जेसीबी छोड़ने के नाम पर ₹1.25 लाख की मांग, आगरा में दरोगा पर रिश्वत का आरोप, जांच शुरू
आगरा के शमसाबाद थाने में तैनात रहे एसएसआई रमेश चंद माथुर पर जेसीबी मशीन छोड़ने के बदले ₹1.25 लाख रिश्वत लेने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता विजय सिंह का कहना है कि रकम देने के बावजूद मशीन नहीं छोड़ी गई। मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर से की गई है, जिस पर एसीपी शमसाबाद ने जांच शुरू कर तीन दिन में रिपोर्ट भेजने की बात कही है।
आगरा। आगरा में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। शमसाबाद थाने में तैनात रहे एक सब-इंस्पेक्टर पर जेसीबी मशीन छोड़ने के एवज में ₹1.25 लाख की रिश्वत लेने का आरोप लगा है। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता विजय सिंह पुत्र लक्ष्मण सिंह, निवासी डबरई, थाना शमसाबाद ने पुलिस कमिश्नर से लिखित शिकायत की है। उनके अनुसार, यह मामला शमसाबाद थाने के तत्कालीन एसएसआई रमेश चंद माथुर से जुड़ा है, जिनका हाल ही में कमला नगर थाने में तबादला हो चुका है।
विजय सिंह ने बताया कि नेत्रपाल सिंह और भजोरी लाल ने एक जेसीबी मशीन खरीदी थी। नेत्रपाल सिंह की मृत्यु के बाद 16 जुलाई 2025 को डबरई गांव में खेत समतलीकरण का कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान एसएसआई रमेश चंद माथुर मौके पर पहुंचे और जेसीबी मशीन को जब्त कर लिया।
रिश्वत का आरोप
शिकायत के अनुसार, एसएसआई ने जेसीबी मशीन छोड़ने के लिए ₹1.25 लाख की मांग की। आरोप है कि विजय सिंह ने मजबूरी में कस्बे के एक सेठ से ब्याज पर पैसे उधार लेकर उक्त रकम दरोगा को दे दी। लेकिन आरोप है कि रकम देने के बावजूद न तो जेसीबी मशीन छोड़ी गई और न ही पैसे लौटाए गए। लगभग आठ महीने तक इंतजार करने के बाद पीड़ित ने उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाया।
जांच के आदेश
मामले में शिकायत मिलने के बाद एसीपी शमसाबाद अमीषा सिंह ने पुष्टि की कि उन्हें प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और तीन दिन के भीतर जांच रिपोर्ट आगरा कार्यालय भेज दी जाएगी। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।