (ऋषिकेश), आयोजन समिति के अध्यक्ष राम सेवक शर्मा (जय भोले) और महामंत्री धर्मेंद्र त्यागी ने श्रद्धालुओं को कथा श्रवण के लिए आमंत्रित किया।

कार्यक्रम में मुख्य यजमान सिलेंद्र विथरिया सहित हाकिम सिंह त्यागी, दीनदयाल मित्तल, ऋषि उपाध्याय, रामवीर सिंह चाहर, अशोक फौजदार, महावीर त्यागी, किशोर लवानिया, रनवीर सोलंकी, सौरभ शर्मा, सतेंद्र पराशर, जितेंद्र प्रधान सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

स्वामी श्री रामस्वरूपाचार्य जी महाराज ने संदेश देते हुए कहा कि दांपत्य जीवन में पति-पत्नी एक-दूसरे के पूरक बनें और संतान को संस्कारवान बनाएं। उन्होंने आधुनिक परिधानों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मर्यादा और संस्कृति से युक्त जीवन ही राम और सीता के आदर्शों को जीवित रख सकता है।

शिव धनुष भंग होते ही गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, राम-जानकी विवाह से भक्तिमय हुआ वातावरण

गणेश दुर्गा महोत्सव कमेटी के तत्वावधान में लंगड़े की चौकी, शास्त्री नगर स्थित श्री हनुमंत धाम में चल रहे श्रीराम कथा महायज्ञ में भाव विभोर श्रोतागण। 

वहीं दूसरी ओर गणेश दुर्गा महोत्सव कमेटी के तत्वावधान में श्री हनुमंत धाम में चल रही 10 दिवसीय श्रीराम कथा के पंचम दिवस पर पुष्प वाटिका, सीता स्वयंवर और भगवान श्रीराम-माता जानकी के दिव्य विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया।

कथा व्यास भरत उपाध्याय ने बताया कि जब भगवान श्रीराम महर्षि विश्वामित्र के साथ मिथिला पहुंचे, तब पुष्प वाटिका में उनका माता सीता से प्रथम मिलन हुआ। यह प्रसंग केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्शों के संगम का प्रतीक है।

इसके बाद सीता स्वयंवर का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि राजा जनक ने शिव धनुष उठाने की शर्त रखी थी। अनेक राजा-महाराजा प्रयास कर असफल रहे, लेकिन भगवान श्रीराम ने गुरु की आज्ञा लेकर सहज भाव से शिव धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय धनुष भंग हो गया।

जैसे ही कथा में शिव धनुष भंग का प्रसंग आया, पूरा कथा पंडाल जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने खड़े होकर भगवान की महिमा का गुणगान किया।

इसके बाद राम-सीता विवाह का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने कहा कि यह विवाह केवल दो कुलों का नहीं बल्कि धर्म, प्रेम, सम्मान और मर्यादा का पावन मिलन है।

श्री हनुमंत धाम के महंत गोपी गुरु ने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह भारतीय संस्कृति में आदर्श दांपत्य जीवन का सर्वोत्तम उदाहरण है।

इस अवसर पर बलकेश्वर महादेव मंदिर के महंत अर्चित पांडे, सुनील विकल, पार्षद भरत शर्मा, प्रेमदास, पवन बंसल, पुष्कल गुप्ता, डॉ. दीपेश उपाध्याय, भोलानाथ अग्रवाल, महेंद्र सहित अनेक श्रद्धालुओं ने श्रीराम-जानकी के स्वरूपों की आरती उतारी।

SP_Singh AURGURU Editor