आस्था की गूंज से सराबोर आगरा: कहीं रामकथा, कहीं श्याम संकीर्तन से सजा भक्तिमय माहौल
आगरा। शहर में इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और सांस्कृतिक उत्सवों की अद्भुत छटा दिखाई दे रही है। कहीं श्रीराम कथा की अमृतधारा बह रही है तो कहीं खाटूश्याम के भजनों पर श्रद्धालु झूम रहे हैं। कथा, संकीर्तन, निशान यात्रा और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर नजर आए। विभिन्न स्थानों पर हुए आयोजनों में संतों के प्रवचन, भजन संकीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों ने वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया।
चित्रकूट धाम बना रोहता का पीएस गार्डन, श्रीराम जन्म पर गूंजे जयकारे
रोहता स्थित पीएस गार्डन में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन श्रीराम जन्मोत्सव का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन हुआ। व्यासपीठ पर विराजमान श्री कामदगिरि पीठाधीश्वर श्रीमद् जगतगुरु रामनंदाचार्य स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने “भए प्रकट कृपाला दीनदयाला...” दोहे के माध्यम से भगवान श्रीराम के प्राकट्य का वर्णन किया। जैसे ही राम जन्म का प्रसंग आया, कथा स्थल जय श्रीराम के उद्घोष और पुष्पवर्षा से गूंज उठा। संत ने कहा कि संत होना आसान है, लेकिन सरलता के साथ संतत्व निभाना कठिन है। पारिवारिक जीवन को संतुलित रखने के लिए पति-पत्नी में परस्पर सम्मान आवश्यक है। कथा में भगवान की विभिन्न लीलाओं का संगीतमय वर्णन हुआ। आयोजन में राम सेवक शर्मा, धर्मेन्द्र त्यागी, सिलेंद्र विथरिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
धर्म की रक्षा के लिए भगवान अवतार लेते हैं: स्वामी रामस्वरूपाचार्य
कथा के दौरान स्वामी रामस्वरूपाचार्य महाराज ने चौपाई “जब-जब होए धर्म की हानि…” के माध्यम से कहा कि जब धरती पर अधर्म बढ़ता है तो भगवान को अवतार लेना पड़ता है। उन्होंने जलंधर और वृन्दा की कथा सुनाते हुए कहा कि धर्म का उद्देश्य अधर्म को संरक्षण देना नहीं बल्कि उसे समाप्त करना है। यदि धर्म का प्रयोग अन्याय की रक्षा में होने लगे तो वह धर्म नहीं रहता। भगवान ने भी धर्म की रक्षा के लिए छल का आरोप सहा। कथा के अंत में भक्तों ने आरती कर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन समिति ने 19-20 मार्च को कथा स्थल पर निशुल्क स्वास्थ्य शिविर लगाने की घोषणा भी की।
रामायण त्याग और मर्यादा की अमर गाथा: भरत उपाध्याय

लंगड़े की चौकी, शास्त्री नगर में चल रही श्रीराम कथा के छठवें दिन कथा व्यास भरत उपाध्याय ने राम राज्याभिषेक से लेकर वनवास प्रसंग तक का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अयोध्या में जब राम के राज्याभिषेक की तैयारियां हो रही थीं, तब पूरा नगर उत्सव में डूबा था, लेकिन मंथरा की कुटिल बातों से कैकई ने भरत के लिए राज्य और राम के लिए वनवास मांग लिया। इस प्रसंग ने राजा दशरथ को गहरे शोक में डाल दिया।
कथा व्यास ने कहा कि निंदा और चुगली करने वाले लोग परिवार और समाज में कलह पैदा करते हैं। श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए राजसुख त्याग दिया, जो कर्तव्य पालन का सर्वोच्च उदाहरण है। कथा के अंत में श्रद्धालु राम को जप ले… भजन पर झूम उठे।
पापमोचनी एकादशी पर खाटूश्याम मंदिर में भक्ति का रंग

जीवनी मंडी स्थित खाटूश्याम मंदिर में श्री श्याम लाडला परिवार सेवा समिति की ओर से 23वां अरदास संकीर्तन आयोजित किया गया। पापमोचनी एकादशी के अवसर पर अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत हुई। पटियाला से आए भजन गायक विशाल शैली ने “हम श्याम लाडले हैं कोई आम नहीं…” सहित कई भजनों से भक्तों को भावविभोर कर दिया। ऑर्चिड, रजनीगंधा और गुलाब के फूलों से बाबा का मनोहारी श्रृंगार किया गया। देर रात तक चले संकीर्तन में श्याम भक्त भक्ति में लीन दिखाई दिए।
निशान यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, जय श्री श्याम से गूंजा शहर

श्री श्याम लाडला परिवार सेवा समिति की ओर से श्रीमन: कामेश्वर महादेव मंदिर से खाटू नरेश की निशान यात्रा निकाली गई। भाजपा नेता अलौकिक उपाध्याय ने हरी झंडी दिखाकर यात्रा को रवाना किया। यात्रा रावत पाड़ा, कचहरी घाट और छत्ता बाजार से होती हुई खाटूश्याम मंदिर पहुंची। श्रद्धालु हाथों में निशान लेकर “हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा” के जयघोष करते चले। मंदिर पहुंचने पर सूरजगढ़ धाम का निशान दूसरी बार अर्पित किया गया। मान्यता है कि इसके नीचे आने से भक्तों का भाग्य जाग जाता है।
मेहंदी उत्सव में झूमीं श्याम की सखियां

श्री श्याम वार्षिकोत्सव के अंतर्गत जीवनी मंडी स्थित खाटूश्याम मंदिर में मेहंदी और संकीर्तन उत्सव का आयोजन हुआ। महिलाओं ने हाथों में श्याम नाम की मेहंदी रचाकर भजनों पर नृत्य किया। भजन गायकों ने “श्याम रंग चढ़ा मेहंदी का…” जैसे भजनों से माहौल भक्तिमय बना दिया। आयोजकों ने बताया कि आगामी दिनों में निशान यात्रा, सामूहिक विवाह और भव्य संकीर्तन का आयोजन भी किया जाएगा।